अभिषेक बनर्जी का चुनाव आयोग और बीजेपी पर तीखा हमला
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने अलीपुरद्वार की एक जनसभा में चुनाव आयोग और बीजेपी पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें व्यंग्य में नया नाम दिया और बीजेपी सांसदों की तुलना सांप से की।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि जिन लोगों के नाम सूची में होने चाहिए, वे गायब कर दिए जा रहे हैं, जबकि मृत लोगों के नाम को जीवित दिखाया जा रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जादूगर बताते हुए आरोप लगाया कि वे मतदाताओं को गायब कर रहे हैं।
बीजेपी सांसदों की तुलना सांप से
अपने भाषण के दौरान अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी सांसद और सांप एक जैसे होते हैं। उनके मुताबिक, चाहे किसी सांप को घर के पीछे पाल लिया जाए, उसे दूध और केला खिलाया जाए, फिर भी वह अपनी फितरत से मजबूर होकर एक दिन डंसता ही है। इस बयान के जरिए उन्होंने इशारा किया कि बीजेपी नेताओं पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
‘आबर जितबे बांग्ला’ अभियान और 2026 की तैयारी
अभिषेक बनर्जी इस समय ‘आबर जितबे बांग्ला’ अभियान के तहत 19 दिनों में 26 रैलियां कर रहे हैं। इसे 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस की आक्रामक चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी इस अभियान के जरिए基层 स्तर पर समर्थन मजबूत करने और चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार के खिलाफ अपने राजनीतिक संदेश को जनता तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
31 दिसंबर की heated बैठक और आरोप
लेख में इससे पहले 31 दिसंबर को हुई एक बैठक का भी जिक्र है, जब तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की थी। अभिषेक बनर्जी का दावा है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर उठाई गई उनकी पार्टी की गंभीर आपत्तियों को दूर नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही वे अपनी बात रखने लगे, मुख्य चुनाव आयुक्त का रवैया आक्रामक हो गया और उन्होंने अपना आपा खो दिया।
अभिषेक के अनुसार, उन्होंने बैठक में साफ कहा कि चुनाव आयुक्त नामित पदाधिकारी हैं जबकि वे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं, इसलिए दोनों की जवाबदेही अलग-अलग है। उन्होंने यह चुनौती भी दी कि अगर चुनाव आयोग में हिम्मत है तो उस बैठक की फुटेज सार्वजनिक की जाए।
चुनाव आयोग की चेतावनी
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने बैठक के बाद तृणमूल कांग्रेस को चेतावनी दी कि उसके कार्यकर्ता चुनाव ड्यूटी पर तैनात किसी भी कर्मचारी को धमकाने में शामिल न हों। आयोग ने साफ कहा कि यदि किसी बूथ लेवल अधिकारी, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारी, असिस्टेंट अधिकारी, ऑब्जर्वर या किसी भी चुनावी कर्मचारी को धमकाने की घटना सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ममता बनर्जी की अलग आपत्तियां
रिपोर्ट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस आरोप का भी उल्लेख है जिसमें उन्होंने दावा किया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान राज्य की वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटाए गए हैं और मतदाताओं की मैपिंग में गंभीर त्रुटियां हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग राज्य सरकार को विश्वास में लिए बिना ऑब्जर्वर नियुक्त कर रहा है और पूरी प्रक्रिया बीजेपी के हित में दिखाई देती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच मतदाता सूची और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर टकराव तेज होता दिख रहा है। अभिषेक बनर्जी के तीखे बयान, चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप और बीजेपी पर किए गए हमले संकेत देते हैं कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीतिक लड़ाई और अधिक आक्रामक होने वाली है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से दी गई चेतावनी और प्रक्रिया की रक्षा यह दिखाती है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र और चुनावी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।
Pushpendra Chaubey