जीतू पटवारी का दमदार विरोध, आदिवासी बस्ती हटाने पर चेतावनी

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जीतू पटवारी का दमदार विरोध, आदिवासी बस्ती हटाने पर चेतावनी

भोपाल में आदिवासी बस्ती हटाने के नोटिस पर सियासी घमासान

भोपाल के मानस भवन के पास दशकों से बसकर रह रहे आदिवासी परिवारों को हटाने के नोटिस के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने खुलकर मोर्चा खोल दिया। उन्होंने प्रशासन को साफ चेतावनी दी कि बिना निवासियों की संतुष्टि के एक भी ईंट तोड़ी गई तो वे खुद कार्यकर्ताओं के साथ वहीं खड़े रहेंगे।

आदिवासी महिलाएं शिकायत लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं

जीतू पटवारी सामाजिक न्याय सम्मेलन में शामिल होने के लिए मानस भवन पहुंचे थे। इसी दौरान मानस भवन से लगी आदिवासी बस्ती की महिलाओं ने नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी के साथ उनसे मुलाकात की। महिलाओं ने बताया कि वे पिछले 60–70 साल से वहीं झुग्गी बस्ती में रह रही हैं और प्रशासन ने उनके घर तोड़ने के नोटिस जारी कर दिए हैं।

स्थानीय महिलाओं ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर तंग गलियों में छोटे-छोटे पक्के घर बनाए हैं, लेकिन अब प्रशासन मानस भवन के विस्तार के लिए इन्हें तोड़ना चाहता है। शिकायत सुनने के बाद पटवारी खुद बस्ती में पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

पोस्टर लगाए गए, प्रशासनिक अफसरों से संपर्क की कोशिश

बस्ती में घरों के बाहर हाथ से लिखे पोस्टर चिपके थे, जिन पर निवासियों ने अपने घर बचाने की गुहार लगाई थी। इस दौरान पटवारी ने मौके से ही मुख्य सचिव अनुराग जैन को फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने स्थानीय एसडीएम से बात की और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

फोन पर चेतावनी: एक भी ईंट हटी तो यहीं खड़ा मिलूंगा

एसडीएम से बातचीत में पटवारी ने कहा कि कलेक्टर से संपर्क करने की कोशिश की, पर उनका फोन बंद आ रहा है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद से यहां रह रहे आदिवासी परिवारों के साथ इस तरह अन्याय नहीं किया जा सकता। यदि मानस भवन के लिए ये मकान तोड़े जाएंगे तो वे और पूरी कांग्रेस पार्टी उनके खिलाफ खड़ी होगी।

पटवारी ने यह भी कहा कि जब तक बस्ती के लोगों को उनकी सुविधा के अनुसार संतोषजनक आवास नहीं दिया जाता, तब तक किसी भी तरह की तोड़फोड़ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन एक भी ईंट हटाता है तो वे मौके पर मौजूद रहेंगे और जरूरत पड़ी तो गिरफ्तारी भी देंगे।

दूर बसाने के प्रस्ताव पर आपत्ति

एसडीएम ने बातचीत में कहा कि बस्ती के लोगों को आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस पर पटवारी ने सवाल उठाया कि यदि उन्हें 40 किलोमीटर दूर बसाया जाएगा तो उनकी आजीविका और बच्चों की पढ़ाई पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कई लोग बीमार हैं, बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं और ऐसे समय में रात में नोटिस बांटना उचित नहीं है।

एडीएम से भी सख्त लहजे में बात

पटवारी ने एडीएम से फोन पर कहा कि मानस भवन के पास करीब 60 साल पुरानी आदिवासी बस्ती है और यदि इसे तोड़ने की कार्रवाई की जाती है तो पूरी कांग्रेस पार्टी सड़क पर उतरकर विरोध करेगी। उन्होंने दोहराया कि बस्ती से एक भी ईंट नहीं हटाने दी जाएगी।

बस्तीवासियों का दर्द: यहीं डाली है शहर की नींव

आदिवासी बस्ती की रहवासी रानू ने बताया कि उनका बचपन इसी बस्ती में बीता है और वे 80–90 साल से यहां रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के मानस भवन, गांधी भवन सहित कई इमारतों की नींव उन्होंने ही मजदूरी करके डाली, तब उन्हें रोजाना 10–12 रुपये की मज़दूरी मिलती थी। उनका आरोप है कि आदिवासियों के नाम पर सरकार बातें तो करती है, लेकिन असली संकट के समय साथ नहीं देती।

एक अन्य रहवासी छाया सिंह वाखला ने कहा कि बच्चों की परीक्षाओं के बीच मकान तोड़ने की तैयारी उनके भविष्य पर सीधी चोट है। सरकार जिस मल्टी में फ्लैट देने की बात कर रही है, वहां जाने पर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होगी। उनका कहना है कि जब सरकारी नीतियों में कहा जाता है कि आदिवासियों को उनकी बसाहट से नहीं हटाया जाएगा, तो फिर प्रशासन उनके घर क्यों तोड़ना चाह रहा है।

निष्कर्ष: पुनर्वास और न्यायसंगत समाधान पर जोर

भोपाल की इस आदिवासी बस्ती को लेकर प्रशासन और कांग्रेस के बीच टकराव तेज हो गया है। एक तरफ प्रशासन भवन विस्तार और वैकल्पिक आवास की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बस्तीवासी और विपक्ष दूरी, आजीविका और शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। जीतू पटवारी ने साफ संकेत दिया है कि जब तक स्थानीय लोगों को संतोषजनक और नजदीक पुनर्वास नहीं मिलता, तब तक वे किसी भी तरह की तोड़फोड़ का विरोध करते रहेंगे। अब नजर प्रशासन के फैसले और संभावित राजनीतिक-सामाजिक दबाव के बीच निकलने वाले समाधान पर है।

Adarsh Chaurasiya