दिल्ली सत्य निकेतन PG हादसा: तथ्यात्मक विवरण
घटना और प्रारंभिक प्रतिक्रिया
दिल्ली नगर निगम ने मंगलवार को सत्य निकेतन इलाके में हादसे वाली इमारत से सटी बिल्डिंग को तोड़ना शुरू कर दिया है। 6 सितंबर को बिल्डिंग ‘हॉस्टल डेज’ ढहने के बाद अधिकारियों ने पड़ोस की इमारत को खतरनाक घोषित किया था। मंगलवार को शुरू हुई कार्रवाई शाम तक चली, जो बुधवार सुबह फिर शुरू होगी। इस बिल्डिंग में गर्ल्स पीजी चल रहा था। पड़ोस की इमारत गिरने के बाद इसे खाली करा लिया गया था। सत्या निकेतन में रविवार को गिरी इमारत में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई थी और 5 लोग घायल हुए थे। इसी हादसे के बाद यह आदेश जारी किया गया है। सत्य निकेतन में रविवार को एक बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत हुई थी और 6 लोग घायल हुए थे।
गर्ल्स पीजी की दीवारों में दरारें, छात्राओं ने बनाया वीडियो। हॉस्टल डेज के पड़ोस में ही बने एक पीजी की कुछ स्टूडेंट्स ने अपने कमरे में आई दरारों का वीडियो बनाया था। दावा किया जा रहा है कि यह बिल्डिंग हॉस्टल डेज के ठीक पहले बना गर्ल्स हॉस्टल ही है। यहां रहने वाली दो छात्राओं अर्निका और मानसी ने 'हॉस्टल डेज' में हुए हादसे से कुछ मिनट पहले अपने कमरे की दीवारों और छत की दरारों का वीडियो बनाया था। ये दोनों दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेकेंड ईयर की छात्राएं हैं। वीडियो में 20 साल की अर्निका को कहते सुना जा सकता है- 'लगता है गिरने वाली है।'
कानूनी, प्रशासनिक और न्यायिक कार्रवाई
इधर, इमारत गिरने के मामले में लेबर कॉन्ट्रैक्टर को उत्तर प्रदेश के कासगंज से पकड़ा गया है। यह इस मामले में चौथी गिरफ्तारी है। इससे पहले पीजी के मालिक हरिराम, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को पुलिस सोमवार को गिरफ्तार कर चुकी है। सोमवार रात तीनों आरोपियों हरिराम बंसल, पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। जस्टिस भव्य खराल ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, जबकि महेश को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है। पुलिस रिमांड के दौरान इमारत मालिक हरिराम गुप्ता के बेटे महेश गुप्ता ने जांच अधिकारी को बताया कि पीजी संचालित करने वाली कंपनी की शिकायत पर बेसमेंट में पानी भरने और सीलन की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत करवाई जा रही थी। बेसमेंट से पानी निकालने के बाद निर्माण कार्य के दौरान पावर ट्रोवेल मशीन भी चलाई जा रही थी। आशंका है कि मशीन से पैदा हुई कंपन और कमजोर हुई संरचना के कारण भवन भरभराकर गिर गया।
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, सुनवाई कल। सत्य निकेतन पीजी हादसा मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने संकेत दिया कि वे इस मुद्दे को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि देशभर में जर्जर और अवैध इमारतों की स्थिति की समीक्षा करेंगे। अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। यह मुद्दा तब उठा, जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरे सीनियर एडवोकेट अजीत सिन्हा ने 6 सितंबर को हुई सत्य निकेतन दुर्घटना का उल्लेख किया। सिन्हा अवैध और असुरक्षित भवनों से जुड़े एक पुराने मामले में अदालत की सहायता कर रहे हैं।
Amit Pateria