भोपाल में नाली कवरिंग कार्य में लोहे की मात्रा पर घोटाले की आशंका
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के भेल संगम इलाके में 240 मीटर लंबी नाली को आरसीसी से कवर करने के काम में लोहे के उपयोग को लेकर गंभीर अनियमितताओं की आशंका सामने आई है। वार्ड-53 के इस कार्य में मेजरमेंट रिकॉर्ड के आधार पर 16,139 किलोग्राम सरिया लगाए जाने का दावा किया गया, जबकि स्थल निरीक्षण में वास्तविक स्थिति संदिग्ध पाई गई।
आरसीसी कवरिंग का 13.34 लाख रुपए का काम मंजूर
कृष्णा आर्केड और वैष्णव परिसर, भेल संगम क्षेत्र में स्थित 240 मीटर लंबी और 3 फीट चौड़ी नाली को आरसीसी से कवर करने का काम 25 जून 2025 को स्वीकृत किया गया था। इस कार्य की लागत 13,34,238 रुपए निर्धारित की गई थी। काम पूरा होने के बाद नवंबर में प्रभारी सहायक यंत्री निशांत तिवारी ने मेजरमेंट से संबंधित रिकॉर्ड निगम के समक्ष प्रस्तुत किए।
इन रिकॉर्ड्स के अनुसार, पूरी नाली को आरसीसी से ढंका गया और इस कार्य के लिए 16,139 किलोग्राम लोहे का उपयोग दिखाया गया। लोहे की इतनी बड़ी मात्रा दर्ज होने पर इस पर सवाल उठने लगे और रिकॉर्ड की जांच की आवश्यकता महसूस की गई।
मेजर बुक से खुलासा और जांच के आदेश
मेजर बुक में दर्ज आंकड़ों की जांच के दौरान यह बात सामने आई कि नाली की लंबाई और चौड़ाई के हिसाब से लोहे की मात्रा असामान्य रूप से अधिक दिखाई गई है। इसके बाद 5 दिसंबर को नगर निगम के कार्यपालन यंत्री (ईई) बृजेश कौशल ने प्रभारी सहायक यंत्री निशांत तिवारी और उपयंत्री रूपांकन वर्मा को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए।
पत्र में कहा गया कि स्थल का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि इस पूरे मामले की जानकारी निगम कमिश्नर के.वी.एस. चौधरी जैन को दी जा सके और आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
स्थल निरीक्षण में कम लोहा मिलने से संदेह गहरा
जांच के तहत नाली के एक हिस्से की खुदाई की गई, जहां आरसीसी कवरिंग के भीतर वास्तविक सरिया की मात्रा अपेक्षा से काफी कम पाई गई। इस अंतर के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि नाली को आरसीसी से कवर करने के नाम पर लोहे की मात्रा बढ़ाकर दिखाई गई और संभावित रूप से घोटाला किया गया।
निगम सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान न तो ईई बृजेश कौशल और न ही अन्य जिम्मेदार अधिकारी नियमित रूप से साइट का निरीक्षण करते रहे। केवल गड़बड़ी की आशंका सामने आने के बाद ही जांच की प्रक्रिया शुरू की गई। 8 दिसंबर को अधिकारी स्तर पर साइट का निरीक्षण किया गया, लेकिन अभी तक जांच की अंतिम रिपोर्ट निगम कमिश्नर को नहीं सौंपी गई है।
जिम्मेदार अधिकारी की चुप्पी पर सवाल
मामले में जब कार्यपालन यंत्री बृजेश कौशल से संपर्क कर स्पष्टीकरण लेना चाहा गया तो उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया। रिपोर्ट लंबित रहने और संबंधित अधिकारी की चुप्पी से पूरे प्रकरण पर और अधिक सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिलहाल निगम स्तर पर दस्तावेजी रिकॉर्ड और स्थल निरीक्षण के आधार पर मामले की जांच जारी है। रिपोर्ट कमिश्नर को सौंपे जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में कितना लोहा उपयोग हुआ और क्या वाकई किसी वित्तीय अनियमितता या घोटाले को अंजाम दिया गया है।
Satyam Tripathi