भोपाल के बड़ा तालाब में अब तैरेंगे डल झील जैसे शिकारे
सीएम डॉ. मोहन यादव करेंगे शिकारा सेवा का लोकार्पण
भोपाल के बड़ा तालाब में अब श्रीनगर की डल झील की तर्ज पर शिकारे चलाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज बोट क्लब पर आयोजित कार्यक्रम में इन शिकारों का लोकार्पण करेंगे। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी समेत भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के विधायकों को आमंत्रित किया गया है।
एकसाथ 20 शिकारे, पहले हो चुका है सफल प्रयोग
नगर निगम ने जून 2024 में प्रायोगिक तौर पर एक शिकारा चलाया था, जिसे स्थानीय रजिस्टर्ड मछुआरे से तैयार और शिकारे की तर्ज पर सजाया गया था। इस सफल प्रयोग के बाद अब एकसाथ 20 शिकारे बड़ा तालाब में उतारे जा रहे हैं। इनके शुरू होने के बाद आम लोग शिकारे की सैर का लुत्फ उठा सकेंगे।
किराया, समय और मार्ग की रूपरेखा
शिकारे सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक चलाने की योजना है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रति व्यक्ति किराया लगभग 150 रुपये रखा जा सकता है, हालांकि अंतिम किराया अभी तय नहीं हुआ है और इसके बारे में कार्यक्रम के दिन स्पष्टता आने की संभावना है। प्रत्येक शिकारा लगभग 2.3 किलोमीटर का चक्कर लगाएगा और तालाब के बीच स्थित टापू के करीब तक जाएगा।
क्या होता है शिकारा और इसकी खासियत
शिकारा लकड़ी की बनी एक खास तरह की नाव होती है, जो मुख्य रूप से डल झील और अन्य झीलों में उपयोग की जाती है। ये विभिन्न आकारों में होते हैं और लोगों के परिवहन सहित कई उद्देश्यों के लिए प्रयोग किए जाते हैं। एक सामान्य शिकारे में लगभग छह लोग बैठ सकते हैं और चालक इसे पीछे की ओर से चलाता है। डल झील में शिकारे पर्यटकों की पहली पसंद माने जाते हैं और इन्हें आकर्षक तरीके से सजाया जाता है। भोपाल में भी इसी तरह के आकर्षक शिकारे शुरू किए जा रहे हैं ताकि पर्यटकों और स्थानीय लोगों को नया अनुभव मिल सके।
पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश
भोपाल बोट क्लब पर मध्यप्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, साथ ही स्थानीय स्तर पर भी हजारों लोग यहां घूमने आते हैं। क्रूज और मोटर बोट बंद होने के बाद लोग केवल सामान्य या निजी नावों से ही बड़ा तालाब का नजारा देख पा रहे थे। अब शिकारा सेवा शुरू होने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को नया और अलग तरह का भ्रमण विकल्प मिलेगा, जिससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
एनजीटी के आदेश और क्रूज-मोटरबोट पर रोक
दो साल पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भोज वेटलैंड (बड़ा तालाब), नर्मदा और प्रदेश के अन्य जल स्रोतों में क्रूज और मोटर बोट के संचालन पर रोक लगा दी थी। एनजीटी ने इन्हें अवैध गतिविधि करार देते हुए बड़ा तालाब में क्रूज संचालन बंद करने के आदेश दिए थे। आदेश में कहा गया था कि डीजल और डीजल इंजन से होने वाला उत्सर्जन इंसानों और जलीय जीवों के लिए खतरा है, क्योंकि सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड पानी को अम्लीय बनाकर कैंसरकारी प्रभाव डाल सकती हैं। यह आदेश भोज वेटलैंड के साथ नर्मदा नदी और प्रदेश की सभी प्रकार की वेटलैंड्स पर लागू हुआ।
‘लेक प्रिंसेस’ क्रूज और ‘जलपरी’ मोटरबोट बंद
एनजीटी के निर्देशों के बाद भोपाल के बड़ा तालाब में चलने वाली ‘लेक प्रिंसेस’ क्रूज और ‘जलपरी’ मोटरबोट का संचालन बंद कर दिया गया। पर्यटन विकास निगम ने इनके साथ करीब 20 मोटर बोटों का संचालन भी रोक दिया। पहले क्रूज और मोटर बोट चलने के दौरान बोट क्लब पर रोजाना एक हजार से अधिक लोग पहुंचते थे और तालाब की लहरों का करीब से नजारा लेते थे। प्रतिबंध के बाद लोगों को केवल निजी या सामान्य नावों का सहारा लेना पड़ रहा था।
शिकारों से मिलेगा नया अनुभव
क्रूज और मोटर बोट बंद होने के बाद से पर्यटकों के लिए बड़ा तालाब में रोमांचक जलयात्रा के विकल्प सीमित हो गए थे। अब डल झील की तर्ज पर शुरू किए जा रहे शिकारे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को नया अनुभव देंगे। इससे न केवल पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी, बल्कि पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए जल पर्यटन को नया रूप भी मिलेगा।
Gulzar Ahmad