भोपाल में अनोखा संस्कृत क्रिकेट टूर्नामेंट की शुरुआत
भोपाल के शिवाजी नगर स्थित अंकुर खेल मैदान पर सोमवार से संस्कृत क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन शुरू हो रहा है। यह टूर्नामेंट 9 जनवरी तक चलने वाला एक अनूठा खेल आयोजन है, जिसमें खिलाड़ियों की वेशभूषा से लेकर कमेंट्री तक सबकुछ भारतीय परंपरा और संस्कृत भाषा के अनुरूप रहेगा।
धोती-कुर्ता में खिलाड़ी और संस्कृत में कमेंट्री
इस टूर्नामेंट में खिलाड़ी पारंपरिक धोती-कुर्ता पहनकर मैदान में उतरेंगे। मैच के दौरान मैदान पर हिंदी या अंग्रेजी के स्थान पर केवल संस्कृत भाषा में कमेंट्री की जाएगी। आयोजकों का उद्देश्य है कि खेल के माध्यम से भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाया जाए।
पूरे प्रदेश से 27 टीमों की भागीदारी
म बोर्ड के अध्यक्ष विष्णु राजोरिया ने बताया कि इस टूर्नामेंट में पूरे प्रदेश से 27 टीमें हिस्सा लेंगी। यह आयोजन लगातार छठे वर्ष आयोजित किया जा रहा है और पिछले वर्ष भी अंकुर खेल मैदान पर ही हुआ था। इससे यह टूर्नामेंट प्रदेश में संस्कृत और पारंपरिक खेल-संस्कृति को बढ़ावा देने का नियमित माध्यम बन गया है।
क्रिकेट की शब्दावली भी संस्कृत में
मैच के दौरान क्रिकेट से जुड़े रोजमर्रा के शब्द भी संस्कृत में बोले जाएंगे। पिच को ‘क्षिप्या’, गेंद को ‘कन्दुकम्’, बैट को ‘वल्लकः’, रन को ‘धावनम्’, चार रन को ‘चतुष्कम्’, छह रन को ‘षठकम्’ और अंपायर को ‘निर्णायक’ कहा जाएगा। इस तरह पूरा खेल वातावरण संस्कृत शब्दावली से गुंजायमान रहेगा।
खिलाड़ियों की पारंपरिक साज-सज्जा
मैच के दौरान खिलाड़ी धोती-कुर्ता के साथ मस्तक पर त्रिपुंड और तिलक लगाए नजर आएंगे। पिच पर रन लेने से लेकर आउट होने तक खिलाड़ियों के बीच होने वाले संवाद भी संस्कृत भाषा में ही होंगे। इसी विशेषता के कारण यह टूर्नामेंट प्रदेश का एक अनूठा आयोजन माना जा रहा है।
पुरस्कार और सम्मान की विशेष व्यवस्था
प्रतियोगिता की विजेता और उपविजेता टीमों को पुरस्कार दिए जाएंगे। मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज खिलाड़ियों को पुरस्कार स्वरूप श्रीमद भागवत गीता और श्रीरामचरित मानस की प्रतियां भेंट की जाएंगी। विजेता टीम को बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
उद्देश्य: खेल के माध्यम से संस्कृति और भाषा का प्रसार
महर्षि मैत्री समिति द्वारा आयोजित इस टूर्नामेंट का उद्देश्य खेल के जरिए भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। आयोजक यह भी संदर्भ देते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण कन्दुक क्रीड़ा यानी गेंद का खेल खेलते थे। इससे पहले इस तरह का आयोजन मुख्य रूप से काशी में देखने को मिलता रहा है, जबकि अब भोपाल में भी इसे नियमित रूप से आयोजित किया जा रहा है।
Satyam Tripathi