अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के वैश्विक टैरिफ रद्द किए: कहा- राष्ट्रपति को अधिकार नहीं

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट  ने  ट्रम्प के वैश्विक टैरिफ  रद्द किए: कहा- राष्ट्रपति को अधिकार नहीं

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के वैश्विक टैरिफ रद्द किए, राष्ट्रपति के अधिकार पर सवाल

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इन टैरिफ को लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं है, बल्कि यह केवल कांग्रेस (संसद) का अधिकार है। यह फैसला ट्रम्प की आर्थिक नीतियों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और उसका आधार

सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं। ट्रम्प ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि यदि वे केस हार जाते हैं तो देश बर्बाद हो जाएगा। पिछले साल अप्रैल 2025 में (लेख के अनुसार) ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए दुनिया के कई देशों से आने वाले सामान पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए थे।

किन टैरिफ पर रोक लगी और कौन से जारी रहे

कोर्ट के इस आदेश से ट्रम्प के सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए हैं। स्टील और एल्युमीनियम पर लगाए गए टैरिफ अलग कानूनों के तहत थे, इसलिए वे अभी भी लागू रहेंगे। हालांकि, दो प्रमुख श्रेणियों के टैरिफ पर रोक लग गई है। पहली श्रेणी में 'रेसिप्रोकल टैरिफ' शामिल थे, जो ट्रम्प ने विभिन्न देशों पर लगाए थे। इनमें चीन पर 34% और शेष दुनिया के लिए 10% बेसलाइन टैरिफ निर्धारित किया गया था। कोर्ट के फैसले के बाद ये टैरिफ अमान्य हो गए हैं।

दूसरी श्रेणी में 25% टैरिफ शामिल थे, जो ट्रम्प ने कनाडा, चीन और मैक्सिको से आने वाले कुछ सामान पर लगाए थे। प्रशासन ने तर्क दिया था कि इन देशों ने अमेरिका में फेंटेनाइल की तस्करी रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस 25% टैरिफ को भी निरस्त कर दिया है।

ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून का किया था इस्तेमाल

ट्रम्प के टैरिफ विवाद के केंद्र में 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA)' नामक 1977 का एक कानून था। इस कानून का उद्देश्य देश पर गंभीर खतरा (जैसे युद्ध, विदेशी दुश्मन से बड़ा आर्थिक खतरा या असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट) आने पर राष्ट्रपति को कुछ विशेष शक्तियाँ देना था। इन शक्तियों के तहत राष्ट्रपति विदेशी लेन-देन पर रोक लगा सकते हैं, उन्हें नियंत्रित कर सकते हैं या कुछ आर्थिक फैसले तुरंत लागू कर सकते हैं। ट्रम्प ने टैरिफ लगाने के लिए इसी IEEPA कानून का सहारा लिया था और व्यापार घाटे को एक आपातकाल बताया था। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि IEEPA में 'टैरिफ' शब्द का कहीं उल्लेख नहीं है और न ही इसमें राष्ट्रपति के अधिकारों पर कोई स्पष्ट सीमा तय की गई है।

12 राज्यों और छोटे कारोबारियों ने दायर किया था मुकदमा

ट्रम्प के इन टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के कई छोटे कारोबारी और एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट जैसे 12 राज्यों ने मुकदमा दायर किया था। उनका तर्क था कि राष्ट्रपति ने अपनी संवैधानिक सीमा से बाहर जाकर आयात होने वाले सामान पर नए टैरिफ लगाए हैं। निचली अदालतों (कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और फेडरल सर्किट कोर्ट) ने भी इन टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था, यह मानते हुए कि IEEPA टैरिफ लगाने की इतनी व्यापक शक्ति प्रदान नहीं करता है।

फैसले से पहले ट्रम्प की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले, राष्ट्रपति ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर उनके लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया गया, तो अमेरिका के लिए हालात पूरी तरह बिगड़ सकते हैं और देश पूरी तरह फंस जाएगा। उन्होंने कहा था कि ऐसा हुआ तो सब कुछ गड़बड़ हो जाएगा और कोई भी हालात संभाल नहीं पाएगा।

Vivek Singh