मध्य प्रदेश के स्कूलों में सुविधाओं का गंभीर अभाव, डिजिटल शिक्षा में पिछड़ा
नीति आयोग की मई 2026 की 'स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया' रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं का भी भारी अभाव है। प्रदेश के 1 लाख 22 हजार स्कूलों में से 67 हजार 532 में इंटरनेट की सुविधा नहीं है, जबकि 98 हजार 184 स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, 14,900 स्कूलों में काम करने वाली बिजली की कमी है, तो 49,800 स्कूलों में अब तक कंप्यूटर उपलब्ध नहीं हुए हैं।
इंटरनेट, स्मार्ट क्लासरूम और बिजली में पिछड़ा मध्य प्रदेश
इंटरनेट सुविधा: 25वां स्थान
मध्यप्रदेश के मात्र 45.7% स्कूलों में इंटरनेट की व्यवस्था है, जो राष्ट्रीय औसत 63.5% से काफी कम है। इंटरनेट सुविधा के मामले में एमपी देश के 24 राज्यों से पीछे है। 2014-15 की तुलना में स्थिति सुधरी है, लेकिन बिहार, असम और ओडिशा जैसे राज्य जो पहले पीछे थे, अब काफी आगे निकल चुके हैं।
स्मार्ट क्लासरूम: 28वां स्थान
स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा में एमपी देश के 20 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों से पीछे है। प्रदेश के केवल 19.6% स्कूलों में फंक्शनल स्मार्ट क्लासरूम हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 30.6% है। 98 हजार से अधिक स्कूलों में यह सुविधा नदारद है। हालांकि, 2021-22 की तुलना में स्थिति में सुधार हुआ है, पर तमिलनाडु जैसे राज्यों ने तेज प्रगति की है।
बिजली सुविधा: 18वां स्थान
स्कूलों में बिजली सुविधा के मामले में मध्य प्रदेश 17 राज्यों से पीछे और बड़े राज्यों में 18वें स्थान पर है। प्रदेश के 87.8% स्कूलों में ही फंक्शनल बिजली है, जबकि राष्ट्रीय औसत 91.9% है। लगभग 14,900 स्कूलों में अब भी काम करने वाली बिजली नहीं है। 10 साल में प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है, लेकिन कई राज्य जो पहले पीछे थे, अब आगे निकल गए हैं।
कंप्यूटर और टॉयलेट सुविधाओं में भी पीछे
कंप्यूटर सुविधा: 18वां स्थान
कंप्यूटर सुविधा के मामले में भी एमपी 17 राज्यों से पीछे और बड़े राज्यों में 18वें स्थान पर है। प्रदेश के केवल 59.2% स्कूलों में फंक्शनल कंप्यूटर हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 64.7% है। करीब 49,800 स्कूलों में कंप्यूटर सुविधा नहीं है। 2014-15 में यह आंकड़ा 14.6% था, जिसमें सुधार हुआ है, पर अन्य राज्य तेजी से आगे बढ़े हैं।
टॉयलेट सुविधा: 17वां स्थान
टॉयलेट सुविधा में मध्य प्रदेश 16 राज्यों से पीछे और बड़े राज्यों में 17वें स्थान पर है। लड़कों के लिए 87.2% और लड़कियों के लिए 88.6% स्कूलों में फंक्शनल टॉयलेट हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत क्रमशः 92.4% और 94% है। करीब 15,600 स्कूलों में लड़कों के और 13,900 में लड़कियों के टॉयलेट की सुविधा नहीं है।
बच्चों के ड्रॉपआउट और शिक्षकों की कमी
बच्चों के ड्रॉपआउट का मामला
कक्षा 1 से 5 तक मध्य प्रदेश में ड्रॉपआउट 0% हो गया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, कक्षा 6 से 8 में 6.3% बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं, और कक्षा 9-10 में यह दर 16.8% तक पहुँच गई है, जिससे प्रदेश इस मामले में चिंताजनक स्थिति में है।
शिक्षकों की भारी कमी
राज्य में कुल 52,019 शिक्षक पद खाली हैं, जिनमें प्राथमिक स्कूलों में सबसे अधिक 47,122 पद रिक्त हैं। 7,217 स्कूल ऐसे हैं जहाँ पूरी पढ़ाई केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रही है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
Arvind Vishwakarma