एमपी में कड़ाके की ठंड जारी, पचमढ़ी 4°C से नीचे, ट्रेनें घंटों लेट

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एमपी में कड़ाके की ठंड जारी, पचमढ़ी 4°C से नीचे, ट्रेनें घंटों लेट

मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड जारी, पचमढ़ी का तापमान 4 डिग्री से भी नीचे

मध्यप्रदेश में कोहरे का असर कुछ कम हुआ है, लेकिन कड़ाके की ठंड का दौर थमने के बजाय और तेज हो रहा है। राज्य के इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे कम तापमान है। इसके कारण न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए पचमढ़ी जाने वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

राज्यभर में न्यूनतम तापमान में गिरावट, कई शहर कड़े सर्दी के प्रकोप में

मौसम विभाग के अनुसार पचमढ़ी के बाद कल्याणपुर प्रदेश का दूसरा सबसे ठंडा शहर रहा, जहां तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। नौगांव में 7 डिग्री, राजगढ़ में 7.4 डिग्री, मलाजखंड में 7.6 डिग्री, रीवा में 8.2 डिग्री, उमरिया में 8.3 डिग्री, रायसेन, छिंदवाड़ा और मंडला में 9 डिग्री, खजुराहो में 9.2 डिग्री और टीकमगढ़ में 9.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो दिनों में कई इलाकों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री तक और गिरावट हो सकती है। अगले पांच दिन मौसम शुष्क रहने और कहीं भी बारिश न होने की संभावना जताई गई है।

कई शहरों में कोहरा, विजिबिलिटी घटी, लोगों की आवाजाही पर असर

गुरुवार सुबह ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मैहर, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और शहडोल में कहीं घना तो कहीं मध्यम कोहरा छाया रहा। कई जिलों में विजिबिलिटी काफी कम रही, जिससे लोगों को वाहनों से सफर करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बुधवार की सुबह कुछ शहरों में घने कोहरे से राहत मिली, लेकिन इंदौर, खजुराहो, रीवा, सतना, दतिया, गुना, ग्वालियर, रतलाम, उज्जैन, मंडला, नरसिंहपुर और नौगांव में कोहरे का असर ज्यादा देखा गया।

ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक, कई गाड़ियां घंटों देरी से

कोहरे का सबसे ज्यादा प्रभाव रेल यातायात पर दिखाई दे रहा है। दिल्ली से भोपाल, उज्जैन और इंदौर आने वाली एक दर्जन से अधिक ट्रेनें पिछले एक सप्ताह से 5 से 8 घंटे तक देरी से चल रही हैं। इन ट्रेनों में मालवा एक्सप्रेस, शताब्दी और सचखंड एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण गाड़ियां भी शामिल हैं। हालांकि, कुछ रूटों पर ट्रेनों के देरी से चलने के समय में थोड़ी कमी भी दर्ज की गई है।

हिमालयी सिस्टम और जेट स्ट्रीम से बढ़ रही सर्दी

मौसम विभाग के अनुसार 27 दिसंबर को एक पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर मध्यप्रदेश में भी देखा जा सकता है। इसके कारण उत्तरी व पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाली ठंडी और बर्फीली हवाएं प्रदेश में सर्दी को और बढ़ा सकती हैं। अभी भी उत्तरी हवाएं इंदौर, राजगढ़, शाजापुर और भोपाल समेत कई शहरों में दिन के तापमान को नीचे ला रही हैं।

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम भी सक्रिय है, जो जमीन से लगभग 12 से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर करीब 222 से 240 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार ऊंचाई पर चलने वाली यह तेज हवा और पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा मिलकर सर्दी को और कड़ा कर रही है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने और जेट स्ट्रीम बनने की स्थिति में ठंड दोगुनी महसूस होती है, जो इस समय देखने को मिल रही है।

नवंबर और दिसंबर में रिकॉर्ड तोड़ ठंड, भोपाल और इंदौर में ऐतिहासिक गिरावट

इस बार नवंबर से ही ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ रुख अपनाया। नवंबर में भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे लंबी अवधि मानी जा रही है। 17 नवंबर की रात को भोपाल का तापमान 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो उस तारीख के लिए ओवरऑल रिकॉर्ड माना गया है। इससे पहले 30 नवंबर 1941 को तापमान 6.1 डिग्री रहा था।

इंदौर में भी इस बार नवंबर में पारा 6.4 डिग्री तक लुढ़का, जो 25 साल में सबसे कम था। दिसंबर में भी इंदौर का तापमान काफी नीचे रहा और भोपाल में भी न्यूनतम तापमान 5 डिग्री से नीचे पहुंच चुका है।

दिसंबर-जनवरी: ठंड के चरम महीने, आंकड़ों से भी मिलती पुष्टि

मौसम विभाग का कहना है कि जिस तरह मानसून के जुलाई और अगस्त महीने वर्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, उसी तरह दिसंबर और जनवरी मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड के लिए प्रमुख महीने हैं। इन दो महीनों में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा संख्या में पहुंचती हैं, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट होती है और शीतलहर की स्थिति बनती है। पिछले 10 वर्षों के आंकड़े भी यही संकेत देते हैं।

पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने पर दिसंबर में 'मावठा' यानी हल्की बारिश भी होती है, जिससे दिन के तापमान में भी गिरावट आती है और ठंड का असर बढ़ जाता है। इस साल भी कई पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत को प्रभावित कर चुके हैं, जिसके कारण मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड और शीतलहर की स्थिति बनी हुई है।

दिसंबर में प्रमुख शहरों का मौसम ट्रेंड

भोपाल: रिकॉर्ड न्यूनतम तापमान और बरसात का इतिहास

भोपाल में पिछले 10 साल में दिसंबर के दौरान कई बार बारिश दर्ज की गई है और पिछले पांच साल में से अधिकांश वर्षों में आधा से तीन-चौथाई इंच तक बारिश होती रही है। हालांकि इस बार दिसंबर में अभी तक बारिश नहीं हुई है। रिकॉर्ड के अनुसार 11 दिसंबर 1966 की रात भोपाल में न्यूनतम तापमान 3.1 डिग्री तक पहुंचा था, जो अब तक का ओवरऑल रिकॉर्ड है। वर्ष 2021 में भी न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री तक दर्ज किया जा चुका है।

इंदौर: दिसंबर में 5 से 8 डिग्री तक गिरता पारा

इंदौर में दिसंबर के दौरान रात का तापमान सामान्यतः 5 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। पिछले वर्ष न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री तक पहुंचा था। पिछले 10 साल के आंकड़ों के अनुसार दिन का तापमान इस महीने 28 से 31 डिग्री के बीच रहता है। दिसंबर में इंदौर में अक्सर बारिश भी होती रही है और पिछले चार साल से लगातार बरसात दर्ज की गई, हालांकि इस बार अभी तक बारिश नहीं हुई है।

रिकॉर्ड के मुताबिक 31 दिसंबर 2015 को दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री दर्ज किया गया था। वहीं 27 दिसंबर 1936 की रात को तापमान 1.1 डिग्री तक गिरा था। दिसंबर 1967 में कुल मासिक वर्षा 108.5 मिमी (लगभग 4.2 इंच) दर्ज की गई, जबकि 17 दिसंबर 2009 को 24 घंटे में 53 मिमी (करीब 2.1 इंच) बारिश हुई थी।

ग्वालियर: दिन में गर्माहट, रात में तेज ठंड और कोहरा

ग्वालियर में पिछले 10 वर्षों के डेटा के अनुसार दिसंबर में दिन का अधिकतम तापमान 26.2 से 31.6 डिग्री के बीच रहा है, जबकि रात का पारा 1.8 से 6.9 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। इस बार भी यहां तेज ठंड के साथ घना कोहरा देखने को मिल रहा है।

इतिहास पर नजर डालें तो 6 दिसंबर 2006 को ग्वालियर में दिन का तापमान 32.1 डिग्री तक गया था। 26 दिसंबर 1961 को न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री दर्ज हुआ था। वर्ष 1997 में दिसंबर माह में कुल 106.6 मिमी (करीब 4.1 इंच) बारिश हुई थी, जबकि 13 दिसंबर 2013 को 24 घंटे में 32.1 मिमी (लगभग 1.2 इंच) बारिश रिकॉर्ड की गई थी।

जबलपुर: सर्दी का पुराना रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति

जबलपुर में 28 दिसंबर 1960 को दिन का तापमान 33.2 डिग्री तक दर्ज किया गया था, जबकि 28 दिसंबर 1902 की रात को न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री रहा, जो अब तक का ओवरऑल रिकॉर्ड है। वर्ष 1885 में दिसंबर के दौरान 125 मिमी (लगभग 4.9 इंच) की सर्वाधिक मासिक बारिश दर्ज की गई थी और 16 दिसंबर 1885 को 24 घंटे में 68.1 मिमी (करीब 2.6 इंच) बारिश का रिकॉर्ड बना था।

इस बार जबलपुर में भी कड़ाके की ठंड का दौर जारी है, हालांकि दिसंबर में अब तक बारिश नहीं हुई है।

उज्जैन: ठंडी रातें और बारिश के रिकॉर्ड

उज्जैन में दिसंबर में दिन का औसत तापमान 28.2 डिग्री और रात का औसत तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस रहता है। इस महीने औसतन 4.6 मिमी बारिश दर्ज की जाती है और पिछले पांच साल से लगभग हर दिसंबर में बारिश हो रही थी, लेकिन इस बार अब तक एक भी दिन बारिश नहीं हुई है।

18 दिसंबर 2002 को उज्जैन में दिन का तापमान 34.9 डिग्री तक पहुंच गया था, जो अब तक का ओवरऑल रिकॉर्ड है। 28 दिसंबर 1968 और 29 दिसंबर 1983 को रात का तापमान 0.5 डिग्री तक गिरा था। वर्ष 1997 में कुल मासिक वर्षा 119.4 मिमी (करीब 4.7 इंच) दर्ज की गई, जबकि 11 दिसंबर 1967 को 24 घंटे में 35.3 मिमी (लगभग 1.3 इंच) बारिश हुई थी।

लोगों के लिए सतर्कता जरूरी

लगातार गिरते तापमान, शीतलहर, कोहरे और सर्द हवाओं के बीच मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से सुबह और देर रात के समय बाहर निकलते समय पर्याप्त गर्म कपड़े पहनने, वाहन चलाते समय सावधानी बरतने और कोहरे के दौरान कम गति से ड्राइव करने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में भी ठंड में और इजाफा संभावित होने के चलते सामान्य जनजीवन पर सर्दी का असर जारी रहने की आशंका जताई जा रही है।

Lokendra Mishra