भोपाल में समान काम-समान वेतन की मांग पर प्रदर्शन
मध्य प्रदेश के आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों ने रविवार को तुलसी नगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में एकजुट होकर प्रदर्शन किया। 'महाक्रांति रैली' नामक इस आंदोलन का आयोजन आल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थायी, अंशकालीन, ग्राम पंचायत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हुआ।
कर्मचारियों की मांग और सरकार से नाराजगी
संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा कि यह आंदोलन प्रदेश के उन कर्मचारियों की आवाज है, जो वर्षों से अस्थिर रोजगार और आर्थिक अन्याय का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सरकारी व्यवस्थाओं को ठेकेदारों और आउटसोर्स कंपनियों के हवाले कर दिया है। क्लास 3 और क्लास 4 जैसे पदों पर स्थायी भर्ती न होने से अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों को कम वेतन में काम करना पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और उम्मीदें
वासुदेव शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम वेतन ₹21,000 प्रति माह करने की मांग की।
कर्मचारियों की दुर्दशा
रामनिवास केवट, जो 25 वर्षों से ग्राम पंचायत में चौकीदार हैं, ने अपनी स्थिति बयां की। उन्होंने बताया कि उनकी तनख्वाह आज भी मात्र ₹2000 महीने है और भुगतान में अक्सर 5–6 महीने की देरी होती है। उनकी परिवारिक परिस्थितियां बेहद कठिन हो चुकी हैं।
आंदोलन की अनुमति और भविष्य की योजना
यह प्रदर्शन पिछले दो वर्षों से लंबित था, लेकिन हाल ही में भोपाल पुलिस ने 12 अक्टूबर के लिए अनुमति दी। मोर्चा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को प्रदेश के लाखों कर्मियों के लिए न्याय की नई उम्मीद बताया और नियमित भर्ती की मांग को प्रमुखता दी।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति संविधान और श्रम कानूनों की अवहेलना है। उन्होंने सरकार से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की अपील की।