भोपाल AJAKS सम्मेलन में महिला IAS का जाति बयान, फर्जी आदेश मामले में टाइपिस्ट गिरफ्तार
भोपाल में आयोजित अजाक्स (AJAKS) सम्मेलन से जुड़ा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। सम्मेलन के दौरान महिला आईएएस अधिकारी मीनाक्षी सिंह के जातिगत पहचान और सवर्ण समाज पर दिए गए बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इसी कार्यक्रम से जुड़े आईएएस संतोष वर्मा के पुराने और नए वीडियो भी सामने आए हैं, जिनके कारण मामला और गंभीर हो गया है।
आईएएस मीनाक्षी सिंह का जातिगत पहचान पर बयान
वायरल वीडियो में आईएएस मीनाक्षी सिंह कहती दिखाई देती हैं कि समाज को जोड़ने की सबसे पहली धुरी परिवार होता है। उनके अनुसार बच्चों को यह बताना जरूरी है कि वे आदिवासी हैं और उनकी जाति क्या है। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज पक्षपात करता है, इसलिए अपने समाज के लोगों को पहचानना और उनकी मदद करना आवश्यक है।
मीनाक्षी सिंह ने आदिवासी समाज के लोगों से अपील की कि वे बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों से मिलने में संकोच न करें और अपनी समस्याएं खुलकर उनके सामने रखें। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
संतोष वर्मा का ‘माई का लाल’ वाला वीडियो फिर चर्चा में
इसी सम्मेलन से जुड़ा आईएएस संतोष वर्मा का एक और वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे समाज के लोगों से 2016 जैसी ताकत फिर से दिखाने की बात करते दिखते हैं। वीडियो में वे दोबारा ‘माई का लाल’ बनने की अपील करते हुए नजर आते हैं।
संतोष वर्मा इससे पहले भी हाईकोर्ट और ब्राह्मण समाज की बेटियों को लेकर दिए गए अपने बयानों के कारण विवादों में रह चुके हैं। अब नए वीडियो के सामने आने से उनके खिलाफ चल रही बहस और तेज हो गई है।
फर्जी अदालती आदेश टाइप करने वाली टाइपिस्ट की गिरफ्तारी
आईएएस संतोष वर्मा को पदोन्नति का लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी अदालती आदेश टाइप करने के मामले में कोर्ट कर्मचारी नीतू सिंह को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया। इंदौर की एमजी रोड पुलिस ने पूछताछ के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की। हालांकि, शुक्रवार शाम को उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई।
इस मामले में पदोन्नति से जुड़ा फैसला देने वाले जज अग्रिम जमानत पर हैं, जबकि संतोष वर्मा सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रिहा हैं। पुलिस वर्मा से पूछताछ और हस्ताक्षर के नमूने लेना चाहती है, लेकिन अधिकारियों के अनुसार वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस उनकी अग्रिम जमानत रद्द कराने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है।
संघटनाओं की आपत्ति और संवैधानिक बहस
महिला आईएएस अधिकारी के बयान पर मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी सेवा संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि आईएएस अधिकारी संविधान की शपथ लेते हैं, जिसमें जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर सभी नागरिकों को समान दृष्टि से देखने की बात कही गई है।
नायक ने इस सोच को असंवैधानिक बताया और कहा कि नौकरशाही में जाति के आधार पर काम करने की मानसिकता बेहद खतरनाक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे दृष्टिकोण को प्रोत्साहन मिला तो प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक समरसता दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
निष्कर्ष
अजाक्स सम्मेलन में दिए गए बयानों, संतोष वर्मा के विवादित वीडियो और फर्जी अदालती आदेश के मामले ने मिलकर मध्यप्रदेश की प्रशासनिक और सामाजिक दोनों ही स्तरों पर नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर जाति और प्रतिनिधित्व के प्रश्न उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
Amit Pateria