भोपाल ईडी की दोहरी कार्रवाई: 42 करोड़ की धोखाधड़ी और आय से अधिक संपत्ति कुर्क
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल ने दो अलग-अलग मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 13.45 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अटैच की है। इसमें बैंक ऑफ इंडिया से 42 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित मामला और एक सरकारी सहायक प्रबंधक द्वारा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला शामिल है।
एक्सेल व्हीकल्स प्राइवेट लिमिटेड पर कार्रवाई
ईडी भोपाल ने बैंक ऑफ इंडिया से 42 करोड़ रुपये के फ्रॉड के मामले में एक्सेल व्हीकल्स प्राइवेट लिमिटेड की 12.62 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अटैच की है। यह कार्रवाई सीबीआई भोपाल की एसीबी यूनिट द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। अटैच की गई संपत्तियों में भोपाल जिले की कोलार तहसील स्थित खेती की जमीन और एक कमर्शियल प्लॉट शामिल हैं, जो कंपनी के संचालकों मंजू गर्ग और ऋषभ गर्ग से संबंधित हैं।
धोखाधड़ी का तरीका
ईडी की जांच में सामने आया कि एक्सेल व्हीकल्स और उसके निदेशकों ने टाटा मोटर्स की डीलरशिप के नाम पर बैंक ऑफ इंडिया से 42 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा प्राप्त की। इसके लिए उन्होंने एक ऐसी संपत्ति को बैंक ऑफ इंडिया के पास गिरवी रखा, जिसे वे पहले ही कोटक महिंद्रा बैंक के पास गिरवी रख चुके थे। इस तथ्य को बैंक से पूरी तरह छिपाया गया। इसके बाद फर्म के संचालकों ने कैश क्रेडिट अकाउंट से बड़ी रकम अपनी ही दूसरी सहयोगी कंपनियों के खातों में बिना किसी व्यावसायिक औचित्य के ट्रांसफर कर दी। इससे पहले, 6 नवंबर 2024 को ईडी के छापों में एक्सेल व्हीकल्स के निदेशकों के पास से लगभग 1 करोड़ 10 लाख रुपये नकद और भारी मात्रा में आभूषण जब्त किए गए थे। सीबीआई ने दिसंबर 2022 में इंदौर की स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल की थी।
एसईसीएल सहायक प्रबंधक की संपत्ति कुर्क
एक अन्य मामले में, ईडी की भोपाल यूनिट ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के कोरबा में पदस्थ सहायक प्रबंधक (सर्वे) प्रभाकर शुक्ला की लगभग 83.24 लाख रुपये की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई सीबीआई जबलपुर की दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर की गई है, जिसमें प्रभाकर शुक्ला पर आय से कई गुना अधिक संपत्ति बनाने के आरोप थे।
आय से अधिक संपत्ति का खुलासा
ईडी की पड़ताल में पाया गया कि प्रभाकर शुक्ला ने 2008 से 2022 के बीच अपनी वैध आय से 83.24 लाख रुपये अधिक की संपत्ति बनाई। उन्होंने इस "काली कमाई" को अपनी पत्नी और बेटियों के नाम पर खोले गए बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किया। इस रकम से शुक्ला ने अपने और परिवार के नाम पर एफडी कराईं, महंगी इंश्योरेंस पॉलिसियां खरीदीं और जमीन तथा फ्लैट खरीदने में भी निवेश किया। पूछताछ में जब प्रभाकर शुक्ला इस रकम का वैध स्रोत बताने में विफल रहे, तो उनकी संपत्ति अटैच कर ली गई। दोनों ही मामलों में यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत की गई है।
Satyam Tripathi