आरएसएस शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का विशेष संबोधन

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आरएसएस शताब्दी  समारोह में पीएम मोदी का  विशेष संबोधन

आरएसएस शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का विशेष संबोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह में भाग लिया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली के डॉक्टर आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने विशेष रूप से तैयार किया गया स्मृति डाक टिकट और सिक्का जारी किया, जो संघ के इतिहास और योगदान को दर्शाता है।

संघ के योगदान का किया उल्लेख

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में संघ के स्वयंसेवकों के त्याग और समर्पण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संघ ने समाज के हर आयाम को छुआ है और राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माण की राह चुनी है। शाखाओं के माध्यम से संघ ने समाज में समरसता और सेवा की भावना का प्रसार किया है।

संघ की ऐतिहासिक भूमिका

पीएम मोदी ने बताया कि संघ ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर विभाजन की त्रासदी तक, हर कठिन समय में राष्ट्र के प्रति अपनी भूमिका निभाई है। उन्होंने 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में संघ के स्वयंसेवकों की भागीदारी का भी उल्लेख किया।

आदिवासी समाज के प्रति योगदान

प्रधानमंत्री ने आदिवासी समाज की परंपराओं और कला के संरक्षण में संघ के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि संघ ने दुर्गम इलाकों में भी आदिवासियों के जीवन स्तर को सुधारने का प्रयास किया है।

संघ पर लगे प्रतिबंध और चुनौतियां

पीएम मोदी ने संघ पर लगे प्रतिबंधों और अन्याय का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सबके बावजूद संघ ने कभी कटुता को स्थान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि संघ पर चाहे कितने भी थपेड़े आए हों, वह हमेशा अडिग रहा है और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बना रहा है।

वर्तमान चुनौतियों पर विचार

पीएम मोदी ने वर्तमान समय की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विदेशी आर्थिक निर्भरता और डेमोग्राफिक बदलाव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए संघ ने एक रोडमैप तैयार किया है।

संघ की स्थापना का महत्व

पीएम मोदी ने कहा कि संघ की स्थापना भारतीय परंपरा का पुनरुत्थान है। उन्होंने इस अवसर पर संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने संघ के स्वयंसेवकों को उनकी सेवा और समर्पण के लिए शुभकामनाएं दीं और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को सराहा।