हंगामे के बीच संसद से VB–G RAM G और SHANTI बिल पारित
संसद के शीतकालीन सत्र में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB–G RAM G बिल और सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल तीखी नारेबाजी और विरोध के बीच दोनों सदनों से पारित हो गए। इन विधेयकों पर लंबी बहस, विपक्ष का वॉकआउट और नाम बदलने से लेकर निजीकरण तक कई मुद्दों पर टकराव देखने को मिला।
VB–G RAM G बिल: मनरेगा की जगह नया कानून
लोकसभा और राज्यसभा दोनों ने ध्वनिमत से VB–G RAM G बिल को मंजूरी दे दी, जो लगभग 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREG Act) की जगह लेगा। लोकसभा में बुधवार को इस पर करीब 14 घंटे चर्चा हुई, जबकि राज्यसभा में गुरुवार की देर रात लगभग 12 बजे तक बहस चली और बिल रात 12:30 बजे के आसपास पारित हुआ।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दोनों सदनों में विधेयक पेश करते हुए विपक्ष के सवालों के जवाब दिए। बहस के दौरान विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी की, वेल में आकर कागज फाड़कर फेंके और बिल को स्थायी समिति या संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की। स्पीकर ने यह कहते हुए मांग अस्वीकार कर दी कि विधेयक पर पहले ही 14 घंटे से अधिक बहस हो चुकी है।
सरकार का पक्ष: नाम की राजनीति और रोजगार की गारंटी
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मनरेगा का नाम शुरुआत में महात्मा गांधी के नाम पर नहीं था, बल्कि यह पहले NREGA था और 2009 के चुनाव के समय वोट की राजनीति के चलते उसमें महात्मा गांधी का नाम जोड़ा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कई योजनाओं का नाम नेहरू-गांधी परिवार पर रखा और नाम बदलने की राजनीति उसी की "सनक" है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा में हुई कई कमियों और भ्रष्टाचार को दूर करने की कोशिश की है।
बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने दावा किया कि VB–G RAM G बिल ग्रामीण गरीबों को पूरे साल रोजगार सुनिश्चित करने की दिशा में कदम है। उनके अनुसार, जहां MGNREGA 100 दिन के रोजगार की गारंटी देता था, वहीं नए बिल में 125 दिन के रोजगार की गारंटी का प्रावधान है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस बिल पर 1970 के बाद पहली बार सदन में 14 घंटे से अधिक चर्चा हुई।
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने तर्क दिया कि संविधान का हवाला देते हुए राष्ट्रपिता सहित बड़ी हस्तियों के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और महात्मा गांधी के नाम पर योजना चलाना अनुचित है। उन्होंने MGNREGA को "भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा" बताया और कहा कि कांग्रेस को इस बात की चिंता है कि अब वह गांधी के नाम पर पैसा नहीं कमा पाएगी।
विपक्ष के आरोप: गरीब विरोधी कानून और गांधी का अपमान
विपक्ष ने आरोप लगाया कि VB–G RAM G बिल केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण गरीबों के काम के अधिकार को कमजोर करता है। राज्यसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह काम के अधिकार की लड़ाई है और गरीबों के अधिकार छीने जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जैसे तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े, भविष्य में इस कानून के खिलाफ भी बड़ा आंदोलन हो सकता है और वे इसे सड़क पर उतरकर हर ज़िले में चुनौती देंगे।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने आरोप लगाया कि सरकार महात्मा गांधी का अपमान कर रही है और महात्मा गांधी तथा भगवान राम के बीच अनावश्यक भेद पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि MGNREGA ने करोड़ों गरीबों को सामाजिक सुरक्षा का सेफ्टी नेट दिया है, लेकिन नए विधेयक में रोजगार की गारंटी को हटाने की बात दिखाई देती है।
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस बिल को गरीब, किसान, मजदूर और रोजगार विरोधी बताते हुए कहा कि इससे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा और इसे सिलेक्ट कमेटी को भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर अपने कृत्यों को सही ठहराना गलत है और यह रामराज्य की अवधारणा के खिलाफ है।
टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने भी पहले से मनरेगा का नाम बदलने और महात्मा गांधी को हटाने का विरोध दर्ज कराया था। मनरेगा से जुड़े विवाद पर कांग्रेस और अन्य दलों ने इसे गांधी के आदर्शों के खिलाफ कदम बताया, जबकि सरकार ने खुद को गांधी की विचारधारा का समर्थक बताते हुए भेदभाव के आरोपों को खारिज किया।
SHANTI बिल: परमाणु ऊर्जा पर नया ढांचा
VB–G RAM G बिल के अलावा राज्यसभा ने सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल भी ध्वनिमत से पारित किया। यह विधेयक परमाणु ऊर्जा के सतत उपयोग, सुरक्षा, लाइसेंसिंग, जवाबदेही और मुआवजे को एकीकृत ढांचे में लाने का प्रयास करता है। इससे पहले लोकसभा ने भी 2025 से जुड़े शांति विधेयक को पारित किया था, हालांकि उस समय विपक्ष ने इसे संसदीय स्थायी समिति को भेजने की मांग की और मांग न माने जाने पर वॉकआउट किया।
राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस बिल पर एक साल से अधिक समय तक विचार-विमर्श हुआ है और तकनीक में आए बदलावों को ध्यान में रखकर इसे लाया गया है। उन्होंने बताया कि अब छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की दिशा में काम हो रहा है, जो घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बिजली उपलब्ध कराएंगे। उनके अनुसार भारत के परमाणु संयंत्र भूकंपीय क्षेत्रों से दूर स्थित हैं, इसलिए सुरक्षा को लेकर विशेष चिंता की आवश्यकता नहीं है।
बीजेपी सांसद किरण चौधरी ने SHANTI बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यह पुराने बिखरे हुए नियमों को हटाकर लाइसेंसिंग, सुरक्षा मंजूरी, जवाबदेही और मुआवजे को कवर करने वाला एक समग्र ढांचा प्रदान करता है। उन्होंने इसे लंबे समय से चली आ रही नीतिगत गतिरोध समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि विपक्ष निजीकरण को लेकर अनावश्यक हंगामा कर रहा है।
कांग्रेस के जयराम रमेश ने बिल पर चर्चा के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका पर जोर दिया और कहा कि यदि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में निजी क्षेत्र को अत्यधिक अधिकार दे दिए गए तो यह डॉ. होमी भाभा और विक्रम साराभाई जैसे वैज्ञानिकों की मान्यताओं के विपरीत होगा। उन्होंने भारत की थोरियम संपदा, दूसरे चरण की प्रगति में रुकावट और ऊर्जा सुरक्षा के लिए थोरियम उपयोग की आवश्यकता पर विस्तार से बात की। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि निजी कंपनियों को विदेशी तकनीक आयात करने के बजाय देश के भीतर उपलब्ध वैज्ञानिक क्षमता पर भरोसा करना चाहिए।
रूस में भारतीयों की मौत और लापता होने का मुद्दा
राज्यसभा में गुरुवार को रूस की सेना में काम कर रहे भारतीयों की स्थिति पर भी जानकारी दी गई। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि रूसी सेना में काम करने वाले 26 भारतीयों की मौत हो चुकी है और 7 लापता हैं। सरकार लगभग 50 भारतीयों की जल्द रिहाई के लिए प्रयासरत है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार 10 मृतकों के शव भारत वापस लाए गए हैं, जबकि दो का अंतिम संस्कार स्थानीय स्तर पर किया गया। 18 मृत या लापता भारतीयों के परिजनों के डीएनए नमूने रूसी अधिकारियों को भेजे गए हैं ताकि पहचान की पुष्टि हो सके।
वायु प्रदूषण पर संसद में चिंता
सत्र के दौरान वायु प्रदूषण का मुद्दा भी लगातार उठता रहा। दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में खराब वायु गुणवत्ता का हवाला देते हुए कांग्रेस सहित कई दलों ने विस्तृत चर्चा की मांग की। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि दिल्ली की जनता गैस चैंबर जैसी स्थिति में फंसी है और सांस लेना मुश्किल हो गया है। समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने सुझाव दिया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रत्येक व्यक्ति के पास केवल एक कार हो और पेट्रोल-डीजल की खपत सीमित की जाए।
लोकसभा में वायु प्रदूषण पर चर्चा विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मांग पर निर्धारित की गई, जिसमें उन्होंने बच्चों की सेहत पर गंभीर प्रभाव का मुद्दा उठाते हुए एक व्यवस्थित राष्ट्रीय योजना की आवश्यकता पर जोर दिया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को इस बहस का जवाब देना है।
अन्य घटनाएं और राजनीतिक माहौल
VB–G RAM G बिल पर बहस के बीच उत्तराखंड से बीजेपी सांसद अजय भट्ट की एक टिप्पणी का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वे धार्मिक जप को निजी समस्याओं के समाधान के रूप में बताते नजर आए और सदन में मौजूद कुछ सांसद हंसते हुए दिखाई दिए।
शीतकालीन सत्र के दौरान अलग-अलग दिनों में चुनाव सुधार, वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांٹھ, ई-सिगरेट विवाद, प्रदूषण, न्यायपालिका पर टिप्पणी, और प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी जैसे मुद्दों पर भी तीखे बयान और हंगामे दर्ज हुए। सरकार और विपक्ष के बीच कई बार आरोप-प्रतिआरोप का दौर चला और कई विधेयकों को स्थायी समिति को भेजने की मांग बार-बार उठती रही, जिन्हें सरकार ने प्रायः अस्वीकार किया।
सत्र के 14वें दिन, VB–G RAM G और SHANTI जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने के साथ-साथ, ग्रामीण रोजगार के अधिकार, महात्मा गांधी की विरासत, परमाणु ऊर्जा नीति, विदेश में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और पर्यावरणीय संकट जैसे कई संवेदनशील मुद्दे एक साथ संसद की बहस के केंद्र में रहे।
Faraz Khan