ईरान का भारत को होर्मुज में सुरक्षित रास्ता देने का ऐलान, ओमान में 2 भारतीयों की मौत

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ईरान  का  भारत  को  होर्मुज  में  सुरक्षित रास्ता  देने का ऐलान, ओमान में  2 भारतीयों  की मौत

ईरान ने भारत को होर्मुज में सुरक्षित रास्ता देने का ऐलान किया; ओमान में ड्रोन हमले में 2 भारतीयों की मौत

ईरान का भारत को सुरक्षित रास्ता देने का आश्वासन और ओमान में दुखद घटना

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने घोषणा की है कि ईरान भारत को होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित रास्ता देने के लिए तैयार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से दोस्ताना संबंध और आपसी विश्वास रहा है। फतहाली ने नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि भारत को यह सुरक्षित रास्ता 'दो-तीन घंटे' के भीतर उपलब्ध हो जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जिससे खाड़ी देशों का अधिकांश तेल और गैस दुनिया भर में पहुँचता है।

इसी बीच, ओमान के सोहर प्रांत में एक ड्रोन हमले में दो भारतीय कामगारों की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य भारतीय घायल हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि सुरक्षा बलों द्वारा एक ड्रोन को मार गिराने के बाद उसके मलबे के गिरने से यह हादसा हुआ। भारतीय अधिकारी स्थानीय प्रशासन और कंपनी के साथ मिलकर घायलों को सहायता और मृतकों के पार्थिव शरीर को भारत भेजने की प्रक्रिया में मदद कर रहे हैं।

ईरान के सुप्रीम लीडर की स्थिति और वैश्विक प्रभाव

कई मीडिया रिपोर्ट्स, जिनमें ब्रिटिश मीडिया 'द सन' भी शामिल है, दावा कर रही हैं कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई 28 फरवरी के अमेरिकी-इजरायल हमले में गंभीर रूप से घायल होकर कोमा में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चोट इतनी गहरी थी कि उनका एक पैर काटना पड़ा और उनके लिवर को भी गंभीर नुकसान हुआ है। हालांकि, ईरान के अधिकारियों ने इन दावों को खंडित करते हुए कहा है कि खामेनेई घायल जरूर हुए हैं, लेकिन वह सुरक्षित हैं और धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। उन्हें 9 मार्च को अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद सुप्रीम लीडर बनाया गया था।

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे इस संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो गया है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने मार्च में औसत तेल कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रहने का अनुमान लगाया है। भारत सहित कई देशों ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए विभिन्न आपातकालीन कदम उठाए हैं, जैसे ईंधन की खपत कम करना, रिजर्व से तेल निकालना और वर्क-फ्रॉम-होम जैसे उपाय लागू करना। भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि यह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य-पूर्व पर अत्यधिक निर्भर है, और खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस पर भी असर पड़ सकता है।

सैन्य कार्रवाई, राजनीतिक बयान और राजनयिक प्रयास

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान में 15,000 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं और आगे भी अभियान तेज किया जाएगा। वहीं, इजरायल ने ईरान के कई इलाकों में 200 से अधिक ठिकानों पर हमला करने का दावा किया है। इराक ने सुरक्षा चिंताओं के कारण अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है, जबकि सऊदी अरब और तुर्की ने अपने हवाई क्षेत्र में घुसने वाले ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के जल्द आत्मसमर्पण करने की बात कही है और कहा है कि ईरान के सरकारी लोगों को मारना उनके लिए 'बहुत बड़ा सम्मान' है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इजरायल और हिजबुल्लाह से तुरंत युद्ध रोकने की अपील की है, वहीं संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने अमेरिकी-इजरायल हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। जर्मनी ने खुद को इस युद्ध से अलग रखने की बात कही है। इस बीच, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री से चौथी बार फोन पर बात की और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव पर चर्चा की।

संघर्ष के बावजूद, भारत के लिए एक सकारात्मक खबर आई है: युद्ध शुरू होने के बाद गुरुवार को पहली बार होर्मुज स्ट्रेट से होकर एक तेल टैंकर (लाइबेरिया का झंडा लिए "सीलिन एक्सप्रेस") सुरक्षित तरीके से मुंबई पहुंचा, जिससे तेल आपूर्ति की चिंता कुछ हद तक कम हुई है। यह जहाज 1.35 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर आया था और सुरक्षा कारणों से होर्मुज से गुजरते समय इसका AIS सिस्टम बंद कर दिया गया था।

ईरान ने दावा किया है कि अमेरिकी और इजरायल के हमलों से देश में लगभग 24,531 नागरिक इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। वहीं, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की सत्ता अभी भी मजबूत है और उसके जल्द गिरने का कोई खतरा नहीं है, भले ही 50 से अधिक शीर्ष अधिकारी मारे गए हों और सुप्रीम लीडर घायल हों। ईरान का दावा है कि वह एक खास रणनीतिक ढांचे के साथ लंबे समय तक युद्ध लड़ सकता है।

Ravi Yadav