इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से गंभीर हालात, 11 ICU, प्रदेशव्यापी शुद्ध जल अभियान शुरू

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इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से गंभीर हालात, 11 ICU, प्रदेशव्यापी शुद्ध जल अभियान शुरू

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हालात गंभीर, प्रदेशभर में शुद्ध जल अभियान

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई लगभग 20 मौतों के बाद अब मरीजों की संख्या में धीरे-धीरे कमी आ रही है, लेकिन कई रोगियों की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

मरीजों की संख्या, ICU और वेंटिलेटर पर गंभीर हालात

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार फिलहाल 45 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से 11 मरीज आईसीयू में और 4 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। इन गंभीर मरीजों को किडनी और लिवर की गंभीर समस्याओं के साथ मल्टी ऑर्गन फेल्योर जैसी जटिलताएं हैं। डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। वेंटिलेटर पर रखे गए चार मरीज करीब एक सप्ताह से गंभीर अवस्था में हैं, इनमें अधिकांश बुजुर्ग हैं और कुछ को पहले से अन्य बीमारियां भी हैं।

शुक्रवार को अस्पताल की ओपीडी में डायरिया के 15 नए मरीज पहुंचे, जिनमें से दो को भर्ती किया गया। कुछ मरीजों को इलाज के बाद डिस्चार्ज भी किया जा रहा है।

उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक और प्रशासनिक कदम

घटना के मद्देनजर शुक्रवार देर शाम अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय नीरज मंडलोई और इंदौर जिले के प्रभारी, अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन की विशेष उपस्थिति में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कमिश्नर डॉ. सुदाम खाडे, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे और भागीरथपुरा क्षेत्र की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।

प्रदेशव्यापी शुद्ध जल अभियान की शुरुआत

अपर मुख्य सचिवों ने जानकारी दी कि 10 जनवरी से पूरे मध्य प्रदेश में प्रदेशव्यापी शुद्ध जल अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत जल आपूर्ति की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सभी जल स्रोतों की जांच, त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई और व्यापक जनजागरूकता को प्राथमिकता दी जाएगी। भागीरथपुरा की घटना को चेतावनी मानते हुए पूरे प्रदेश में जल आपूर्ति प्रणाली की सतत समीक्षा का निर्णय लिया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने और नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके।

मंडलोई ने नगर निगम को निर्देश दिए कि शुद्ध और सुरक्षित जल उपलब्ध कराने के लिए लगातार सतर्क और तैयार रहें। शासन-प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पूरे प्रदेश में सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

इलाज का खर्च, स्वास्थ्य जांच और जागरूकता अभियान

बैठक में निर्देश दिया गया कि अस्पतालों में किए जा रहे उपचार का आर्थिक बोझ किसी भी प्रभावित परिवार पर न पड़े। इसके लिए कलेक्टर स्वयं सतत निगरानी करेंगे और डिस्चार्ज के समय यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मरीजों से बिल की राशि न ली जाए। अस्पताल प्रबंधन को इस व्यवस्था से अवगत कराए जाने के निर्देश दिए गए।

भागीरथपुरा क्षेत्र में शीघ्र व्यापक स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें सभी नागरिकों की जांच होगी। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कोमॉर्बिडिटी की पहचान और जागरूकता के लिए ‘अभियान विश्वास’ नाम से विशेष जनविश्वास अभियान चलाया जाएगा, जिसका उद्देश्य जनता का भरोसा फिर से बहाल करना है।

स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र और स्व-सहायता समूह

भागीरथपुरा क्षेत्र के लगभग 50 हजार परिवारों को 20–25 जोन में विभाजित करने की योजना बनाई गई है। गठित स्वसहायता समूहों और आवश्यकता अनुसार नए समूहों के माध्यम से स्थानीय महिलाओं और आम नागरिकों की भागीदारी विकास और कल्याणकारी गतिविधियों में सुनिश्चित की जाएगी।

हर 50–100 घरों पर एक प्रभारी अधिकारी तैनात किया जाएगा। ये अधिकारी और समूह अस्पताल से डिस्चार्ज हुए मरीजों से लगातार संपर्क में रहेंगे, दवाओं के सेवन पर निगरानी रखेंगे और बीमारी के दोबारा उभरने को रोकने पर ध्यान देंगे।

बोरवेल, पाइपलाइन और जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार

बैठक में बताया गया कि मेन पाइपलाइन से जुड़े सभी सरकारी बोरवेल सील किए जाएंगे, ताकि किसी भी प्रकार के जल प्रदूषण की संभावना को रोका जा सके। भागीरथपुरा क्षेत्र का ओवरहेड टैंक परीक्षण में सुरक्षित पाया गया है और 13 जनवरी से इस टंकी के माध्यम से जलापूर्ति फिर शुरू करने की योजना है।

हालांकि जल नमूने शुद्ध पाए गए हैं, फिर भी एहतियात के तौर पर उबालकर पानी पीने की सलाह जारी रहेगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि समस्या के तत्काल समाधान के साथ-साथ स्थायी समाधान हेतु भी ठोस प्रयास किए जाएं।

रियल-टाइम मॉनिटरिंग और सीवेज सुधार

यह भी निर्णय लिया गया कि केवल भागीरथपुरा ही नहीं, बल्कि पूरे इंदौर शहर की जल आपूर्ति और भूजल गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। इसके लिए शहर के 105 ओवरहेड टैंकों पर इलेक्ट्रॉनिक या कंप्यूटरीकृत वॉटर एनालाइजर लगाए जाएंगे। रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए कंट्रोल रूम में विशेष व्यवस्था की जाएगी।

सीवेज लाइन, मेन पाइपलाइन और विभिन्न चैंबरों में लीकेज रोकने, प्लास्टरिंग और सीलिंग के कार्यों को प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए गए हैं।

घटना से सबक और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था

अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने स्वीकार किया कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण रही, लेकिन इसे सबक मानते हुए शासन-प्रशासन भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न होने देने के लिए प्रतिबद्ध है। पीड़ितों को बेहतर चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराना और नागरिकों को सुरक्षित, शुद्ध पेयजल देना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्र में किट वितरित की जा रही हैं, जिनमें ओआरएस के 10 पैकेट और जिंक की 30 गोलियां शामिल हैं। क्षेत्र में एम्बुलेंस तैनात हैं और 24 घंटे चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है। जरूरत पड़ने पर मरीजों को एमवाय चिकित्सालय, अरबिंदो अस्पताल और बच्चों को चाचा नेहरु अस्पताल में रेफर किया जा रहा है।

निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाने वाले मरीजों के लिए भी जिला प्रशासन की ओर से मुफ्त इलाज, जांच और दवाइयों की व्यवस्था कराई जा रही है। प्रभावित क्षेत्र में प्रचार सामग्री वितरित की जा रही है, जिसमें उल्टी-दस्त और संबंधित बीमारियों से बचाव की जानकारी दी जा रही है।

दूषित जल नियंत्रण, सफाई और क्लोरिनेशन

निरीक्षण के दौरान पेयजल टैंकरों से पानी वितरण की व्यवस्था की गई और लाइन लीकेज सुधार कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। नगर निगम द्वारा गठित 32 बीटों के माध्यम से भागीरथपुरा क्षेत्र के हर हिस्से में दूषित जल पर नियंत्रण, स्वच्छ पेयजल आपूर्ति और व्यापक सफाई अभियान की नियमित समीक्षा की जा रही है।

पाइपलाइन की फ्लशिंग का काम जारी है। उपभोक्ताओं को मिलने वाले नर्मदा जल की रिसिड्यूल क्लोरिन की भी जांच की जा रही है। टैंकरों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। लगभग 450 निजी बोरवेल के क्लोरिनेशन का कार्य भी कराया जा रहा है और सभी ड्रेनेज चैंबर तथा बैकलेन की सफाई की जा रही है।

मंत्री का निरीक्षण और लगातार सुधार

शुक्रवार दोपहर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भागीरथपुरा पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उनके साथ नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित निगम के अन्य अधिकारी भी थे। मंत्री ने पानी की टंकी के पास बने कक्ष में अधिकारियों के साथ बैठक की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

इसके बाद उन्होंने ड्रेनेज और नर्मदा लाइन के काम का निरीक्षण किया और इंजीनियरों से जानकारी लेकर सुधार संबंधी निर्देश दिए। नगर निगम कमिश्नर ने बताया कि भागीरथपुरा में नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार काम कर रही हैं, लक्षण वाले लोगों की पहचान की जा रही है, दवाएं दी जा रही हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल रेफर किया जा रहा है।

कमिश्नर के अनुसार पानी की टंकी की सफाई कर ली गई है और सेक्टरवार फ्लशिंग की जा रही है। गुरुवार को भी एक हिस्से में टंकी से सप्लाई कर परीक्षण किया गया था, जहां जो कमियां दिखीं, उन्हें सुधारने का काम जारी है। आगे भी फ्लशिंग और टेस्टिंग की प्रक्रिया जारी रहेगी।

स्थानीय लोगों के लिए यह घटना दर्दनाक रही है, लेकिन प्रशासन का दावा है कि हालात धीरे-धीरे काबू में आ रहे हैं और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए बहुस्तरीय कदम उठाए जा रहे हैं।

L. N. Bhargava