छिंदवाड़ा में जहरीली दवा से 11 बच्चों की मौत, प्रशासन ने की सख्त कार्रवाई
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में किडनी फेल होने के कारण 11 बच्चों की मौत के मामले ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। इस गंभीर प्रकरण के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित डॉक्टर और दवा कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह घटना न केवल चिकित्सा जगत के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है।
डॉक्टर और कंपनी के खिलाफ एफआईआर
शनिवार रात छिंदवाड़ा जिले के परासिया थाना में डॉक्टर प्रवीण सोनी और तमिलनाडु की श्रेसन फार्मास्युटिकल कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। स्वास्थ्य विभाग के बीएमओ डॉ. अंकित सल्लाम की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। दर्ज की गई धाराओं में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
स्वास्थ्य विभाग ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि बच्चों को दी गई दवा मिलावटी और हानिकारक तत्वों से युक्त थी। प्रशासन ने जिले के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को संदिग्ध दवाओं का उपयोग तुरंत बंद करने और दवा स्टॉक की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
दवाओं में मिला जहरीला केमिकल
सरकारी रिपोर्ट में सिरप कोल्ड्रिफ में 46.2% डायएथिलिन ग्लायकॉल (DEG) की पुष्टि हुई है, जबकि तमिलनाडु की रिपोर्ट में यह मात्रा 48.6% पाई गई। यह केमिकल बेहद जहरीला है और किडनी फेल होने के साथ-साथ ब्रेन डैमेज का कारण बन सकता है। गाइडलाइन के अनुसार, सिरप में 0.1% डायएथिलिन ग्लायकॉल की मात्रा ही स्वीकार्य है।
इसके अलावा, दो अन्य सिरप- नेक्स्ट्रो-डीएस और मेफटॉल पी की गुणवत्ता को मान्य पाया गया है। कुल 19 दवाओं के सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 12 की रिपोर्ट आ चुकी है और 7 की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।
अन्य राज्यों की प्रतिक्रिया
हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दवाओं के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगा दी है। दवा कंपनियों को अपने स्टॉक को वापस बुलाने और सप्लाई चेन की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
इंदौर में बनी डिफ्रॉस्ट सिरप को भी बाजार से वापस बुलाने के आदेश जारी किए गए हैं। लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने संबंधित कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
भविष्य की कार्रवाई
छिंदवाड़ा मामले में राज्य स्तर पर एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन किया गया है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना न केवल चिकित्सा प्रणाली की खामियों को उजागर करती है, बल्कि ऐसे मामलों पर सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। इस मामले से सबक लेते हुए, उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।