असम में महिलाओं और छात्रों के लिए नकद योजनाएं, चुनावी प्रभाव पर बहस तेज
अरुणोदय योजना के तहत 37 लाख महिलाओं को 8 हज़ार रुपये
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले राज्य की महिलाओं और छात्रों के लिए बड़ी वित्तीय घोषणाएं की हैं। उन्होंने घोषणा की कि अरुणोदय योजना के तहत राज्य की लगभग 37 लाख महिला लाभार्थियों को 20 फरवरी को 8,000 रुपये की एकमुश्त राशि दी जाएगी। इसे उन्होंने बिहू त्योहार के अवसर पर दिया जाने वाला उपहार बताया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनवरी से अप्रैल तक अरुणोदय योजना की मासिक किस्तें नहीं दी जाएंगी। सामान्यतः इस योजना के तहत हर महिला लाभार्थी के खाते में प्रति माह 1,250 रुपये भेजे जाते हैं। सरमा के अनुसार जनवरी से अप्रैल तक की कुल राशि 5,000 रुपये बनती है, जिसमें सरकार ने अतिरिक्त 3,000 रुपये जोड़कर कुल 8,000 रुपये एक साथ ट्रांसफर करने का निर्णय लिया है। वे कहते हैं कि मई से योजना की नियमित मासिक किस्तें फिर से शुरू हो जाएंगी। यह योजना 2020 में शुरू हुई थी और वर्तमान में इसके लगभग 37 लाख लाभार्थी हैं।
महिला सशक्तिकरण मॉडल और बिहार का संदर्भ
मुख्यमंत्री सरमा पहले भी अपने महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बता चुके हैं। उन्होंने बिहार चुनाव परिणामों के बाद दावा किया था कि असम में लागू महिला-केंद्रित योजनाओं के मॉडल ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जीत में योगदान दिया। सरमा का कहना था कि असम की योजनाओं से प्रेरित होकर बिहार सरकार ने भी महिला-केंद्रित योजनाएं शुरू कीं और उनका उद्देश्य अधिक से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है।
छात्रों के लिए ‘बाबू योजना’ की शुरुआत
महिलाओं के बाद मुख्यमंत्री ने पुरुष छात्रों के लिए भी एक नई वित्तीय सहायता योजना की घोषणा की है। ‘बाबू योजना’ के तहत सरकार 1 फरवरी से योग्य पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को प्रति माह 2,000 रुपये और योग्य अंडर ग्रेजुएट छात्रों को प्रति माह 1,000 रुपये देगी। यह लाभ केवल उन छात्रों को मिलेगा जिनके परिवार की सालाना आय 4 लाख रुपये तक है।
पहले शुरू की गई ‘निजुत मोइना’ योजना
असम सरकार इससे पहले 2024 में ‘निजुत मोइना’ योजना शुरू कर चुकी है, जिसका उद्देश्य बाल विवाह से निपटने के लिए छात्राओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना है। इस योजना के तहत कक्षा 11 की छात्राओं को 10 महीने तक प्रति माह 1,000 रुपये, ग्रेजुएशन प्रथम वर्ष की छात्राओं को 10 महीने तक प्रति माह 1,250 रुपये और पोस्ट ग्रेजुएट तथा बीएड कोर्स की छात्राओं को 10 महीने तक प्रति माह 2,500 रुपये दिए जाने का प्रावधान है।
चुनावी रणनीति पर विशेषज्ञों की राय
असम में राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन योजनाओं का चुनावी असर होगा, लेकिन वे सभी चुनौतियों का समाधान नहीं कर पाएंगी। डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर कौस्तुभ डेका ने कहा कि बिहार और कुछ अन्य राज्यों के अनुभव से स्पष्ट है कि इस तरह की नकद सहायता योजनाओं से चुनावी लाभ मिल सकता है। हालांकि, असम में पहचान की राजनीति, बेरोजगारी और अन्य कई मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें केवल ऐसी योजनाओं से पूरी तरह नहीं ढका जा सकता।
प्रोफेसर डेका के अनुसार, सरकार द्वारा महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पैसा भेजने से भाजपा और मतदाता के बीच सीधा संपर्क बनता है, जो चुनावी रणनीति का बड़ा हिस्सा हो सकता है। लेकिन वे यह भी कहते हैं कि जनजातीय दर्जे की मांग और प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग की मौत से जुड़े मामले जैसे मुद्दों पर लोग सवाल उठाते रहेंगे और नकद योजनाएं इन प्रश्नों को पूरी तरह दबा नहीं सकतीं।
स्थानीय महिला लाभार्थियों की मिश्रित प्रतिक्रिया
कामरूप जिले के चमारिया विधानसभा क्षेत्र की रहने वाली सलमा बेगम (बदला हुआ नाम), जो अरुणोदय योजना की लाभार्थी हैं, ने इस घोषणा पर खुशी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए काफी काम कर रही है, लेकिन साथ ही यह भी आग्रह किया कि उन मुस्लिम महिलाओं की मदद पर भी ध्यान दिया जाए जिनके घर बेदखली अभियानों के दौरान तोड़े गए हैं। सलमा का कहना है कि कई महिलाएं और उनके छोटे बच्चे बेघर हो गए हैं और सरकार को उनके लिए भी कदम उठाने चाहिए।
कांग्रेस का आरोप: ‘चुनावी तोहफे’ और आर्थिक संकट
असम विधानसभा चुनाव की घोषणा फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में होने की संभावना है। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस पार्टी भाजपा की इन योजनाओं को चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रही है। असम प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर गोस्वामी का कहना है कि ऐसी योजनाएं कुछ हद तक कांग्रेस के लिए चुनौती उत्पन्न करेंगी, खासकर तब तक जब तक महिलाएं राजनीतिक और आर्थिक रूप से अधिक सजग नहीं हो जातीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ स्कूल बंद किए जा रहे हैं और दूसरी ओर 1,250 रुपये जैसी रकम देकर महिलाओं से वोट लेने की कोशिश हो रही है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री को यह एहसास है कि बेरोजगार युवाओं, किसानों और छोटे व्यापारियों का समर्थन कम हो सकता है, इसलिए महिला मतदाता विशेष लक्ष्य बने हैं। मीरा बोरठाकुर ने कहा कि यदि महिलाएं केवल 8,000 रुपये के इस उपहार पर ध्यान देंगी तो कांग्रेस के लिए कठिनाई बढ़ सकती है, इसलिए पार्टी मतदाताओं को समझाने की कोशिश कर रही है कि यदि कांग्रेस की सरकार बनेगी तो आर्थिक संकट का स्थायी समाधान खोजा जाएगा और भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई तथा दमनकारी नीतियों जैसे मुद्दों पर काम किया जाएगा।
बीजेपी पर नेतृत्व और जुबिन गर्ग मामले का असर
असम में भाजपा किस चेहरे के साथ चुनाव लड़ेगी, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है। यह चर्चा है कि प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग की मौत को लेकर जनाक्रोश के कारण पार्टी मुख्यमंत्री के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ने का विकल्प चुन सकती है।
राज्य की राजनीति को तीन दशकों से अधिक समय से कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार नव कुमार ठाकुरिया का मानना है कि जुबिन गर्ग की घटना से पहले तक भाजपा को कोई बड़ी चुनौती नहीं दिख रही थी। उनके अनुसार, इस मामले को लेकर सरकार और पार्टी की रणनीति को देखते हुए संभव है कि भाजपा इस बार किसी स्थानीय चेहरे को मुख्य रूप से प्रोजेक्ट न करे। वे यह भी संकेत देते हैं कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा घोषित लोकलुभावन योजनाएं मतदाताओं में उनकी पकड़ मजबूत रखने और पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास हो सकती हैं।
ठाकुरिया के मुताबिक, राज्य में भाजपा अभी भी अन्य दलों की तुलना में मजबूत है, लेकिन जुबिन गर्ग की मौत के बाद लोगों ने सरकार को हटाने के बजाय मुख्यमंत्री को हटाने की मांग अधिक मुखर रूप से उठाई। इस मामले में मुख्यमंत्री की पत्नी का नाम भी चर्चा में आया। वे याद दिलाते हैं कि 2021 में पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को बदलकर हिमंत बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री बनाया था, इसलिए नेतृत्व परिवर्तन की संभावना को पूरी तरह नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, सरमा द्वारा किए जा रहे ‘अच्छे कामों’ से लाभ व्यक्तिगत रूप से उन्हें अधिक हो सकता है।
भाजपा की सफाई: महिलाओं और युवाओं के विकास पर जोर
असम प्रदेश भाजपा का दावा है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य के हर तबके का विकास हुआ है। पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय कुमार गुप्ता ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें स्वनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता रही है। उनके अनुसार, चुनाव के समय अरुणोदय योजना की किस्तें रुकने की स्थिति में लाभार्थी महिलाएं वंचित न रह जाएं, इसलिए उन्हें एक साथ अग्रिम राशि देने की घोषणा की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं, किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों की अनदेखी नहीं की गई है। भाजपा नेता के मुताबिक, सरमा सरकार के दौरान युवाओं को बड़ी संख्या में नौकरियां मिली हैं, राज्य में टाटा समेत कई बड़े उद्योग स्थापित हो रहे हैं और मोबाइल निर्माण की फैक्ट्री लगाने की तैयारी है। सरकारी जमीन खाली करवाई गई है ताकि किसानों को खेती के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकें। साथ ही, नौकरीपेशा लोगों के लिए आठवें वेतन आयोग को लागू करने की घोषणा भी की गई है।
जुबिन गर्ग मामले पर सरकार का रुख
जुबिन गर्ग की मौत के मामले का राजनीतिक प्रभाव चर्चा में है। इस पर भाजपा नेता विजय कुमार गुप्ता का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इस मामले में गंभीरता से काम किया है। उनके अनुसार समय पर जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और सरकार कोर्ट की कार्यवाही में तेजी लाने के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की तैयारी कर रही है।
चुनावी समापन संदर्भ
इन सभी घोषणाओं और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच असम में चुनावी माहौल गर्म होता दिख रहा है। एक ओर सरकार और भाजपा नेतृत्व महिला सशक्तिकरण और युवाओं के लिए रोजगार तथा शिक्षा-संबंधी योजनाओं को अपनी उपलब्धि बताकर मतदाताओं तक पहुंचना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और अन्य आलोचक इन्हें चुनावी लाभ के लिए बांटी जा रही नकद सहायता मान रहे हैं। पहचान की राजनीति, बेरोजगारी, बेदखली अभियानों से प्रभावित समुदायों की स्थिति और जुबिन गर्ग की मौत जैसे मुद्दे भी इस चुनावी परिदृश्य में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
Satyam Tripathi