इंदौर में दूषित पानी से मौतें, सरकारी आंकड़ों पर उठे सवाल
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदे पानी की सप्लाई से लोगों की मौत और बीमारियों का सिलसिला जारी है। सरकारी और स्थानीय आंकड़ों के बीच विरोधाभास, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की दखल और जनता के गुस्से ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
सरकार की रिपोर्ट बनाम जमीनी हकीकत
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में कहा गया कि अब तक केवल चार लोगों की मौत गंदे पानी के कारण हुई है। दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर 15 मौतों की पुष्टि सामने आ चुकी है, जिससे सरकारी दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
इसी मामले में एक हस्तक्षेप याचिका भी दाखिल की गई है, जिसमें मांग की गई है कि मीडिया में छप रही खबरों पर रोक लगाई जाए। इस दौरान अदालत में सुनवाई जारी है और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की चर्चा भी तेज है।
NHRC की नोटिस और स्वास्थ्य विभाग की पुष्टि
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है, जिसमें पूरी घटनाक्रम और कार्रवाई का विवरण मांगा गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया गया कि दूषित पानी ही मौतों और बीमारियों की मुख्य वजह है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी ने बताया कि जांच में साबित हुआ है कि गंदा पानी पीने से लोग बीमार पड़े और कई की जान चली गई। कलेक्टर ने कल्चर टेस्ट की विस्तृत रिपोर्ट आने तक अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की बात कही है।
लीकेज, सीवेज और घातक बैक्टीरिया
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी स्वीकार किया कि भागीरथपुरा क्षेत्र की पेयजल लाइन में सीवेज का पानी मिलने से हालात बिगड़े हैं। उनका कहना है कि चौकी के पास पाइपलाइन की लीकेज वाली जगह मुख्य संदिग्ध बिंदु है, जहां से गंदा पानी सप्लाई लाइन में घुसा होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार ड्रेनेज के पानी में मल-मूत्र, नहाने का पानी, कपड़े और बर्तन धोने के साबुन-पाउडर, फर्श साफ करने वाले केमिकल तथा औद्योगिक कचरा मिलकर बेहद खतरनाक मिश्रण बनाते हैं। जब यह मिश्रण पेयजल लाइन में प्रवेश करता है, तो पानी में शिगेला, साल्मोनेला, हैजा पैदा करने वाले बैक्टीरिया और ई-कोलाई जैसे सूक्ष्मजीव विकसित हो जाते हैं, जो गंभीर आंत्र संक्रमण और मौत तक का कारण बन सकते हैं।
बीमारी का फैलाव और अस्पतालों की स्थिति
दूषित पानी से प्रभावित क्षेत्र में बीमारी का दायरा तेजी से बढ़ा है। 16 बच्चों सहित 201 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। अब तक कुल 272 मरीजों को भर्ती किया गया, जिनमें से 71 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। फिलहाल 201 मरीज इलाजरत हैं और 32 की हालत नाजुक है, जिन्हें आईसीयू में रखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गुरुवार को 1714 घरों का सर्वे किया और 8571 लोगों की जांच की। कई मरीजों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मंत्री के दौरे पर जनता का गुस्सा
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय गुरुवार सुबह भागीरथपुरा पहुंचे, जहां मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा चेक देने की योजना थी। लेकिन कई परिजनों ने खुले तौर पर चेक लेने से इनकार कर दिया और आरोप लगाया कि वर्षों से गंदे पानी की शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में महिलाएं मंत्री के सामने नाराजगी जाहिर करती दिखीं। एक महिला ने कहा कि दो साल से गंदा पानी आ रहा है और पार्षद को बार-बार शिकायत की गई, पर कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी वीडियो साझा कर सरकार पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि मंत्री लोगों की बात सुनने के बजाय आगे बढ़ गए।
परिजनों की पीड़ा और इलाज की चुनौतियां
भागीरथपुरा की एक महिला, निधि यादव, अपनी सास के इलाज में हो रही दिक्कतों को लेकर भावुक हो उठीं। उनकी 70 वर्षीय सास सात दिन से अस्पताल में भर्ती हैं और किडनी फेल जैसी गंभीर स्थिति में हैं। निधि के अनुसार अस्पताल इलाज के लिए स्लिप देकर पैसे मांग रहा है, जबकि परिवार पहले ही संकट में है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मरीज की जान चली गई तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा और क्या मुआवजे की राशि से जान वापस आ सकती है।
प्रशासनिक जांच और भविष्य की कार्रवाई
दूषित पानी सप्लाई की गड़बड़ी की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव संजय दुबे इंदौर पहुंचे। उन्होंने उस स्थान का निरीक्षण किया, जहां से गंदा पानी पेयजल लाइन में मिलने की आशंका है। इसके बाद नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने पूरे शहर में पेयजल की रैंडम सैंपलिंग करने और किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।
दुबे ने स्पष्ट किया कि पेयजल से जुड़े मामलों को लंबित न रखा जाए और जनहित को प्राथमिकता देते हुए तुरंत निर्णय लिए जाएं। वे पूरी जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजेंगे, जिसमें यह बताया जाएगा कि कहां चूक हुई और किन अधिकारियों या तंत्र की जिम्मेदारी बनती है।
स्थानीय मांगें और आधारभूत समाधान
इंदौर के सांसद शंकर लालवानी और पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। स्थानीय नागरिकों ने साफ पेयजल के लिए अतिरिक्त बोरिंग की मांग की। इस पर सांसद ने अपनी निधि से 10 नई बोरिंग स्वीकृत करने की घोषणा की और तुरंत काम शुरू कराने की जानकारी दी।
निष्कर्ष: जवाबदेही और सुरक्षित पेयजल की चुनौती
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और बीमारियों ने पेयजल व्यवस्था की बड़ी खामियों को उजागर कर दिया है। सरकारी आंकड़े और जमीनी हकीकत में अंतर, चिकित्सा सुविधाओं की कमी, जनता का गुस्सा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप सब मिलकर इस त्रासदी को और गंभीर बना रहे हैं।
अब मुख्य सवाल यह है कि जांच के बाद वास्तविक जिम्मेदारों पर कितनी सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जल आपूर्ति प्रणाली, सीवेज प्रबंधन और निगरानी तंत्र में कितने ठोस सुधार किए जाएंगे। सुरक्षित पेयजल की गारंटी ही इस दुखद घटना से निकला सबसे बड़ा सबक और प्रशासन के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है।
Ravi Yadav