आरएसएस पर दिग्विजय सिंह के ट्वीट से कांग्रेस और बीजेपी में बयानबाज़ी तेज
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संगठनात्मक क्षमता की तारीफ वाले ट्वीट के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद और बीजेपी के हमले तेज हो गए हैं। मामले पर कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने खुलकर विरोध जताया, जबकि बीजेपी नेताओं ने इसे अपने पक्ष में प्रचार का मौका बताया।
दिग्विजय सिंह का ट्वीट और संगठन पर टिप्पणी
दिग्विजय सिंह ने क्वोरा साइट से एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि किस तरह आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक और जनसंघ-बीजेपी का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर काम करते-करते प्रदेश का मुख्यमंत्री और देश का प्रधानमंत्री बन गया। उन्होंने इसे संगठन की शक्ति बताते हुए इसकी सराहना की और जय सिया राम लिखकर ट्वीट समाप्त किया।
इसके बाद दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि संगठन सृजन का उद्देश्य ही यही है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने संगठन निर्माण की प्रक्रिया जिला स्तर से शुरू की है और अब यह जिलों के नीचे के स्तरों तक जा रही है। उनका कहना था कि कांग्रेस को भी बूथ स्तर तक मजबूत संगठन खड़ा करना होगा और वे इसे करके दिखाएंगे।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर का कड़ा विरोध
तमिलनाडु के विरुधुनगर से कांग्रेस सांसद और राष्ट्रीय सचिव मणिकम टैगोर ने दिग्विजय सिंह के ट्वीट पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरएसएस को नफरत फैलाने वाला संगठन बताते हुए कहा कि यह संगठित तरीके से समाज में नफरत फैलाता है, इससे सीखने जैसा कुछ नहीं है।
टैगोर ने आरएसएस की तुलना अलकायदा जैसे आतंकी संगठन से करते हुए सवाल उठाया कि क्या किसी नफरत आधारित संगठन से कुछ सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीखना है तो अच्छे लोगों और सकारात्मक विचारों से सीखें। उन्होंने 140 साल पुरानी कांग्रेस का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे कुछ लोगों ने कमरे में बैठकर कांग्रेस शुरू की थी और महात्मा गांधी के नेतृत्व में यह लोगों का बड़ा आंदोलन बन गई।
मणिकम टैगोर ने आगे कहा कि भारत जोड़ो यात्रा ने कांग्रेस का पुनर्जीवन शुरू कर दिया है और भारत जोड़ो न्याय यात्रा ने पार्टी को अगले स्तर तक पहुंचा दिया है। उनके अनुसार राहुल गांधी लोगों के मुद्दों और सरकार की मोनोपॉली के खिलाफ लड़ रहे हैं, दबे-कुचले वर्गों का नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी के नेताओं के बयान राहुल गांधी की मदद करने के बजाय नुकसान पहुंचाते हैं।
दिग्विजय सिंह की सफाई और विचारधारा पर जोर
भोपाल लौटने पर एयरपोर्ट पर दिग्विजय सिंह से उनके ट्वीट पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने विवाद से इंकार करते हुए कहा कि अलग-अलग लोगों ने अपना-अपना मत व्यक्त किया है और उन्हें इस पर कुछ नहीं कहना। बीजेपी में शामिल होने की संभावनाओं पर उन्होंने हंसते हुए इसे खारिज कर दिया।
दिल्ली में उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि कांग्रेस की विचारधारा में कहीं कोई मतभेद नहीं है और सभी नेता एकजुट हैं। उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि इस परिवार के दो सदस्य शहीद हुए हैं, ऐसे परिवार के भीतर फूट डालने की बीजेपी की कोशिशों की उन्होंने घोर निंदा की।
बीजेपी नेताओं का पलटवार और मोदी की तारीफ
दिग्विजय सिंह के हालिया बयानों को लेकर बीजेपी ने उन पर तीखा हमला बोला और इसे नरेंद्र मोदी व संगठन की ताकत की पुष्टि के तौर पर पेश किया। गोरखपुर के बीजेपी सांसद और अभिनेता रवि किशन ने कहा कि दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री को अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग मोदी नहीं बन सकते, उन्हें उन पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
रवि किशन ने दावा किया कि नरेंद्र मोदी ने 24 साल से कभी छुट्टी नहीं ली, न डॉक्टर के पास गए और न ही साढ़े तीन घंटे से ज्यादा सोते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी के बारे में अपमानजनक बातें कहने वालों को सौ जन्म लेने पड़ेंगे। उनके अनुसार ऐसे बयान यह दिखाते हैं कि कांग्रेस कमजोर और हताश हो चुकी है, इसलिए वरिष्ठ नेता भी बचकाने शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।
बीजेपी सांसद राधा मोहन सिंह ने भी दिग्विजय सिंह के ट्वीट को भाजपा की कार्यकर्ता संस्कृति की मान्यता के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में ऐसा सिस्टम है कि बूथ स्तर पर काम करने वाला कार्यकर्ता भी राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि नितिन नबीन को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है, जो संगठन की मेरिट को दर्शाता है।
राधा मोहन सिंह के अनुसार नरेंद्र मोदी भी संगठन के साधारण कार्यकर्ता से उठकर प्रधानमंत्री बने हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के बावजूद, विपक्षी नेता भी जब अकेले में बैठते हैं तो भाजपा और मोदी की प्रशंसा करते हैं, और यह उनके लिए गर्व की बात है।
निष्कर्ष: संगठन, विचारधारा और राजनीतिक संदेश की जंग
दिग्विजय सिंह के आरएसएस की संगठनात्मक शक्ति की तारीफ वाले ट्वीट ने कांग्रेस के अंदर वैचारिक असहजता और बीजेपी के साथ राजनीतिक टकराव दोनों को एक साथ उजागर कर दिया। जहां मणिकम टैगोर जैसे नेता आरएसएस को नफरत की राजनीति का केंद्र मानकर उससे किसी भी तरह की सीख लेने का विरोध कर रहे हैं, वहीं दिग्विजय सिंह संगठन निर्माण के संदर्भ में इसे उदाहरण के रूप में देख रहे हैं।
दूसरी ओर बीजेपी ने इस बयान को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश की और इसे मोदी और भाजपा की कार्यकर्ता आधारित राजनीति की स्वीकृति के रूप में पेश किया। पूरे विवाद ने यह साफ कर दिया कि आने वाले समय में संगठन की क्षमता, विचारधारा और नेतृत्व की तसवीर को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है, जिसमें आरएसएस, कांग्रेस और भाजपा तीनों ही केंद्र में रहेंगे।
Arvind Vishwakarma