टोंक की चारागाह जमीन से निकला रहस्यमयी घड़ा, सोने जैसी धातु पर लूट मच गई

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टोंक की चारागाह जमीन से निकला रहस्यमयी घड़ा, सोने जैसी धातु पर लूट मच गई

टोंक के सीदड़ा गांव में खुदाई के दौरान रहस्यमयी धातु का घड़ा बरामद

राजस्थान के टोंक जिले के निवाई थाना क्षेत्र के सीदड़ा गांव में चारागाह भूमि पर खुदाई के दौरान एक पुराना धातु का घड़ा मिलने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घड़े में ऐसी धातु के टुकड़े पाए गए, जो देखने में सोने जैसी लग रहे थे। घटना शनिवार शाम लगभग साढ़े 5 बजे की बताई जा रही है।

पूजा-सामग्री मिलने के बाद खजाने की आशंका पर शुरू हुई खुदाई

गांव की चारागाह जमीन पर पूजा-अर्चना का सामान मिलने के बाद स्थानीय लोगों में यह आशंका हुई कि यहां कोई खजाना दबा हो सकता है। सूचना पर मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने जेसीबी मशीन से खुदाई करवाई। करीब आधे घंटे की खुदाई के बाद लगभग 100 से 150 किलो वजनी, करीब 2 फीट ऊंचा और डेढ़ फीट चौड़ा पुराना धातु का घड़ा मिला।

घड़े के भीतर धातु के कई टुकड़े पाए गए, जिन्हें देखने पर कुछ लोगों ने सोने जैसा बताया। हालांकि अधिकारियों ने केवल धातु जैसे टुकड़ों की मौजूदगी की पुष्टि की है, उनकी प्रकृति या वास्तविक धातु के बारे में कोई आधिकारिक निष्कर्ष अभी नहीं निकला है।

भीड़ का हंगामा और लूटपाट जैसी स्थिति, पुलिस ने संभाला मोर्चा

घड़ा बाहर आते ही मौके पर मौजूद भीड़ उस पर टूट पड़ी और कई लोग उसमें रखे धातु जैसे टुकड़ों को लेकर भागने लगे। इससे कुछ समय के लिए लूटपाट जैसी स्थिति बन गई। वहां मौजूद पुलिस टीम ने बड़ी मशक्कत के बाद लोगों से टुकड़े वापस ले कर उन्हें फिर से घड़े में रखवाया।

अधिकारियों को आशंका है कि अफरा-तफरी के दौरान कुछ टुकड़े गायब भी हो सकते हैं। हालात नियंत्रित होने के बाद भीड़ को खुदाई वाली जगह से दूर किया गया और क्षेत्र को सुरक्षित कर दिया गया।

खुदाई किसने करवाई, पुलिस कर रही है जांच

पंचायत समिति सदस्य रामकिशोर मीना ने कहा कि फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चारागाह土地 पर खुदाई किसने करवाई थी और क्या यह वाकई गड़े हुए धन का मामला है या कुछ और। घड़े को प्रशासन द्वारा कब्जे में लेकर ट्रेजरी ऑफिस में सुरक्षित रखवा दिया गया है और उसकी जांच करवाई जा रही है।

भारतीय खजाना-निधि अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे

घटना के संदर्भ में अधिकारियों ने भारतीय खजाना-निधि अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख किया है। इस कानून के अनुसार, धरती में दबे या मिट्टी में छिपे मूल्यवान सामान को खजाना माना जाता है। यदि 10 रुपए या उससे अधिक मूल्य का कोई खजाना मिलता है तो पाने वाले व्यक्ति को इसकी सूचना जिले के कलेक्टर को देना अनिवार्य होता है।

कलेक्टर खजाने को सरकारी कोष में जमा कराता है या उसकी सुरक्षा का प्रबंध करता है। इसके बाद जांच कर खजाने के बारे में अधिसूचना जारी की जाती है, जिसमें दावेदारों को सामने आने के लिए कहा जाता है। सभी पक्षों को सुनने के बाद कलेक्टर खजाने के स्वामित्व को लेकर अंतिम निर्णय लेता है।

टोंक के सीदड़ा गांव में मिला यह रहस्यमयी घड़ा और उसके भीतर पाए गए धातु के टुकड़े अब कानूनी और प्रशासनिक जांच के दायरे में हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह वास्तव में कीमती खजाना है या किसी अन्य प्रकार की धातु सामग्री।

इनपुट: रामबिलास लांगड़ी, निवाई

Ravi Yadav