अयोध्या बायपास पर पेड़ कटाई को लेकर विवाद गहराया
भोपाल के अयोध्या बायपास को 10 लेन में बदलने की तैयारी के बीच पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई से विवाद गहरा गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के आदेश से पहले ही आधे से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि शेष पेड़ों का भविष्य अब अगली सुनवाई पर निर्भर है।
प्रोजेक्ट: 16 किमी बायपास को 10 लेन में बदला जा रहा
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया भोपाल के अयोध्या बायपास को आसाराम चौराहा से रत्नागिरि तिराहे तक चौड़ा कर 10 लेन की सड़क बना रही है। इस 16 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट पर लगभग 836.91 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। यह केंद्र सरकार का प्रोजेक्ट है और एनएचएआई व निर्माण एजेंसी के बीच हुए करार के अनुसार सभी सरकारी अनुमतियाँ दिलाने की जिम्मेदारी भी एनएचएआई की है।
पिछले साल दिसंबर में टेंडर और अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस साल 11 अगस्त तक पेड़ कटाई की अनुमति मिलने और काम शुरू होने की योजना थी। लेकिन समय पर अनुमति नहीं मिल सकी और इसी दौरान मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल तक पहुंच गया।
एनजीटी की सख्ती और हाई लेवल कमेटी का गठन
पेड़ कटाई से जुड़े एक अन्य मामले में एनजीटी ने निर्देश दिया कि शहरों में कहीं भी 25 से अधिक पेड़ काटने की अनुमति सिर्फ हाई लेवल कमेटी ही दे सकेगी। इसके बाद नगरीय विकास विभाग के एसीएस संजय शुक्ला की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी बनाई गई।
कमेटी की तीसरी बैठक में अयोध्या बायपास पर पेड़ कटाई को मंजूरी दे दी गई। अनुमति मिलते ही 21 दिसंबर से तेजी से पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई। नगर निगम के अमले ने दिन-रात कटाई कर आधे से ज्यादा पेड़ हटवा दिए।
एनजीटी की रोक, लेकिन तब तक आधे से ज्यादा पेड़ कट चुके
22 दिसंबर को भी कटाई जारी रहने पर याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना ने दोबारा एनजीटी का रुख किया। इस बीच 24 दिसंबर की दोपहर तक पेड़ काटना जारी रहा। बाद में एनजीटी ने आदेश जारी कर 8 जनवरी तक पेड़ कटाई पर रोक लगा दी, लेकिन तब तक बायपास किनारे लगे आधे से ज्यादा पेड़ गिराए जा चुके थे।
अब 8 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई में शेष बचे पेड़ों के भविष्य पर फैसला होने की उम्मीद है।
पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों का विरोध
पेड़ कटाई के खिलाफ पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने मुहिम छेड़ दी है। गुरुवार को पर्यावरणविदों ने काटे गए पेड़ों को प्रतीकात्मक श्रद्धांजलि दी और नाराजगी जताई। सुभाष सी. पांडे, उमाशंकर तिवारी, नितिन सक्सेना, सुयश कुलश्रेष्ठ, राशिद नूर समेत अन्य लोगों ने कहा कि इस तरह की बेतहाशा कटाई से अयोध्या बायपास की हरियाली खत्म हो जाएगी।
पर्यावरणविदों का कहना है कि यहां लगे अधिकांश पेड़ों की उम्र 40 से 80 साल, और कई जगह 80 से 100 साल या उससे अधिक है। उनका तर्क है कि इतने पुराने पेड़ों को काटकर भले ही नए पौधे लगाए जाएं, लेकिन उन्हें पेड़ बनने में कई दशक लग जाएंगे, जो मौजूदा पर्यावरणीय संतुलन के लिए बड़ा नुकसान है।
आंदोलनकारी यह भी सुझाव दे रहे हैं कि 10 लेन सड़क की जगह एलिवेटेड प्रोजेक्ट पर काम किया जा सकता था या फिर केवल सिक्स लेन सड़क बनाकर नुकसान कम किया जा सकता था। उनके अनुसार इससे पेड़ों की बड़ी संख्या बचाई जा सकती थी।
राजनीतिक विरोध और प्रदर्शन
पेड़ कटाई के मुद्दे पर राजनीतिक विरोध भी तेज हो गया है। सोमवार को बायपास पर पेड़ काटने की कार्रवाई के दौरान कांग्रेस नेताओं ने साइट पर पहुंचकर आपत्ति दर्ज करवाई और काम रोकने की मांग की।
मंगलवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, रविंद्र साहू झूमरवाला सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मास्क पहनकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि विकास के नाम पर पर्यावरण को इस तरह नष्ट करना उचित नहीं है।
गुरुवार को पूर्व मंत्री पी. सी. शर्मा भी अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर हरियाली का विनाश स्वीकार नहीं किया जा सकता और एनएचएआई को तुरंत पेड़ों की कटाई रोकनी चाहिए, ताकि शेष हरियाली बचाई जा सके।
एनएचएआई का पक्ष और वृक्षारोपण का दावा
एनजीटी द्वारा 8 जनवरी तक पेड़ कटाई पर लगाई गई रोक पर एनएचएआई की अपनी दलील है। एनएचएआई से जुड़े सूत्रों का कहना है कि हाई लेवल कमेटी की रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेज ट्रिब्यूनल के सामने पेश किए जा चुके हैं, लेकिन एनजीटी ने उन्हें अभी तक नहीं देखा, इसी वजह से अंतरिम रोक लगाई गई है।
एनएचएआई का दावा है कि जितने पेड़ काटे जा रहे हैं, उनके बदले बड़े स्तर पर पौधारोपण की योजना बनाई गई है। संस्था का कहना है कि 7871 पेड़ों के बदले 81 हजार पौधे लगाए जाएंगे। उनका तर्क है कि यह पर्यावरणीय क्षति की भरपाई की दिशा में बड़ा कदम होगा।
निष्कर्ष: विकास बनाम पर्यावरण की जंग
अयोध्या बायपास चौड़ीकरण का यह मामला विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की बहस को एक बार फिर सामने लाता है। एक ओर भारी भरकम लागत से बन रही 10 लेन की सड़क को शहर के विकास और यातायात सुधार के लिए जरूरी बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर दशकों पुराने हजारों पेड़ों की कटाई से हरित आवरण खत्म होने की आशंका जताई जा रही है।
अब सबकी निगाहें 8 जनवरी को होने वाली एनजीटी की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि बचे हुए पेड़ों का क्या होगा और भविष्य में ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए पर्यावरणीय मानकों को किस तरह लागू किया जाएगा। इस फैसले से न केवल अयोध्या बायपास की हरियाली, बल्कि देशभर में चल रहे समान प्रोजेक्ट्स की दिशा पर भी असर पड़ सकता है।
Navjeet Kaur