जर्मनी में एएफडी की ऐतिहासिक जीत, एलिस वीडल बनीं दक्षिणपंथ का नया चेहरा

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जर्मनी में एएफडी की ऐतिहासिक जीत, एलिस वीडल बनीं दक्षिणपंथ का नया चेहरा

जर्मनी में एएफडी की ऐतिहासिक जीत और एलिस वीडल का उदय

बचपन, परिवार और पेशेवर सफर

जर्मनी के सैक्सोनी-अनहाल्ट में सितंबर 2026 के चुनाव में अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) ने बड़ी जीत हासिल की। दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी जर्मन राज्य में सत्ता के करीब पहुंची है। पार्टी की प्रमुख एलिस वीडल का जन्म 1979 में हुआ। उनके दादा हंस वीडल हिटलर की नाजी पार्टी से जुड़े थे और 1941 में नाजी कब्जे वाले वारसॉ में सैन्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए थे। परिवार तब सिलेसिया (वर्तमान पोलैंड) में रहता था; युद्ध में हार के बाद वे पश्चिमी जर्मनी भाग आए और फर्नीचर का कारोबार शुरू किया। वीडल के अनुसार नाजी शासन में दादा की भूमिका पर परिवार में कभी चर्चा नहीं हुई। स्कूली दिनों में वामपंथी झुकाव वाले शिक्षकों को चिढ़ाने के लिए वह पिता की मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं। पिता के विरोध पर डॉक्टर बनने का विचार छोड़कर उन्होंने अर्थशास्त्र और व्यवसाय की पढ़ाई की, गोल्डमैन सैक्स में काम किया और फिर चीन चली गईं। बैंक ऑफ चाइना में पांच साल रहकर मंदारिन सीखी, बिजनेस कंसल्टेंट के रूप में कार्य किया और 2011 में चीनी पेंशन व्यवस्था पर डॉक्टरेट पूरी कर जर्मनी लौटीं।

निजी जीवन, राजनीति में प्रवेश और वैचारिक विरोधाभास

2007 में वीडल की मुलाकात स्विस फिल्म निर्माता सारा बोसार्ड से हुई, जिनका जन्म श्रीलंका में हुआ था और तीन महीने की उम्र में एक स्विस पादरी दंपती ने उन्हें गोद लिया था। दोनों 2009 से साथ हैं, स्विट्जरलैंड में रहते हैं और स्पर्म डोनेशन से जन्मे दो बेटों की परवरिश करते हैं; दोनों बच्चों के बायोलॉजिकल फादर अलग-अलग हैं और उनकी पहचान परिवार को ज्ञात है। एक पार्टी में यूरोपीय संघ की राजनीति पर लंबी चर्चा से तंग आकर सारा ने वीडल से कहा, "अगर राजनीति पर इतनी ही बातें करनी हैं तो खुद राजनीति में क्यों नहीं चली जातीं?" इसी टिप्पणी ने वीडल को 2013 में नवगठित एएफडी से जोड़ा, जिसका प्रारंभिक मुद्दा यूरो और यूरोजोन संकट था। वीडल जल्द पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में पहुंचीं और आर्थिक मामलों की जानकार तथा मीडिया में मजबूत प्रवक्ता के रूप में पहचानी गईं।

2015 में सीरिया, अफगानिस्तान और इराक के शरणार्थी संकट ने एएफडी की दिशा बदल दी; पार्टी प्रवासियों और शरणार्थियों के विरोध के लिए पहचानी जाने लगी। 2016 के पहले घोषणापत्र में समलैंगिकता का विरोध और स्कूलों में यौन विविधता शिक्षा का विरोध जोड़ा गया। यहीं वीडल की निजी जिंदगी और पार्टी लाइन का विरोधाभास उभरा: पार्टी समलैंगिक विवाह और प्रवासियों के खिलाफ है, जबकि वीडल स्वयं लेस्बियन हैं और एक अप्रवासी मूल की महिला के साथ परिवार चलाती हैं। पूछे जाने पर वीडल ने कहा कि उनका लेस्बियन होना और एएफडी नेता होना ही एक राजनीतिक संदेश है; उनका तर्क है कि कुछ मुस्लिम गिरोह समलैंगिकों के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं, इसलिए सख्त इमिग्रेशन नीति समलैंगिकों की सुरक्षा बढ़ाएगी। 2017 में वीडल ने माना कि उनकी निजी जिंदगी और पार्टी की पारिवारिक नीति में पूरी समानता नहीं है और वे पार्टी लाइन से अधिक उदार हैं। वे समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के विरुद्ध हैं, लेकिन समलैंगिक जोड़ों को कानूनी पार्टनरशिप (संपत्ति, चिकित्सा निर्णय और आर्थिक अधिकार) देने के पक्ष में हैं।

2013 के चुनाव में एएफडी को 4.7% वोट मिले थे; हाल के सर्वेक्षणों में पार्टी को 27-28% समर्थन मिल रहा है। पूर्वी जर्मनी के सैक्सोनी, थुरिंगिया और सैक्सोनी-अनहाल्ट (हालिया चुनाव में लगभग 44%) में पार्टी का मजबूत आधार है। सबसे बड़ी चुनौती सरकार बनाने की है, क्योंकि अन्य प्रमुख दल एएफडी के साथ गठबंधन से इनकार करते रहे हैं। केवल सर्वाधिक वोट मिलना 2029 में वीडल को चांसलर बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा; उन्हें अन्य दलों का समर्थन भी हासिल करना होगा।

Satyam Tripathi