ईरान की करेंसी रियाल से 4 जीरो हटाने का फैसला

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ईरान की करेंसी रियाल  से 4 जीरो हटाने का फैसला

ईरान की करेंसी रियाल में बड़ा बदलाव

ईरानी सरकार ने देश की मुद्रा रियाल से 4 जीरो हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस बदलाव के तहत 10,000 रियाल की कीमत अब केवल 1 रियाल होगी। इस प्रस्ताव को ईरानी संसद की मंजूरी मिल चुकी है। यह कदम देश में बढ़ती महंगाई और मुद्रा के अवमूल्यन से निपटने के लिए उठाया गया है।

महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन के कारण

ईरान में महंगाई लगातार बढ़ती रही है, जिससे रियाल की कीमत में भारी गिरावट आई है। फिलहाल, इंटरनेशनल मार्केट में 1 डॉलर की कीमत 11.50 लाख रियाल तक पहुंच चुकी है। ईरानी संसद की आर्थिक समिति के प्रमुख शम्सोल्दीन हुसैन ने बताया कि यह बदलाव अगले 2 साल में लागू होगा। बदलाव के बाद भी पुरानी रियाल करेंसी को तीन साल तक इस्तेमाल किया जा सकेगा।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का असर

ईरान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिका और अन्य देशों के प्रतिबंधों का गहरा प्रभाव पड़ा है। ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के खिलाफ 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति अपनाते हुए तेल निर्यात, बैंकिंग, और शिपिंग पर सख्त प्रतिबंध लगाए। इन प्रतिबंधों के कारण विदेशी मुद्रा की कमी हुई और आयात महंगा हो गया। साथ ही निवेश और व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित हुए।

तेल निर्यात पर निर्भरता

ईरान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तेल निर्यात पर निर्भर है। 2024 में देश का कुल निर्यात लगभग 22.18 बिलियन डॉलर था, जिसमें तेल और पेट्रोकेमिकल्स का बड़ा हिस्सा था। हालांकि, प्रतिबंधों के कारण तेल निर्यात में कमी आई और व्यापार घाटा 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ गया।

आर्थिक सुधार की दिशा में कदम

ईरान ने पड़ोसी देशों और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश की है। INSTC कॉरिडोर और चीन के साथ नए ट्रांजिट रूट्स विकसित किए गए हैं। फिर भी, 2025 में जीडीपी वृद्धि केवल 0.3% रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंध हटने या परमाणु समझौते की बहाली के बिना अर्थव्यवस्था और रियाल का मूल्य स्थिर करना मुश्किल रहेगा।

ऐसे कदम अन्य देशों में भी उठाए गए

ईरान से पहले तुर्किये समेत तीन अन्य देशों ने अपनी मुद्रा में जीरो हटाकर आर्थिक सुधार के प्रयास किए हैं। यह कदम महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन से निपटने के लिए कारगर साबित हुआ है।

ईरान का यह फैसला देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मुद्रा को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।