दिल्ली के हॉस्टल डेज हादसे में रेंट एग्रीमेंट की शर्तें और इमारत की अवैधता उजागर
हॉस्टल डेज के रेंट एग्रीमेंट में छात्रों से तीन महीने की सिक्योरिटी और एक महीने का एडवांस किराया मांगा गया था। एक कमरे का मासिक किराया ₹15 हजार तय था। एग्रीमेंट में स्पष्ट लिखा था कि पीजी अथॉरिटी छात्र को होने वाली किसी भी कैजुअल्टी या जोखिम के लिए ज़िम्मेदार नहीं होगी। शर्तों के अनुसार एग्रीमेंट अवधि पूरी होने से पहले किसी भी स्थिति में सिक्योरिटी वापस नहीं की जाएगी। फर्नीचर या अन्य सामान को नुकसान पहुंचने पर उसकी कीमत सिक्योरिटी डिपॉजिट से काटी जाएगी। छात्रों को दीवारों पर पोस्टर या स्टिकर लगाने से रोका गया था। तय अवधि से पहले हॉस्टल छोड़ने या अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत निकाले जाने पर हॉस्टल फीस या सिक्योरिटी वापस नहीं मिलनी थी।
इमारत की अवैध संरचना और हादसे की परिस्थितियां
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक MCD अधिकारी ने बताया कि यह इमारत करीब 50 साल पुरानी थी और लगभग 55 गज जमीन पर बनी थी। यह जमीन एक रिहायशी कॉलोनी में स्थित थी, जहां केवल दो मंजिला इमारत बनाने की अनुमति थी, लेकिन इमारत पांच मंजिला थी। अधिकारी के मुताबिक इस इमारत का कोई बिल्डिंग प्लान भी मंजूर नहीं हुआ था। हादसे के वक्त बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था और मजदूर काम कर रहे थे। इमारत गिरने पर 11 लोग बचाए गए, जिनमें 2 मजदूर शामिल थे। एक मजदूर की मौत हो गई। कुल 7 लोगों की मौत हुई, जिनमें हॉस्टल में रहने वाले छात्र थे। घायल या बचाए गए अन्य लोगों का पूरा विवरण इस रिपोर्ट में नहीं दिया गया है।
दिल्ली में इमारत गिरने के मामले और हाईकोर्ट जांच
आंकड़ों के अनुसार 2022 से 2025 तक यानी तीन साल में दिल्ली में इमारत गिरने की 1133 घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें 98 लोगों की मौत हुई है। इस हादसे के बाद हाईकोर्ट ने जांच के आदेश दिए हैं, जिसके बाद हॉस्टल में छात्रों की सुरक्षा और दिल्ली में चल रहे ऐसे पीजी की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
Sachin Saxena