भोपाल वोटर लिस्ट में 4.38 लाख नाम कटे, 1.16 लाख मतदाताओं को नोटिस

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भोपाल वोटर लिस्ट में 4.38 लाख नाम कटे, 1.16 लाख मतदाताओं को नोटिस

भोपाल में मतदाता सूची संशोधन, 1.16 लाख वोटर्स को नोटिस की तैयारी

भोपाल की मतदाता सूची में व्यापक पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नामों में बदलाव और सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें पुराने रिकॉर्ड से मेल न खाने वाले मतदाताओं को विशेष रूप से चिह्नित किया गया है, जिनसे अब आधिकारिक दस्तावेज मांगे जाएंगे।

4.38 लाख नाम हटे, 1.16 लाख मतदाता 'नो मैपिंग' श्रेणी में

जानकारी के अनुसार, भोपाल की वोटर लिस्ट से कुल 4.38 लाख नाम हटाए गए हैं। इनमें से 1.16 लाख मतदाताओं का रिकॉर्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची के अनुसार नहीं मिल पाया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) सर्वे के दौरान ये मतदाता आवश्यक डेटा उपलब्ध नहीं करा सके, जिसके कारण इन्हें 'नो मैपिंग' की श्रेणी में रखा गया है।

नोटिस जारी, 50 दिन में रिकॉर्ड प्रस्तुत करना होगा

उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि जिन मतदाताओं को 'नो मैपिंग' में शामिल किया गया है, उन्हें मंगलवार से नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इन मतदाताओं को अगले 50 दिनों के भीतर अपना रिकॉर्ड प्रस्तुत करना होगा, ताकि उनके नामों की स्थिति पर निर्णय लिया जा सके।

दावे-आपत्तियों का दौर और बीएलओ की भूमिका

23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद 22 जनवरी तक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) अपने-अपने बूथ पर बैठकर मतदाताओं से संबंधित फॉर्म 6, 7 और 8 प्राप्त करेंगे। इसी अवधि के दौरान दावे और आपत्तियों का दौर चलेगा, जो लगभग एक महीने तक जारी रहेगा। इस प्रक्रिया में नए नाम जोड़े जाएंगे और जरूरत पड़ने पर पुराने नाम हटाए भी जा सकेंगे।

SIR प्रक्रिया की समझ और विधानसभा क्षेत्रों की स्थिति

भोपाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के काम को तीन स्लाइड के जरिए समझाने की बात कही गई है, ताकि मतदाता संशोधन प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, सात विधानसभा क्षेत्रों में चारों श्रेणियों में गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र आगे है, जबकि बैरसिया क्षेत्र में सबसे कम संख्या दर्ज की गई है।

मतदाताओं के लिए आगे की राह

मतदाता सूची संशोधन की इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। 'नो मैपिंग' श्रेणी में आने वाले मतदाताओं के लिए यह आवश्यक होगा कि वे समय सीमा के भीतर अपने दस्तावेज प्रस्तुत करें, ताकि उनके मतदान के अधिकार पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े। दावे और आपत्तियों के इस चरण के बाद ही अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी।

Satyam Tripathi