भोपाल की वोटर लिस्ट से हटेंगे 4 लाख से ज्यादा नाम, गोविंदपुरा-नरेला फोकस में

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भोपाल की वोटर लिस्ट से हटेंगे 4 लाख से ज्यादा नाम, गोविंदपुरा-नरेला फोकस में

भोपाल की वोटर लिस्ट से 4 लाख से ज्यादा नाम हटाने की तैयारी

भोपाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की जांच की गई है। इस प्रक्रिया में मृत, शिफ्ट हो चुके और पते पर उपलब्ध न होने वाले मतदाताओं की पहचान की गई है, जिनके नाम अब वोटर लिस्ट से हटाने की तैयारी चल रही है।

4 लाख से अधिक मतदाता हटने की संभावना

एसआईआर के दौरान लगभग 4 लाख 7,944 मतदाताओं को चार श्रेणियों में चिह्नित किया गया है। इनमें मृत, गायब, पता बदल चुके मतदाता और वे मतदाता शामिल हैं जिनके नाम दोहराव की स्थिति में सूची में हैं। इनमें से 31 हजार से अधिक मतदाताओं के मृत होने की पुष्टि हुई है, जबकि 12,501 ऐसे मतदाता पाए गए हैं जिनके नाम पहले से ही वोटर लिस्ट में दर्ज हैं।

गोविंदपुरा और नरेला विधानसभा क्षेत्रों में ज्यादा प्रभाव

प्रदेश सरकार में मंत्री कृष्णा गौर के गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से सबसे अधिक 99,141 मतदाताओं के नाम हटने की संभावना है। गोविंदपुरा में 61 हजार से अधिक मतदाता शिफ्ट पाए गए हैं। वहीं, मंत्री विश्वास सारंग के नरेला विधानसभा क्षेत्र में मृत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक रही, जहां 5,679 मृत मतदाता मिले हैं। हुजूर विधानसभा क्षेत्र में भी मृत मतदाताओं की संख्या 5 हजार से अधिक बताई गई है।

'नो मेपिंग' के तहत 10.5 प्रतिशत मतदाता

भोपाल में एसआईआर का डिजिटलाइजेशन कार्य पूरा हो चुका है और कुल 17,17,981 मतदाताओं के फॉर्म डिजिटलाइज किए गए हैं। इस प्रक्रिया में 2,23,905 मतदाता ऐसे मिले हैं जिन्हें 'नो मेपिंग' के दायरे में रखा गया है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 10.5 प्रतिशत हैं। इन मतदाताओं का 2003 की वोटर लिस्ट के अनुसार डेटा नहीं मिल पाया है।

नरेला विधानसभा में सबसे अधिक 54,667 मतदाता 'नो मेपिंग' श्रेणी में आए हैं, जो 15.41 प्रतिशत है। इसके मुकाबले बैरसिया विधानसभा में 'नो मेपिंग' मतदाताओं की संख्या सबसे कम 3,162 है, जो 1.25 प्रतिशत है। भोपाल उत्तर, भोपाल दक्षिण-पश्चिम, भोपाल मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर विधानसभा क्षेत्रों में भी हजारों मतदाता इस श्रेणी में शामिल किए गए हैं।

50 दिन तक होगी सुनवाई, फिर कटेंगे नाम

उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता के अनुसार 'नो मेपिंग' श्रेणी में आने वाले मतदाताओं की 50 दिन तक सुनवाई की जाएगी। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है और जिले में 100 सहायक पंजीकरण अधिकारी नियुक्त रहेंगे, ताकि हर मतदाता की अपील सुनी जा सके। यदि निर्धारित समय में संबंधित रिकॉर्ड नहीं मिलता है तो इन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं।

मतदाता सूची का प्रकाशन और आगे की प्रक्रिया

मतदाता सूची का प्रकाशन 16 दिसंबर को किया जाएगा। इसके बाद बीएलओ फॉर्म एकत्र करेंगे और नए मतदाता भी अपने नाम सूची में जुड़वा सकेंगे। जिन मतदाताओं का डेटा उपलब्ध नहीं होगा या जिनके मामले संदेहास्पद पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध निर्वाचन नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

एसआईआर कार्य की प्रगति और निगरानी

एसआईआर का काम 4 नवंबर से शुरू हुआ था और 9 दिसंबर तक चलना है। सबसे पहले बैरसिया विधानसभा ने अपना लक्ष्य पूरा किया, उसके बाद हुजूर, उत्तर और मध्य विधानसभा क्षेत्रों ने काम पूरा किया। रविवार तक बाकी सभी विधानसभा क्षेत्रों में भी 100 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया।

भोपाल की सात विधानसभा सीटों में कुल 21,25,908 मतदाता हैं। 19 नवंबर तक फॉर्म की वापसी का प्रतिशत 7.37 था, जबकि 7 दिसंबर की शाम तक यह 100 प्रतिशत तक पहुंच गया।

लापरवाही पर कार्रवाई, बेहतर काम पर सम्मान

एसआईआर के दौरान लापरवाही बरतने पर एक दर्जन से अधिक बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई की गई है। साथ ही, समय पर और बेहतर काम पूरा करने वाले बीएलओ को सम्मानित भी किया जा रहा है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने रविवार को कई बीएलओ को सम्मानित किया। इससे पहले, बैरसिया के बीएलओ को काम समय पर पूरा करने पर बड़े तालाब में शिकारा नाव की सैर करवाई गई थी।

इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य भोपाल की मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है, ताकि आगामी चुनावों में सही और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित किया जा सके।

Lokendra Mishra