छतरपुर में खाद की किल्लत पर किसानों का चक्काजाम, अफसरों के रवैये से नाराज़गी
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में खाद की गंभीर कमी और कथित मनमानी बिक्री को लेकर किसानों का गुस्सा उफान पर पहुंच गया। हजारों किसान सड़कों पर उतर आए और कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
खजुराहो की समीक्षा बैठक के बीच हाईवे जाम
खजुराहो में मंत्रियों के विभागों की समीक्षा बैठक चल रही थी, इसी दौरान बमीठा थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-39 पर किसानों ने जाम लगा दिया। जाम के कारण खजुराहो की ओर जा रहे मंत्रियों और अफसरों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
इसी तरह हरपालपुर में भी खाद की कमी से परेशान किसानों ने झांसी–मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग-76 को थाने के सामने ही रोक दिया। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाने और जाम खुलवाने की कोशिश करते रहे।
रात भर लाइनें, फिर भी नहीं मिल रही खाद
अधिकारियों के अनुसार सोमवार सुबह तक 1300 से अधिक टोकन बांटे जा चुके थे, लेकिन खाद लेने के लिए आने वाले किसानों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही थी। सिविल लाइन थाना क्षेत्र की सटई रोड स्थित मंडी में किसान रात भर लाइन में खड़े नजर आए।
कुछ दिन पहले भी इसी मंडी में भारी भीड़ के कारण व्यवस्था बिगड़ गई थी और किसानों ने सड़क जाम कर दिया था। बार-बार दोहराए जा रहे ऐसे हालात से किसानों में असंतोष गहराता जा रहा है।
अफसरों पर बदसलूकी के आरोप और बढ़ा विवाद
खाद वितरण में अव्यवस्था के बीच प्रशासनिक अधिकारियों का व्यवहार भी विवाद का कारण बना। सौरा मंडल की तहसीलदार ऋतु सिंघई द्वारा एक छात्रा को थप्पड़ मारने का वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया। इसके बाद ईसानगर तहसीलदार आकाश नीरज और एसडीएम अखिल राठौर पर भी महिलाओं से बदसलूकी और झूमाझटकी के आरोप लगाए गए।
इन घटनाओं पर कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया था, जिसके बाद ऋतु सिंघई की तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई और उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बावजूद अब तक किसी अधिकारी पर ठोस कार्रवाई न होने से लोगों की नाराज़गी बनी हुई है।
ब्लैक मार्केट में महंगी खाद की बिक्री के आरोप
लवकुशनगर सहित कई क्षेत्रों में खाद वितरण केंद्रों पर भारी भीड़ उमड़ रही है। बुवाई का समय होने से किसान समय पर खाद न मिलने से परेशान हैं। इस बीच बाजार में डीएपी 1900 से 2000 रुपये प्रति बोरी और यूरिया 500 से 600 रुपये प्रति बोरी तक ऊंचे दाम पर, कथित तौर पर ब्लैक में बिकने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
खाद की कमी, काला बाजारी और अधिकारियों के कथित दुर्व्यवहार ने मिलकर स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है।
पहले भी बिजली और खाद को लेकर हो चुके हैं विरोध
क्षेत्र में इससे पहले भी किसानों ने बिजली आपूर्ति और सिंचाई संबंधी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया था। महेश्वर तहसील के किसानों ने दिन में 10 घंटे बिजली देने की मांग करते हुए बड़वाह–धामनोद मुख्य मार्ग पर चक्काजाम किया था।
खाद वितरण के दौरान हुए हंगामे का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें नायब तहसीलदार और एसडीएम एक महिला को कथित तौर पर धमकाते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह घटनाएं किसानों और प्रशासन के बीच अविश्वास को और बढ़ा रही हैं।
निष्कर्ष: समाधान की ठोस पहल की जरूरत
छतरपुर और आसपास के क्षेत्रों में खाद की कमी, वितरण की खराब व्यवस्था, कथित काला बाजारी और अफसरों के व्यवहार ने मिलकर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। किसान बुवाई के महत्वपूर्ण समय में सड़क पर उतरने को मजबूर हैं, जिससे प्रशासनिक सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थिति सामान्य करने के लिए समय पर खाद उपलब्ध कराना, काला बाजारी पर सख्त कार्रवाई करना और शिकायतों पर संवेदनशीलता से प्रतिक्रिया देना जरूरी है। अन्यथा किसानों का गुस्सा और विरोध आगे भी बढ़ सकता है।
Adarsh Chaurasiya