भोपाल में दवाओं की सख्त जांच, किडनी फेलियर मामलों पर फोकस

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भोपाल में दवाओं  की सख्त जांच, किडनी फेलियर मामलों पर फोकस

भोपाल में दवाओं की जांच: किडनी फेलियर मामलों पर सख्त कार्रवाई

छिंदवाड़ा में किडनी फेल होने से 16 बच्चों की मौत के बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में मेडिकल स्टोर्स पर दवाओं की सख्त जांच के आदेश दिए हैं। भोपाल में 15 ड्रग इंस्पेक्टर्स ने 2,000 से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर जांच शुरू की है। इस दौरान दवाओं के स्टॉक और बिक्री रजिस्टर की गहन जांच की गई।

संदिग्ध दवाओं को वापसी और सतर्कता निर्देश

स्वास्थ्य विभाग ने संदिग्ध सिरप को बाजार से वापस बुलाने और उनकी निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। साथ ही, 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए संयोजन दवाओं के उपयोग पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मेडिकल स्टोर्स संचालकों को बच्चों को सही दवा देने की सलाह दी गई है।

खतरनाक रसायनों पर विशेष सावधानी

राज्य सरकार ने क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट और फिनाइलफ्रिन एचसीएल जैसे रसायनों के उपयोग पर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। ये खांसी-जुकाम की दवाओं में पाए जाते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के इनका उपयोग बच्चों के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

कफ सिरप में विषाक्त तत्व पाए गए

छिंदवाड़ा जिले में औषधि निरीक्षण के दौरान 19 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें से 3 सिरप मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें विषाक्त रसायन डायएथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया, जो किडनी फेल्योर और ब्रेन डैमेज का कारण बन सकता है। संबंधित मेडिकल स्टोर का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है।

सरकार की सख्ती और भविष्य की योजना

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञों और आईएपी पदाधिकारियों की बैठक में बच्चों के लिए संयोजन दवाओं पर गंभीर चिंता जताई गई। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेगी और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।