ईरान का भारत को होर्मुज में सुरक्षित रास्ता, ओमान में ड्रोन हमले से 2 भारतीयों की मौत
ईरान ने भारत को होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित रास्ता देने की घोषणा की है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर जारी चिंताओं के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत मिली है। वहीं, ओमान के सोहर प्रांत में एक ड्रोन हमले में दो भारतीय कामगारों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए। इस बीच, ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की हालत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, जबकि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले जारी हैं।
होर्मुज स्ट्रेट में भारत के लिए सुरक्षित रास्ता और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि ईरान भारत को होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित रास्ता देने के लिए तैयार है। उन्होंने भारत और ईरान के बीच दोस्ताना संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि यह सुविधा 'दो-तीन घंटे में' उपलब्ध हो जाएगी। ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बाद होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो गया था, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। इस बीच, लाइबेरिया के झंडे वाला एक तेल टैंकर 'सीलिन एक्सप्रेस' 13.5 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर सुरक्षित मुंबई पहुंचा, जो संघर्ष के बाद इस मार्ग से भारत आने वाला पहला बड़ा जहाज है। सुरक्षा कारणों से इस जहाज का एआईएस सिस्टम (जहाज की लोकेशन बताने वाला सिस्टम) होर्मुज के इलाके से गुजरते समय बंद कर दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ईरान के नेतृत्व से बातचीत में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। संघर्ष के कारण ईरान से लगभग 170 भारतीय नागरिक जमीन के रास्ते आर्मेनिया पहुंचे हैं, जिनमें से कुछ भारत लौट चुके हैं और बाकी जल्द लौटेंगे।
ओमान में ड्रोन हमला और भारतीय हताहत
ओमान के सोहर प्रांत में हुए ड्रोन हमले में दो भारतीय कामगारों की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य भारतीय घायल हुए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस घटना की पुष्टि की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा बलों द्वारा एक ड्रोन को मार गिराने के बाद उसके मलबे के गिरने से यह हादसा हुआ। भारतीय अधिकारी स्थानीय प्रशासन और संबंधित कंपनी के साथ संपर्क में हैं, ताकि घायलों को हर संभव मदद दी जा सके और मृतकों के पार्थिव शरीर को भारत भेजने की प्रक्रिया में भी सहायता की जा सके।
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की हालत पर दावे
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कई मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग दावे किए गए हैं। ब्रिटिश मीडिया द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले में घायल होने के बाद उन्हें तेहरान के सिना यूनिवर्सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वे गंभीर रूप से घायल हैं, कोमा में हैं, उनका एक पैर काटना पड़ा है और उनके लिवर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। अस्पताल के एक हिस्से को पूरी तरह सील कर दिया गया है और वहां भारी सुरक्षा तैनात है। हालांकि, ईरान के अधिकारियों ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा है कि मुजतबा खामेनेई हमले में घायल जरूर हुए थे, लेकिन वे सुरक्षित हैं और धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। साइप्रस में ईरान के राजदूत अलीरेजा सलारियन ने बताया कि उन्हें पैरों, हाथ और बांह में चोट लगी है और इसी वजह से वे अस्पताल में हैं, लेकिन उनकी हालत सार्वजनिक रूप से आकर भाषण देने लायक नहीं है। इजराइली सेना (आईडीएफ) ने भी उनके सार्वजनिक रूप से सामने न आने पर सवाल उठाए हैं।
ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष और वैश्विक प्रभाव
अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर लगातार हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने घोषणा की है कि अमेरिका ईरान पर अब तक के सबसे ज्यादा हवाई हमले करेगा और युद्ध में दबाव बनाए रखेगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों में ईरान के लगभग 6,000 ठिकाने और 90 से अधिक जहाज क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुके हैं। इजराइल ने भी ईरान के 200 से ज्यादा ठिकानों पर हमला करने का दावा किया है, जिसमें कई परमाणु वैज्ञानिक मारे गए। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान को हर तरह से कमजोर कर रहा है और ईरान जल्द ही सरेंडर करने वाला है। उन्होंने ईरान पर किए गए हमलों को 'बहुत बड़ा सम्मान' बताया।
इस संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट के प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं, और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि हालात बिगड़े तो कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। गोल्डमैन सैक्स जैसे निवेश बैंकों ने भी तेल की कीमतों के अपने अनुमान बढ़ा दिए हैं। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर बहुत निर्भर हैं, ईंधन की कमी और बढ़ती महंगाई के खतरे का सामना कर रहे हैं। खाड़ी देशों में काम करने वाले लगभग 91 लाख भारतीय हर साल भारत को लगभग 50 अरब डॉलर भेजते हैं, और अगर संघर्ष बढ़ता है तो इस रेमिटेंस में कमी आ सकती है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। कई देशों ने ईंधन की कमी से निपटने के लिए आपातकालीन कदम उठाए हैं, जिनमें रिजर्व से तेल निकालना, खपत कम करना और नए ऊर्जा स्रोत तलाशना शामिल है।
अन्य प्रमुख घटनाक्रम
इराक की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने सुरक्षा हालात के मद्देनजर देश का एयरस्पेस बंद रखने का ऐलान किया है। इराक में पश्चिमी हिस्से में अमेरिकी एयरफोर्स का एक KC-135 रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 6 में से 4 क्रू मेंबर्स की मौत हो गई। जर्मनी ने साफ किया है कि वह ईरान से जुड़े युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहता। सऊदी अरब ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा 56 ड्रोन मार गिराने का दावा किया है। तुर्किये के हवाई क्षेत्र में घुसी ईरान से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को नाटो एयर डिफेंस सिस्टम ने इंटरसेप्ट कर लिया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इजराइल और हिजबुल्लाह से तुरंत युद्ध रोकने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र के 12 मानवाधिकार विशेषज्ञों ने अमेरिका और इजराइल के हमलों की आलोचना की है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। चीन ने युद्ध में मारे गए छात्रों के परिवारों की मदद के लिए ईरान को 2 लाख डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजराइल के लगातार हवाई हमलों के बावजूद ईरान की सत्ता मजबूत बनी हुई है और उसके जल्द गिरने का कोई खतरा नहीं है। हालांकि, तेल की कीमतों में इजाफे की वजह से राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जल्द जंग खत्म करने का संकेत दिया है, लेकिन ईरान के कट्टरपंथी नेताओं के सत्ता में बने रहने से युद्ध समाप्त करना आसान नहीं होगा।
Amit Pateria