हेडिंग (बीजेपी का मिशन 2028 मंत्रियों की परीक्षा...निगम मंडल पदाधिकारियों को पाठ ) महेंद्र विश्वकर्मा की रिपोर्ट मध्यप्रदेश में सीएम डॉ मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार..कार्यकाल के ढाई साल बेमिसाल होने के साथ ही सुशासन, जवाबदेही और परिणाम आधारित प्रशास

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हेडिंग 
(बीजेपी का मिशन 2028
मंत्रियों की परीक्षा...निगम मंडल पदाधिकारियों को पाठ ) महेंद्र विश्वकर्मा की रिपोर्ट 

मध्यप्रदेश में सीएम डॉ मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार..कार्यकाल के ढाई साल बेमिसाल होने के साथ ही सुशासन, जवाबदेही और परिणाम आधारित प्रशास

मंत्रियों की परीक्षा...निगम मंडल पदाधिकारियों को पाठ मध्यप्रदेश में सीएम डॉ मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार..कार्यकाल के ढाई साल बेमिसाल होने के साथ ही सुशासन, जवाबदेही और परिणाम आधारित प्रशासन पर फोकस कर रही है..भाजपा मिशन 2028 को केंद्र में रख सरकार और संगठन को पूरी तरह मिशन मोड में सक्रिय कर चुकी है..यही कारण है कि सत्ता और संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने सरकार के मंत्रियों का विस्तृत परफॉर्मेंस टेस्ट लिया तो वहीं नवनियुक्त निगम-मंडल अध्यक्षों और पदाधिकारियों की पाठशाला लगाकर उन्हें भी अनुशासन के साथ सुशासन का पाठ पढ़ाया गया..मंत्रियों के दो दिन चले परफॉर्मेंस टेस्ट में केवल विभागीय उपलब्धियां ही नहीं, बल्कि संगठनात्मक सक्रियता, जनता से संवाद, योजनाओं की डिलिवरी और राजनीतिक प्रबंधन तक का आंकलन किया गया तो सत्त संगठन में समन्यव के साथ ब्यूरोक्रेसी से सतत संवाद को लेकर समझाइश भी दी गई..राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह चौहान और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मंत्रियों से उनके प्रभार वाले जिलों, संगठन से समन्वय, बूथ प्रबंधन, निकाय चुनाव की तैयारी और हारी हुई विधानसभा सीटों पर सक्रियता को लेकर सवाल किए..इससे स्पष्ट संदेश गया कि भाजपा केवल सरकार चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक और संगठनात्मक मजबूती को समानांतर रूप से आगे बढ़ा रही है. इधर राजधानी भोपाल के अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान में नवनियुक्त निगम-मंडल अध्यक्षों और पदाधिकारियों की पाठशाला में मुख्यमंत्री डॉ मेाहन यादव ने प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया तो अनुशासन और सुशासन का पाठ पढ़ाया..इधर भी प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह चौहान और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी रही..इस प्रशिक्षण मंच से सीएम डॉ मोहन यादव ने सभी नवनियुक्त निगम-मंडल अध्यक्षों और पदाधिकारियों को बेहद सटीक भाषा में समझाने का प्रयास किया कि नियुक्ति मिल जाने के बाद की जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है..हर पदाधिकारी की भूमिका अलग है, जिम्मेदारियां अलग हैं और उसी अनुरूप कार्यकुशलता विकसित करना समय की मांग है..सीएम ने यहां कम शब्दों में बड़ा संदेश दिया कि कानून के दायरे में रहकर..ऐसा कार्य करें कि जब पद से हटें तो संतोष का भाव मन में बना रहे. हुआ परफॉर्मेंस टेस्ट..23 से विभागवार समीक्षा दो दिनों तक चली इस व्यापक समीक्षा प्रक्रिया यानि परफॉर्मेंस टेस्ट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों से सीधे सवाल किए कि उन्होंने अब तक क्या किया, आने वाले समय में उनकी प्राथमिकताएं क्या होंगी और विभागों में नवाचार के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं..सीएम का फोकस स्पष्ट रूप से इस बात पर रहा कि सरकार की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रही हैं और जनता को उसका वास्तविक लाभ मिल रहा है या नहीं..इस परफॉर्मेंस टेस्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसमें केवल सत्ता नहीं, बल्कि संगठनात्मक दृष्टिकोण को भी बराबर महत्व दिया गया..मंत्रियों से यह भी पूछा गया कि उन्होंने अपने प्रभार वाले जिलों में कितने दौरे किए, स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए क्या प्रयास हुए और कार्यकर्ताओं से संवाद कितना मजबूत है..इस पूरी प्रक्रिया में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संवेदनशीलता और प्रशासनिक दृष्टि भी स्पष्ट रूप से सामने आई..जब उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन, गरीबों तक लाभ पहुंचाने, विभागों के बीच समन्वय और अधिकारियों के साथ तालमेल पर विशेष जोर दिया..मुख्यमंत्री यह संदेश लगातार देते रहे हैं कि किसी भी विभाग की साख केवल उस मंत्री की नहीं, बल्कि पूरी सरकार की छवि तय करती है..यही वजह है कि 23 मई से अब विभागवार समीक्षा बैठकों का दौर शुरू होने जा रहा है, जहां हर विभाग की उपलब्धियों, कमियों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी. आपकी साख..तय करेगी सरकार की छवि निगम मंडल पदाधिकारियों को प्रशासनिक प्रक्रिया से लेकर सुशासन का मूल भाव समझाने के टिप्स दिए गए..सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें,बल्कि मैदानी स्तर पर उनका प्रभाव दिखाई दे,यह सुनिश्चित करना पदाधिकारियों की जिम्मेदारी है..उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी विभाग की साख केवल उस विभाग तक सीमित नहीं रहती,बल्कि उससे पूरी सरकार की छवि निर्मित होती है..इसलिए काम हमेशा कानून के दायरे में, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए..इस प्रशिक्षण में भी सबसे अहम पक्ष सत्ता-संगठन और प्रशासनिक तंत्र के बीच तालमेल पर दिया गया जोर रहा..सीएम ने अपने संबोधन में निगम मंडल पदाधिकायों को नए दायित्व की शुभकामनाएं दीं तो वहीं समन्वय आधारित राजनीति के सीख..सीएम ने कहा कि जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, मंत्रियों और संगठन के बीच बेहतर संवाद को सबसे बड़ी प्राथमिकता में रखते हुए आपको अपनी कार्यकुशलता की क्षमता दिखाना है..क्योंकि प्रशासनिक व्यवस्था में कई बार समन्वय की कमी से योजनाओं का प्रभाव कमजोर पड़ता है..यहां सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को इशारों इशारों में सीएम यह भी समझा गए कि..आपको जो जिम्मेदारी मिली..उसका निर्वहन करते चलें..क्योंकि कभी भी भूमिका बदल सकती है..और बदलती भूमिका के लिए हर वक्त तैयार रहें. पाठशाला में लगी फटकार प्रशिक्षण में पहुंचे कुछ ऐसे पदाधिकारियों को..जिन्होंने पीएम मोदी की अपील के बावजूद..अनावश्यक ताम झाम और शक्ति प्रदर्शन दिखाया..उनको सीएम डॉ मोहन यादव,प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी की फटकार भी खानी पड़ी..महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के साथ सभी शीर्ष नेताओं की वायरल तस्वीर इस बात का खुद प्रमाण दे रही कि..संगठन और सरकार के मुखिया किसी भी तरह की लापरवाही बर्दास्त नहीं करेंगे..यहां यह भी पाठ पढ़ाया गया कि..शक्ति प्रदर्शन से ज्यादा जिम्मेदारियों के निर्वहन में दक्षता ​दिखाएं..प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह चौहान ने संगठनात्मक अनुशासन और कार्यपद्धति पर विस्तार से सभी को मार्गदर्शन दिया..तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल को सफलता की कुंजी बताया..उनका जोर इस बात पर रहा कि पदाधिकारी केवल प्रशासनिक भूमिका तक सीमित न रहें, बल्कि संगठन की विचारधारा और कार्यशैली को भी व्यवहार में उतारें. मध्यप्रदेश भाजपा का यह मॉडल बताता है कि पार्टी अब सिर्फ सत्ता संचालन नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस आधारित गवर्नेंस को राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बना रही है..आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश, सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की अवधारणा को जमीन पर उतारने के लिए जवाबदेही तय की जा रही है..मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड और नवनियुक्त निगम-मंडल अध्यक्षों और पदाधिकारियों को अनुशासन के साथ सुशासन का पाठ पढ़ाने की यह कवायद..दिखाती है कि भाजपा नेतृत्व 2028 की तैयारी केवल राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि शासन की प्रभावशीलता, योजनाओं की डिलिवरी और जनता के भरोसे के आधार पर करना चाहती है..दरअसल, यही भाजपा की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत भी है कि वह सरकार, संगठन और प्रशासन..तीनों को एक साझा लक्ष्य के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास करती है..और इस पूरी कवायद के केंद्र में हैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जो संवेदनशील नेतृत्व, सुशासन और परिणाम आधारित राजनीति के जरिए मध्यप्रदेश की प्रशासनिक दक्षता को नई दिशा देने की कोशिश में जुटे हैं.

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