ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी औरईंधन बचाने की कोशिशें
पेट्रोल-डीजल की कीमतों मेंएक बार फिर बढ़ोतरीकी गई है। पेट्रोल के दाम 87 पैसे और डीजल के दाम 91 पैसे प्रति लीटर बढ़े हैं। नई दरें लागू होने के बाद लखनऊ में पेट्रोल 99.26 रुपए और डीजल 92.63 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है। महज 9 दिनों के भीतर ईंधन की कीमतों में तीसरी बार बढ़ोतरी हुई है।
महाराजगंजमेंईंधन की किल्लत
महाराजगंज में कई पेट्रोल पंपों पर पांचवें दिन भी लाइन है। लोग बड़े-बड़े कंटेनर लेकर पहुंच रहे हैं। रात के वक्त लोग पंपों के बाहर मच्छरदानी लगाकर सो रहे हैं। ताकि सुबह पंप खुलते ही डीजल ले सकें। एक पंप पर शुक्रवार देर रात डीजल न मिलने पर किसानों ने पंप कर्मचारियों को पीट दिया।
ऊर्जा संकटसे निपटने केप्रयास
यूपी में पीएम मोदी की ईंधन बचाने की अपील के बीच प्रतापगढ़ के जिला जज राजीव कमल पांडे समेत सभी न्यायिक अधिकारी एक किलोमीटर पैदल चलकर कोर्ट पहुंचे। वहीं, शाहजहांपुर की कटरा सीट से भाजपा विधायक वीर विक्रम सिंह उर्फ प्रिंस अपनी फॉर्च्यूनर छोड़कर घोड़े पर सवार होकर कार्यक्रम में जा रहे हैं। उनका गनर भी उनके साथ दूसरे छोड़े पर चल रहा है।
सरकारी फैसले
ऊर्जा संकट को देखते हुए योगी सरकार ने 21 मई को सरकारी अधिकारियों की गैर-जरूरी विदेश यात्राओं पर 7 महीनों के लिए रोक लगा दी है। साथ ही शहरों में 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में साइकिल चलाने के लिए अलग ट्रैक बनाने को कहा है। ऐसे ही 10 साल से पुराने सरकारी वाहनों, जनरेटर और दफ्तरों की बिजली खपत की जांच कराई जाएगी। इससे पहले, योगी सरकार ने पिछले हफ्ते मंगलवार को 7 बड़े फैसले लिए थे। मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और अफसरों का काफिला 50% तक घटा दिया जाएगा। हफ्ते में एक दिन इन्हें पब्लिक ट्रांसपोर्ट या बस-मेट्रो से चलने को कहा गया। सभी सरकारी बैठकें, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस, वर्कशॉप वर्चुअल करने और राज्य सचिवालय की 50% बैठकें वर्चुअल कराने का फैसला लिया गया था। सीएम ने कहा था कि जिन कंपनियों में बड़ी संख्या में कर्मचारी हैं, उन्हें सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम के लिए राज्य स्तर पर एडवाइजरी जारी की जाए।
प्रधानमंत्री की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 और 11 मई को सार्वजनिक मंच से कहा था कि आज के समय में पेट्रोल-डीजल और गैस का इस्तेमाल कम करना होगा। पड़ोस में चल रहे युद्ध के असर से दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल के दाम कई गुना बढ़ गए हैं। भारत पर इस वैश्विक संकट का असर ज्यादा है। हमारे पास तेल के बड़े कुएं नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि आज हमें वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों की जरूरत है। जिन शहरों में मेट्रो है, वहां लोग मेट्रो का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि पहले जब युद्ध होता था लोग सोना दान में दे देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है, लेकिन हमें आज ये संकल्प लेना होगा कि अगले 1 साल तक कोई भी कार्यक्रम हो, सोना न खरीदें। इससे विदेशी मुद्रा भी बचेगी।
Navjeet Kaur