भोपाल 70 साल पुरानी बस्ती हटाई, कांग्रेस नेताओं का विरोध और लाठीचार्ज

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भोपाल 70 साल पुरानी बस्ती हटाई, कांग्रेस नेताओं का विरोध और लाठीचार्ज

भोपाल में 70 साल पुरानी बस्ती हटाई, विरोध पर लाठीचार्ज

भोपाल के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित मानस भवन इलाके में करीब 70 साल पुरानी आदिवासी बस्ती को शनिवार को जिला प्रशासन ने हटा दिया। शनिवार सुबह करीब 6 बजे प्रशासनिक अमला बस्ती में पहुंचा और 7 बजे से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई, जो दोपहर करीब 3 बजे तक चली। इस दौरान पूरे इलाके की घेराबंदी कर बैरिकेडिंग कर दी गई और आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई। संभावित विरोध को देखते हुए भारी पुलिस बल के साथ वॉटर कैनन भी तैनात किए गए।

27 परिवारों को नए आवास में शिफ्ट किया गया

प्रशासन के मुताबिक, यहां से 27 परिवारों को हटाकर भौंरी, कलखेड़ा और मालीखेड़ी में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने पक्के मकानों में शिफ्ट किया जा रहा है। ये 1BHK फ्लैट हैं, जिनकी कीमत करीब 12 लाख रुपए बताई गई है।

पुलिस और रहवासियों में धक्का-मुक्की, लाठीचार्ज

कार्रवाई के दौरान बस्ती में रहने वाले लोग विरोध में उतर आए। कई जगह नारेबाजी हुई और लोग नगर निगम की टीम को बाहर निकालने की मांग करने लगे। दोपहर बाद हालात तनावपूर्ण हो गए और पुलिस व रहवासियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया।

कांग्रेस नेताओं का धरना और हिरासत

मौके पर पहुंचे कांग्रेस नेता—प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, शबिस्ता जकी और आसिफ जकी समेत कई कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। पुलिस ने कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।

भावुक दृश्य और NEET छात्रा की चिंता

कार्रवाई के दौरान कई भावुक दृश्य सामने आए। 103 साल की एक बुजुर्ग महिला अपने सामान के लिए रोती दिखीं और आरोप लगाया कि घर के ताले तोड़कर सामान हटा दिया गया। वहीं, एक युवती ने कहा कि उसके घर के साथ उसकी डिग्रियां भी मलबे में दब गईं। NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा ने रोते हुए बताया कि उसके जरूरी डॉक्यूमेंट घर के अंदर दब गए हैं और समझ नहीं आ रहा कि वह अगले दिन होने वाली परीक्षा कैसे देगी। हालांकि, बाद में दस्तावेज मिलने पर उसे राहत मिली, लेकिन परीक्षा प्रभावित होने की चिंता उसे परेशान करती रही।

सामान निकालने के लिए पर्याप्त समय न देने का आरोप

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें सामान निकालने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। कुछ लोग रात में ही ताला लगाकर चले गए थे, जिन्हें पुलिस वापस लेकर आई ताकि उनके सामने घर खुलवाए जा सकें। बस्ती के बाहर सख्त तलाशी के बाद ही लोगों को अंदर जाने दिया जा रहा था।

प्रशासन का पक्ष: कोर्ट के निर्देशों के तहत कार्रवाई

पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कोर्ट के निर्देशों के तहत की गई, जबकि विरोध कर रहे लोग इसे जल्दबाजी और अन्यायपूर्ण बता रहे हैं। करीब 8 घंटे चली इस कार्रवाई के बाद इलाके में पुलिस बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

Navjeet Kaur