कृषि मंत्री ने खाद संकट के आरोपों को बताया प्री-प्लान, कमी से किया इंकार
मध्यप्रदेश में खाद की कथित कमी, किसानों की लंबी कतारों और वायरल वीडियो को लेकर उठे विवाद पर प्रदेश के किसान कल्याण और कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंसाना ने स्पष्टीकरण दिया। वे भोपाल में मोहन सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
वायरल वीडियो पर दावा, खाद संकट के आरोप खारिज
कंसाना ने किसानों की पिटाई और दुर्व्यवहार से जुड़े वायरल वीडियो पर बड़ा दावा किया कि लगभग सौ किसानों की लाइन में जानबूझकर केवल चार-पांच लोगों को घुसाया जाता है, जो हंगामा करते हैं, थप्पड़ तक मारते हैं और फिर वही घटनाएं वीडियो बनाकर वायरल की जाती हैं। मंत्री ने दो टूक कहा कि मध्यप्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है और किसानों को गुमराह किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की समस्या नहीं है और इस तरह की बातें सिर्फ कांग्रेस से जुड़े लोग या उनके मित्र ही कह रहे हैं। कंसाना के अनुसार, अभी तक ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जिसमें किसी किसान ने खाद न मिलने के कारण फसल नहीं बोई हो।
खाद वितरण में नई व्यवस्था और ई-विकास प्रणाली
कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार खाद प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ई-विकास प्रणाली के तहत खाद की होम डिलीवरी शुरू कर रही है। उनके अनुसार, इस व्यवस्था से किसानों को लाइन में लगने की परेशानी कम होगी और वितरण प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
कर्जमाफी योजना पर स्पष्टीकरण
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने कंसाना से पूछा कि सरकार की दो साल की उपलब्धियों में किसान कर्जमाफी योजना का उल्लेख क्यों नहीं है और क्या यह योजना बंद कर दी गई है। जवाब में उन्होंने कहा कि यह योजना भाजपा के घोषणा पत्र में थी ही नहीं, बल्कि यह कांग्रेस का वादा था। उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार ने यह वादा पूरा नहीं किया, जिसके कारण उनकी सरकार चली गई, यह बात सबको मालूम है।
कतार में खड़े किसानों की मौत के मामले
खाद वितरण केंद्रों पर लंबी कतारों के दौरान दो किसानों की मौत के मामले भी सामने आए हैं। गुना जिले के बागेरी (बमोरी) खाद वितरण केंद्र पर आदिवासी महिला भूरिया बाई दो दिन तक खाद लेने के लिए लंबी लाइन में खड़ी रहीं। नवंबर 2025 के अंत में ठंड और लगातार प्रतीक्षा के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।
इसी तरह टीकमगढ़ जिले के बडोरा खाद केंद्र पर किसान जमुना कुशवाहा लगातार तीन दिनों तक यूरिया की लाइन में खड़े रहे। 9 दिसंबर 2025 को अपनी बारी का इंतजार करते हुए उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इन घटनाओं ने खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, हालांकि मंत्री का दावा है कि राज्य में खाद की कोई कमी नहीं है।
सरकार की उपलब्धियां और आगे की योजना
कंसाना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि और किसान हित से जुड़ी सरकार की दो साल की उपलब्धियां गिनाईं और आगे का रोडमैप भी साझा किया। उन्होंने आगामी कृषि योजनाओं और कार्ययोजना के बारे में संकेत देते हुए कहा कि सरकार किसानों के लिए विभिन्न कार्यक्रमों पर काम कर रही है।
लघु उद्योग और ग्रामोद्योग को बढ़ावा
कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि लघु उद्योग के विकास से ग्रामोद्योग और कृषि उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। उनके अनुसार, इससे शहरी क्षेत्रों में छोटे उद्योग मजबूत होंगे और प्रदेश में अधिक से अधिक लोगों को काम मिल सकेगा।
कुल मिलाकर, सरकार ने जहां खाद की कमी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है, वहीं कतारों में खड़े किसानों की मौत और वायरल वीडियो जैसी घटनाएं खाद वितरण तंत्र की चुनौतियों को सामने लाती हैं।
Sachin Saxena