इंदौर में 20 मौतें दिग्विजय का हमला, हाईकोर्ट जज से जांच की मांग

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इंदौर में 20 मौतें दिग्विजय का हमला, हाईकोर्ट जज से जांच की मांग

इंदौर में 20 मौतों पर सियासी संग्राम, न्यायिक जांच की मांग तेज

दिग्विजय सिंह ने प्रभारी मुख्यमंत्री पर उठाए सवाल

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इंदौर में कथित तौर पर गंदा पानी पीने से हुई 20 मौतों को शहर के लिए कलंक बताया। उन्होंने कहा कि इंदौर उनका बचपन का शहर है, राज्य की आर्थिक राजधानी और देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, ऐसे में इस तरह की मौतें स्वीकार्य नहीं हैं। दिग्विजय का आरोप है कि जब तक मौतों की संख्या 2 से 4 के बीच रही तब तक सिस्टम निष्क्रिय रहा, लेकिन जैसे ही संख्या बढ़ी, जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की कोशिश शुरू हो गई। मंत्री अधिकारियों पर, अधिकारी मेयर पर और मेयर पूरी व्यवस्था पर दोष मढ़ते रहे।

दिग्विजय सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि मध्य प्रदेश के प्रभारी मुख्यमंत्री लगभग हर दूसरे दिन इंदौर आते हैं, फिर वे केवल मुआवजा देकर चुप क्यों हो गए। उनके अनुसार कुछ तबादले और मुआवजा न तो मृतकों की जान लौटा सकते हैं और न ही शहर के माथे से कलंक मिटा सकते हैं।

हाईकोर्ट के सिटिंग जज से न्यायिक जांच की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि जांच हाईकोर्ट के किसी सिटिंग जज से कराई जाए और पब्लिक हियरिंग भी हो। दिग्विजय सिंह का कहना है कि गलती पर पर्दा डालना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करना ही वास्तविक इंसाफ होगा।

जीतू पटवारी का पत्र: प्रशासनिक नहीं, शासन की विफलता

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर की जनता के नाम पत्र लिखकर इस घटना को मात्र प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि शासन की विफलता बताया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए दुनिया में पहचान बनाने वाला इंदौर आज जहरीले पानी से हुई मौतों के कारण शर्मिंदगी का कारण बन गया है। पटवारी ने अपने पत्र में सिस्टम की नाकामी और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

उमंग सिंघार ने स्वच्छता अवॉर्ड और वाटर ऑडिट पर उठाए प्रश्न

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर की घटना को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि उन्होंने देश के सबसे साफ शहर कहे जाने वाले इंदौर का वाटर ऑडिट कराया और पानी की वास्तविक स्थिति पर एक शॉर्ट फिल्म भी बनवाई, जिसका प्रदर्शन किया गया। सिंघार ने कहा कि इंदौर की घटना के लिए जिम्मेदार कोई भी जवाबदारी लेने को तैयार नहीं है और सरकार की नाकामियों ने नर्मदा नदी तक को दूषित कर दिया है।

सिंघार ने यह आरोप भी लगाया कि देश में हिंदू-मुस्लिम का माहौल बनाकर असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि इंदौर को आठ बार मिले स्वच्छता अवॉर्ड पर भी संदेह है और कागजों में गड़बड़ी तथा फर्जीवाड़ा हुआ है। उनके अनुसार प्रशासन की निष्पक्षता खत्म हो गई है और कांग्रेस नेताओं को पीड़ितों से मिलने से रोका गया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार मौतों के आंकड़े और मुआवजा राशि को छुपाना चाहती है।

करप्शन के आरोप और सिस्टम पर सीधा हमला

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि हजारों करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हो रहा है और टेंडर निकलने के बाद भी ढाई साल तक काम में देरी हुई। उन्होंने सवाल किया कि क्या कमीशन तय नहीं हो पा रहा था। सिंघार ने नगरीय प्रशासन मंत्री, मेयर और मुख्यमंत्री से पूछा कि इस दौरान वे क्या कर रहे थे, जबकि बोरिंग से भी दूषित पानी निकलने की शिकायतें हैं। उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय और प्रभारी मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाया।

कांग्रेस की गंदे पानी की प्रदर्शनी और स्वास्थ्य पर चिंता

इंदौर में कांग्रेस ने कई इलाकों से लिए गए गंदे पानी के नमूनों की प्रदर्शनी लगाई। पार्टी ने चेतावनी दी कि भागीरथपुरा जैसी घटना अन्य क्षेत्रों में भी हो सकती है। कांग्रेस के अनुसार नगर निगम के पानी का पीएच स्तर 9 से ऊपर जा रहा है, जो चिंताजनक है, और दूषित पानी के कारण इंदौर के लोगों की किडनी संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।

निष्कर्ष: जवाबदेही और पारदर्शी जांच की मांग

इंदौर में गंदे पानी से जुड़ी मौतों के मामले ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। कांग्रेस नेताओं ने सरकार, प्रशासन और स्थानीय निकायों से पारदर्शिता, न्यायिक जांच और स्पष्ट जवाबदेही की मांग की है। वहीं, स्वच्छता अवॉर्ड, वाटर ऑडिट और भ्रष्टाचार के आरोपों ने इस पूरे मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। अब नजर इस पर है कि सरकार जांच और जवाबदेही को लेकर क्या ठोस कदम उठाती है।

Sachin Saxena