दूषित पानी पर हाईकोर्ट सख्त, स्वच्छ पेयजल को मौलिक अधिकार, अफसरों पर क्रिमिनल जिम्मेदारी के संकेत

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दूषित पानी पर हाईकोर्ट सख्त, स्वच्छ पेयजल को मौलिक अधिकार, अफसरों पर क्रिमिनल जिम्मेदारी के संकेत

दूषित पेयजल पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट सख्त, स्वच्छ पानी को मौलिक अधिकार बताया

इंदौर में दूषित पानी से मौतों पर एक साथ पांच याचिकाओं की सुनवाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मंगलवार को दूषित पेयजल से जुड़े मामले में पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। अदालत ने टिप्पणी की कि इस घटना ने देश के सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाले इंदौर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल इंदौर ही नहीं, पूरे प्रदेश में जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी और नागरिकों का मौलिक अधिकार है।

स्वच्छ पेयजल को अनुच्छेद 21 के दायरे में माना

हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार भी शामिल है और इसकी अनदेखी एक गंभीर विषय है। अदालत ने संकेत दिए कि यदि भविष्य में आवश्यकता पड़ी तो दोषी अधिकारियों पर सिविल और क्रिमिनल लायबिलिटी तय की जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पीड़ितों को दिया गया मुआवजा कम पाया गया तो उस संबंध में भी उचित निर्देश जारी किए जाएंगे।

सरकार और नगर निगम के जवाब पर असंतोष, नई स्टेटस रिपोर्ट तलब

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम के जवाब को असंवेदनशील माना और दोनों को विस्तृत जवाब दाखिल करने के साथ नई स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। अदालत ने इस मामले से जुड़े मुद्दों को सात श्रेणियों में विभाजित किया है, ताकि समग्र रूप से जिम्मेदारी और सुधारात्मक कदमों की समीक्षा की जा सके। अगली सुनवाई 15 जनवरी को तय की गई है, जिसमें मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप: पुराने आदेशों और रिपोर्टों की अनदेखी

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे, इसके बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी दूषित पानी की आपूर्ति जारी रही। उन्होंने तर्क दिया कि यदि पहले की गई शिकायतों पर समय रहते ध्यान दिया जाता, तो वर्तमान स्थिति टाली जा सकती थी।

सीनियर काउंसिल ने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2022 में इंदौर के महापौर द्वारा नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन आवश्यक फंड जारी न होने के कारण अब तक कार्य शुरू नहीं हो सका। इसके अलावा, 2017-18 में इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए 60 पानी के नमूनों में से 59 पीने योग्य नहीं पाए गए थे। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस रिपोर्ट के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसे अदालत के समक्ष गंभीर लापरवाही के रूप में रखा गया।

भागीरथपुरा में स्थिति: मौतें, मरीज और इलाज

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए, जिनमें से छह मरीजों को अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया। कुल मिलाकर 110 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। अब तक 421 मरीजों को अस्पताल लाया गया था, जिनमें से 311 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। आईसीयू में 15 मरीजों का इलाज जारी है।

कांग्रेस नेताओं का दौरा और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इसी बीच, दोपहर करीब एक बजे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता भागीरथपुरा पहुंचे। क्षेत्र में पहले से बड़ी संख्या में पुलिस बल और वज्र वाहन तैनात थे तथा भागीरथपुरा में प्रवेश करने वाले सभी रास्तों को बैरिकेड लगाकर बंद किया गया था।

दूषित पानी से जान गंवाने वालों के परिजनों से मिलने पहुंचे कांग्रेस नेताओं की पुलिस अधिकारियों से नोकझोंक भी हुई। बाद में वे दूसरे रास्ते से अंदर पहुंचे और मृतक अशोक लाल पवार, जीवन लाल और गीता बाई के घर जाकर परिजनों से मुलाकात की और स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद वे लगभग तीन बजे भागीरथपुरा से लौट गए।

भागीरथपुरा में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर के प्रभारी मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से इस्तीफा देने की मांग की। इस तरह घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है।

आगे की न्यायिक प्रक्रिया और संभावित कार्रवाइयाँ

हाईकोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति में लापरवाही को सहन नहीं किया जाएगा। अदालत द्वारा मांगी गई नई स्टेटस रिपोर्ट, भविष्योन्मुखी निर्देशों और संभावित सिविल व क्रिमिनल कार्रवाई के मद्देनजर मामला अब न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है। अगली सुनवाई में राज्य के मुख्य सचिव की वर्चुअल उपस्थिति और विस्तृत जवाब के आधार पर आगे की दिशा तय की जाएगी।

Satyam Tripathi