अमेरिका की निगरानी में भारत के लिए वेनेजुएला से तेल खरीद की संभावनाएं
अमेरिका के ट्रम्प प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की सशर्त अनुमति दी जा सकती है। यह अनुमति अमेरिकी प्रतिबंधों और निगरानी के दायरे में रहेगी, हालांकि शर्तों का पूरा विवरण अभी सामने नहीं आया है।
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रुका था भारत-वेनेजुएला तेल व्यापार
वेनेजुएला पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) का सदस्य है और उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन वह वैश्विक आपूर्ति का केवल लगभग 1% ही देता है। अमेरिका ने 2019 में वेनेजुएला पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, जिनमें सेकेंडरी सेंक्शंस भी शामिल थे। इसके तहत जो भी देश या कंपनी वेनेजुएला से तेल खरीदती, उसे अमेरिकी बाजार और बैंकिंग सुविधाओं से रोका जा सकता था।
इन प्रतिबंधों के चलते कई देशों ने वेनेजुएला से तेल खरीदना बंद कर दिया। भारत भी पहले वेनेजुएला से काफी मात्रा में तेल आयात करता था और कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार उसके कुल तेल आयात का लगभग 6% वेनेजुएला से आता था। प्रतिबंधों के बाद भारत को यह आयात रोकना पड़ा, जिससे उसकी सप्लाई में एक विकल्प कम हो गया।
आंशिक ढील से दोबारा शुरू हुआ आयात, फिर हुई सख्ती
अमेरिका ने 2023-2024 में कुछ समय के लिए वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों में आंशिक ढील दी, जिसके बाद भारत ने फिर से वेनेजुएला से तेल खरीदना शुरू किया। 2024 में भारत का वेनेजुएला से आयात औसतन 63,000 से 1 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर तक पहुंच गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार 2025 में वेनेजुएला से भारत का तेल आयात बढ़कर लगभग 1.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया। लेकिन मई 2025 में अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल पर फिर से सख्ती बढ़ा दी। इसके परिणामस्वरूप 2026 की शुरुआत में भारत का वेनेजुएला से क्रूड आयात घटकर कुल आयात का केवल 0.3% रह गया।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और उसकी ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में वेनेजुएला से तेल आयात की पुनर्बहाली भारत के लिए आपूर्ति के एक अतिरिक्त स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण हो सकती है।
रिलायंस की नई कोशिशें और अमेरिकी एजेंसियों से बातचीत
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वेनेजुएला से फिर से कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिका से मंजूरी लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस मामले से जुड़े दो सूत्रों ने बताया कि रिलायंस वैकल्पिक तेल सप्लाई सुरक्षित करना चाहती है, क्योंकि पश्चिमी देश भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का दबाव बना रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, रिलायंस के प्रतिनिधि इस मंजूरी के लिए अमेरिकी विदेश मंत्रालय (यूएस स्टेट डिपार्टमेंट) और यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट के साथ बातचीत कर रहे हैं। रॉयटर्स द्वारा भेजे गए ईमेल पर रिलायंस ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
रिलायंस के पास गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स है, जिसकी क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन है। कंपनी पहले भी अमेरिकी लाइसेंस के जरिए वेनेजुएला से तेल खरीद चुकी है। 2025 के पहले चार महीनों में वेनेजुएला की सरकारी कंपनी PDVSA ने रिलायंस को चार जहाजों से तेल भेजा था, जो औसतन रोजाना करीब 63,000 बैरल के बराबर था।
इसके बाद मार्च-अप्रैल 2025 में अमेरिका ने अधिकतर लाइसेंस निलंबित कर दिए और वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी। नतीजतन मई 2025 में रिलायंस के लिए वेनेजुएला से आया आखिरी जहाज भारत पहुंचा। रिलायंस ने बाद में कहा था कि यदि अमेरिकी नियमों के तहत गैर-अमेरिकी खरीदारों को वेनेजुएला से तेल खरीदने की इजाजत मिलती है, तो वह फिर से इस विकल्प पर विचार करेगी।
व्हाइट हाउस में ट्रम्प की तेल कंपनियों से बैठक
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। इनमें एक्सॉन मोबिल, कोनोकोफिलिप्स और शेवरॉन जैसी कंपनियां शामिल थीं। इस बैठक में ट्रम्प ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में लगभग 9 लाख करोड़ रुपए के निवेश की संभावना का उल्लेख किया।
ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका तय करेगा कि कौन सी कंपनियां वेनेजुएला में जाएंगी और वहां निवेश करेंगी। शेवरॉन के वाइस चेयरमैन मार्क नेल्सन ने कहा कि उनकी कंपनी वेनेजुएला में निवेश के लिए प्रतिबद्ध है और अभी भी वहां काम कर रही है। कई छोटी कंपनियों और निवेशकों ने भी बैठक में ट्रम्प की नीतियों की सराहना की और निवेश की इच्छा जताई।
एक्सॉन मोबिल के सीईओ डैरेन वुड्स ने हालांकि बैठक में कहा कि फिलहाल वेनेजुएला "निवेश के लायक नहीं" है, क्योंकि कंपनी की संपत्तियां वहां दो बार जब्त की जा चुकी हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ट्रम्प प्रशासन और वेनेजुएला की सरकार मिलकर बड़े बदलाव लाते हैं, तो कंपनी भविष्य में वापस लौटने पर विचार कर सकती है।
तेल मुनाफे के बंटवारे और निवेश की ट्रम्प योजना
ट्रम्प ने बैठक में कहा कि कंपनियों को वेनेजुएला में निवेश करना होगा और उनका पैसा जल्दी वापस मिलना चाहिए। इसके बाद होने वाले लाभ को वेनेजुएला, अमेरिका और संबंधित कंपनियों के बीच बांटा जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस बंटवारे के लिए उनके पास एक फॉर्मूला है और इस योजना पर बातचीत जारी है।
अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल तेल देने की घोषणा
ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल कच्चा तेल सौंपेगी। उनके मुताबिक यह तेल बाजार भाव पर बेचा जाएगा और इससे मिलने वाली रकम पर उनका कंट्रोल रहेगा।
आकलन के अनुसार 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की कीमत मौजूदा समय में लगभग 25 हजार करोड़ रुपए के बराबर है। ट्रम्प ने कहा कि इस रकम का उपयोग वेनेजुएला और अमेरिका दोनों देशों के लोगों के हित में किया जाएगा।
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को इस योजना को तुरंत लागू करने के निर्देश दिए हैं। योजना के तहत तेल को स्टोरेज जहाजों के जरिए सीधे अमेरिकी बंदरगाहों तक पहुंचाया जाएगा।
निष्कर्ष: भारत के लिए एक अतिरिक्त विकल्प और अमेरिकी नीति की भूमिका
कुल मिलाकर, अमेरिकी प्रतिबंधों और राजनीतिक निर्णयों के बीच वेनेजुएला से तेल व्यापार का भविष्य अमेरिका की नीतियों पर निर्भर है। यदि भारत को फिर से वेनेजुएला से तेल खरीदने की अनुमति मिलती है, तो उसे तेल आपूर्ति के लिए एक और विकल्प उपलब्ध होगा, जो उसकी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो सकता है। वहीं, रिलायंस जैसी कंपनियां अमेरिकी मंजूरी के आधार पर अपने व्यावसायिक कदम तय कर रही हैं और ट्रम्प प्रशासन वेनेजुएला के तेल संसाधनों को वैश्विक ऊर्जा समीकरण में नए सिरे से शामिल करने की कोशिश कर रहा है।
Navjeet Kaur