भोपाल में भावी शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे दो हजार से ज्यादा भावी शिक्षकों ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और चल रही भर्ती प्रक्रिया में कम पदों की घोषणा के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) का घेराव करते हुए सरकार से शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग उठाई।
रिक्त पदों की तुलना में घोषित सीटें बहुत कम
अभ्यर्थियों का कहना है कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी राजपत्र के अनुसार 27 दिसंबर 2024 तक माध्यमिक शिक्षकों के करीब 99,197 और प्राथमिक शिक्षकों के लगभग 1,31,152 पद रिक्त हैं। इसके बावजूद वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में माध्यमिक शिक्षकों के केवल 10,800 और प्राथमिक शिक्षकों के 13,089 पदों पर ही नियुक्तियां की जा रही हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि वास्तविक जरूरत की तुलना में घोषित पद बहुत कम हैं, जिससे बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवारों को मौका नहीं मिल पा रहा है और स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के लिए शून्य पदों पर आपत्ति
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने जनजातीय कार्य विभाग पर यह आरोप भी लगाया कि कई विषयों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए शून्य पद दर्शाए गए हैं। उनके अनुसार इस स्थिति से इन वर्गों के युवाओं में गहरी निराशा फैली है और यह सामाजिक न्याय तथा आरक्षण व्यवस्था की भावना के विपरीत है।
छात्रों की पढ़ाई पर असर, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात पर चिंता
शिक्षक संगठनों और अभ्यर्थियों का कहना है कि पदों की कमी का सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ रहा है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई विषयों की पढ़ाई करानी पड़ रही है, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ रहा है और परीक्षा परिणाम भी प्रभावित हो रहे हैं। वे कहते हैं कि नई शिक्षा नीति 2020 में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात सुधारने पर जोर दिया गया है, लेकिन पर्याप्त नियुक्तियों के बिना इस लक्ष्य को हासिल करना संभव नहीं है।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के समक्ष कई मुख्य मांगें रखी हैं। वे माध्यमिक शिक्षक चयन परीक्षा (वर्ग-2) के सभी विषयों में कम से कम तीन-तीन हजार पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही प्राथमिक शिक्षक भर्ती (वर्ग-3) में पदों की संख्या बढ़ाकर 25 हजार करने और द्वितीय काउंसिलिंग जल्द शुरू करने की भी मांग की जा रही है।
अभ्यर्थियों ने यह भी शर्त रखी है कि जब तक वर्ष 2025 की शिक्षक भर्ती पद वृद्धि के साथ पूर्ण नहीं हो जाती, तब तक नई पात्रता परीक्षा आयोजित न की जाए। उनका तर्क है कि पहले से लंबित रिक्त पदों को भरना और चल रही भर्ती प्रक्रिया को समुचित पद वृद्धि के साथ पूरा करना जरूरी है।
अनिश्चितकालीन आंदोलन और भूख हड़ताल की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द और ठोस निर्णय नहीं लिया, तो वे अपने आंदोलन को अनिश्चितकालीन चरण में बदल देंगे और भूख हड़ताल जैसे कठोर कदम भी उठा सकते हैं। उनका दावा है कि यह आंदोलन केवल उनकी नौकरी के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के सुधार और युवाओं को न्याय दिलाने की मांग को लेकर किया जा रहा है। फिलहाल अभ्यर्थी सरकार से लिखित आश्वासन और स्पष्ट कार्ययोजना की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
Adarsh Chaurasiya