भोपाल नगर निगम में करोड़ों के फर्जी बिल घोटाले की जांच तेज: लोकायुक्त ने जब्त दस्तावेजों का परीक्षण शुरू

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भोपाल नगर निगम  में  करोड़ों के फर्जी बिल  घोटाले की जांच तेज:  लोकायुक्त  ने  जब्त दस्तावेजों  का परीक्षण शुरू

भोपाल नगर निगम में करोड़ों के फर्जी बिल घोटाले की जांच तेज

भोपाल नगर निगम में बिना काम कराए फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए निकालने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने जांच तेज कर दी है। रविवार को लोकायुक्त टीम ने सेंट्रल वर्कशॉप से जब्त दस्तावेजों का परीक्षण शुरू कर दिया है। पिछले चार साल में पास किए गए तमाम फर्जी बिलों की भी जांच की जाएगी, ताकि पता चल सके कि कौन से कर्मचारी और अधिकारी इस फर्जीवाड़े में शामिल थे।

छापेमारी में जब्त हुए महत्वपूर्ण दस्तावेज और डेटा

शिकायत के बाद एक्शन में आई लोकायुक्त टीम ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए निगम के फतेहगढ़ स्थित डाटा सेंटर से लगभग चार साल के दस्तावेज और सर्वर डाटा जब्त किया था। इसी कार्रवाई के दौरान टीम को सेंट्रल वर्कशॉप में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के सबूत मिले, जिसके आधार पर रविवार सुबह करीब 9 बजे सेंट्रल वर्कशॉप में भी छापा मारा गया। यहां निगम की गाड़ियों से जुड़े मैकेनिकल काम होते हैं। जांच टीम ने भुगतान से जुड़े SAP सॉफ्टवेयर का डिजिटल डेटा भी कब्जे में लिया है।

अपर आयुक्त के खिलाफ FIR दर्ज

नगर निगम में फर्जी भुगतान की शिकायत नवंबर 2023 में लोकायुक्त को मिली थी। प्रारंभिक जांच में तथ्यों को सही पाए जाने पर 11 मार्च को अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद कोर्ट से सर्च वारंट लेकर छापेमारी की गई।

सॉफ्टवेयर के जरिए फर्जी बिलों से भुगतान का आरोप

लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी बिल तैयार कराए गए और बिना काम कराए ही परिचितों व रिश्तेदारों की फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया गया। नगर निगम के जलकार्य, सामान्य प्रशासन और केंद्रीय वर्कशॉप जैसे विभागों के नाम पर वाहनों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य काम दिखाए गए, जबकि कई मामलों में वास्तव में कोई काम हुआ ही नहीं था। कुछ मामलों में जिस विभाग के नाम से बिल बनाए गए, उन्हें ही इसकी जानकारी नहीं थी। अब यह पता लगाया जाएगा कि किन-किन कार्यों के नाम पर भुगतान हुआ और काम वास्तव में हुआ था या नहीं। इसके बाद संदिग्ध भूमिका वाले अधिकारी-कर्मचारियों को चिन्हित कर उनसे पूछताछ की जाएगी।

Satyam Tripathi