बिहार चुनाव में सीट शेयरिंग पर NDA-महागठबंधन में खींचतान

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बिहार चुनाव  में सीट शेयरिंग पर  NDA-महागठबंधन  में खींचतान

बिहार में विधानसभा चुनाव: सीट शेयरिंग पर सियासी खींचतान

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए घोषणा हो चुकी है, और अब सभी की नजरें सीट शेयरिंग पर टिकी हैं। एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) और महागठबंधन के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बैठकों का दौर तेज हो गया है। इस बार राजनीतिक दलों के बीच सीटों की संख्या और रणनीतियों को लेकर गहमागहमी बढ़ी हुई है।

जीतन राम मांझी की मांग

हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) पार्टी के प्रमुख जीतन राम मांझी ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी मान्यता प्राप्त सीटें चाहती है ताकि विधानसभा में उनकी पार्टी को मान्यता मिल सके। मांझी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका किसी मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री पद पर दावा नहीं है। उनका कहना है कि उनकी पार्टी के लिए सीटों की मान्यता ही मुख्य प्राथमिकता है।

मांझी ने इस संदर्भ में रामधारी सिंह दिनकर की कविता का जिक्र करते हुए अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, "हो न्याय अगर तो आधा दो, यदि उसमें भी कोई बाधा हो, तो दे दो केवल 15 ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम।"

चिराग पासवान की चुप्पी

लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान सीट शेयरिंग पर फिलहाल कोई खुला बयान नहीं दे रहे हैं। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, वे 35 सीटों की मांग कर रहे हैं, जबकि भाजपा उन्हें 20+ सीटें देने के लिए तैयार है। चिराग ने अपने पिता रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया पर लिखा, "पापा हमेशा कहा करते थे- जुर्म करो मत, जुर्म सहो मत।"

भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान, विनोद तावड़े और मंगल पांडेय ने चिराग को मनाने के लिए उनसे मुलाकात की। चर्चा यह भी है कि भाजपा ने चिराग को केंद्र या राज्य के उच्च सदन में एक सीट और बड़ा मंत्रालय देने का प्रस्ताव दिया है।

महागठबंधन की रणनीति

महागठबंधन की ओर से भी सीट शेयरिंग को लेकर गतिविधियां तेज हैं। लेफ्ट पार्टियों के नेताओं ने तेजस्वी यादव से मुलाकात की है। महागठबंधन की कोशिश है कि सीटों के बंटवारे में सभी दलों को संतुलित तरीके से हिस्सेदारी दी जाए।

क्या होगी भाजपा की रणनीति?

भाजपा सीटों के बंटवारे पर अंतिम निर्णय केंद्र के निर्देश पर लेगी। चिराग पासवान ने वैशाली, हाजीपुर, समस्तीपुर, खगड़िया और जमुई जैसी सीटों पर विशेष दावेदारी जताई है। इनमें भाजपा और एनडीए के अन्य दलों के बीच तालमेल बिठाना बड़ी चुनौती है।

इस बार सीट शेयरिंग का मसला एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए ही मुश्किल भरा साबित हो रहा है। अब देखना होगा कि यह बातचीत कब तक सुलझती है और इसका चुनावी समीकरण पर क्या असर होता है।

निष्कर्ष

बिहार चुनाव में सीट शेयरिंग का मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। जहां एनडीए चिराग पासवान को मनाने में जुटी है, वहीं महागठबंधन भी अपनी रणनीतियों को मजबूत कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीटों का बंटवारा किस तरह होता है और इसका चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ता है।