21 दिसंबर से भोपाल मेट्रो की शुरुआत, तैयारी पूरी
भोपाल मेट्रो की शुरुआत 21 दिसंबर से होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खजुराहो में प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राजधानी में मेट्रो ट्रेन के साथ कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा।
सीएमआरएस से मंजूरी, प्रायोरिटी कॉरिडोर तैयार
कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी की टीम ने भोपाल मेट्रो के ऑरेंज लाइन प्रायोरिटी कॉरिडोर को हरी झंडी दे दी है। टीम ने नवंबर में डिपो, ट्रैक, ट्रेन और तकनीकी उपकरणों का विस्तृत निरीक्षण किया था। आवश्यक सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद कमर्शियल रन को मंजूरी दी गई है।
ऑरेंज लाइन का रूट और स्टेशन
पहले चरण में ऑरेंज लाइन के 6.22 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो चलाई जाएगी। यह रूट सुभाष नगर से एम्स तक रहेगा, जिसमें सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स कुल आठ स्टेशन शामिल हैं। पूरी ऑरेंज लाइन करीब 16 किलोमीटर लंबी होगी, जो एम्स से करोंद तक जाएगी। दूसरा चरण अगले दो से तीन साल में पूरा होने की संभावना है।
किराया ढांचा और शुरुआती छूट
मेट्रो का किराया इंदौर मेट्रो की तर्ज पर तय किया जा रहा है। अधिकतम किराया 80 रुपए निर्धारित करने की तैयारी है, जो पूरा रूट शुरू होने पर लागू होगा। शुरुआती सात दिनों तक यात्रियों को मेट्रो में मुफ्त सफर की सुविधा मिलेगी। इसके बाद तीन महीने तक टिकट पर क्रमशः 75, 50 और 25 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। छूट अवधि समाप्त होने के बाद न्यूनतम किराया लगभग 20 रुपए रहने की संभावना है।
स्पीड और ट्रायल रन की स्थिति
सुभाष नगर से एम्स तक मेट्रो के कोच का ट्रायल रन लगातार जारी है। ट्रायल के दौरान मेट्रो की रफ्तार सामान्य रूप से 30 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा रखी जा रही है, जबकि बीच-बीच में 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से भी परीक्षण किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, कमर्शियल संचालन के लिए आवश्यक सभी तकनीकी और सुरक्षा कार्य पूरे हो चुके हैं, हालांकि कुछ स्टेशन संबंधी कार्य अभी जारी हैं।
ऑटोमैटिक फेयर सिस्टम के बदले मैन्युअल टिकट
भोपाल मेट्रो में फिलहाल ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लागू नहीं हो पाएगा। तुर्किये की कंपनी असिस गार्ड को किराया वसूली और एएफसी सिस्टम लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन विवाद के बाद उसका टेंडर अगस्त में रद्द कर दिया गया। नई कंपनी के चयन और सिस्टम लगाने की प्रक्रिया में दो से तीन महीने का समय लग सकता है।
इसी कारण अभी भोपाल मेट्रो में ट्रेन की तरह मैन्युअल टिकट व्यवस्था अपनाई जाएगी। टिकट काउंटर पर मेट्रो कर्मचारी तैनात रहेंगे और यात्रियों को वहां से टिकट लेकर एंट्री मिलेगी। इंदौर मेट्रो में भी पिछले छह महीनों से यही व्यवस्था लागू है और फिलहाल वही मॉडल भोपाल में दोहराया जाएगा।
राज्य सरकार की विकास योजनाओं का हिस्सा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने पिछले दो साल के कार्यों की समीक्षा और अगले तीन साल के लक्ष्यों को तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 21 दिसंबर को मेट्रो की शुरुआत के साथ अन्य विकास परियोजनाओं की सौगात दी जाएगी। वहीं, 25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी समापन पर लगभग दो लाख करोड़ रुपए के औद्योगिक परियोजनाओं के भूमिपूजन और लोकार्पण की योजना भी है।
निष्कर्ष
भोपाल मेट्रो का पहला चरण राजधानी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। सीमित रूट पर शुरू हो रही सेवा भविष्य के विस्तृत नेटवर्क की नींव मानी जा रही है। शुरुआती दिनों में फ्री और रियायती सफर से अधिक से अधिक लोगों को मेट्रो का अनुभव कराने की कोशिश है, जबकि मैन्युअल टिकट व्यवस्था अस्थायी समाधान के रूप में लागू रहेगी, जब तक कि नया ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम स्थापित नहीं हो जाता।
Sachin Saxena