इंडिगो फ्लाइट संकट गहराया, सरकार ने नियमों से दी राहत

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इंडिगो फ्लाइट संकट गहराया, सरकार ने नियमों से दी राहत

इंडिगो फ्लाइट संकट: हजारों यात्री फंसे, सरकार ने नियमों में दी अस्थायी राहत

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो पिछले कुछ दिनों से गंभीर परिचालन संकट से जूझ रही है। भारी संख्या में उड़ानें रद्द होने से देशभर के कई एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। केंद्र सरकार और डीजीसीए को हस्तक्षेप कर फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन से जुड़े नए नियमों में अस्थायी ढील देनी पड़ी है।

चार दिन में 1700 से ज्यादा उड़ानें रद्द

पिछले चार दिनों में इंडिगो की 1700 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। सिर्फ एक दिन में ही करीब हजार उड़ानें नहीं उड़ीं। दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, जोधपुर, देहरादून, पंतनगर, इंदौर सहित कई प्रमुख एयरपोर्ट्स पर यात्री घंटों और कई मामलों में 24 घंटे से ज्यादा इंतजार करने को मजबूर रहे। बच्चों और बुजुर्गों ने रात कुर्सियों, फर्श और सीढ़ियों पर गुजारी।

कई जगह यात्रियों और एयरलाइन स्टाफ के बीच बहस और झड़प की स्थितियां दिखीं। दिल्ली एयरपोर्ट पर पानी, खाने और जरूरी सामान को लेकर सुरक्षाकर्मियों व कर्मचारियों के साथ तीखी नोकझोंक हुई।

डीजीसीए ने वीकली रेस्ट नियम में ढील दी

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन से जुड़े उन संशोधित नियमों में आंशिक राहत दी है, जिनके कारण क्रू की भारी कमी पैदा हो गई थी। नए नियमों के तहत पायलटों और क्रू को हर सप्ताह लगातार 48 घंटे का साप्ताहिक विश्राम देना अनिवार्य किया गया था। इसे 1 नवंबर से दूसरे चरण में लागू किया गया, जिससे इंडिगो में स्टाफ की उपलब्धता अचानक घट गई।

डीजीसीए ने अब 10 फरवरी 2026 तक के लिए कुछ प्रावधानों को अस्थायी रूप से वापस लिया है। इंडिगो पहले ही डीजीसीए से अपने ए-320 बेड़े के लिए इन नियमों में छूट मांग चुकी थी और चेताया था कि संचालन सामान्य होने में तीन महीने लग सकते हैं।

नवंबर से चल रहा संकट, सैकड़ों उड़ानें रद्द

डीजीसीए के अनुसार, केवल नवंबर महीने में इंडिगो की 1232 उड़ानें रद्द हुईं, जिनमें से 755 के पीछे सीधे तौर पर संशोधित एफडीटीएल नियम कारण थे। क्रू की कमी और नए रोस्टर पैटर्न के चलते देरी और रद्दीकरण का सिलसिला लगातार बढ़ता गया।

कंपनी रोजाना लगभग 2300 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करती है, जो एयर इंडिया की तुलना में लगभग दोगुना ऑपरेशन है। ऐसे में 10 से 20 प्रतिशत उड़ानें भी प्रभावित होने का मतलब एक ही दिन में 200 से 400 फ्लाइट्स पर असर और हजारों यात्रियों के लिए परेशानी है।

किराए आसमान पर, यात्रियों की जेब पर भारी बोझ

इंडिगो की उड़ानें रद्द होने के बाद दूसरी एयरलाइंस के टिकट किरायों में जोरदार उछाल आया। ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म्स के अनुसार, दिल्ली से बेंगलुरु जैसे व्यस्त रूट पर 6 दिसंबर को सबसे सस्ती फ्लाइट का किराया 40 हजार रुपये से ज्यादा पहुंच गया, जबकि कुछ टिकट 80 हजार रुपये तक बिके। कई यात्रियों ने आरोप लगाया कि अन्य एयरलाइंस ने कुछ ही घंटों में किराया दोगुना से कई गुना बढ़ा दिया।

गोवा, दिल्ली, अहमदाबाद समेत कई जगहों पर यात्रियों ने बताया कि उनकी इंडिगो फ्लाइट बिना स्पष्ट जानकारी के पहले लगातार लेट हुई और फिर रद्द कर दी गई। न रहने की समुचित व्यवस्था की गई, न समय पर वैकल्पिक उड़ानों की स्पष्ट जानकारी दी गई। कई यात्रियों की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गईं और उन्हें अतिरिक्त होटल व टिकट खर्च सहना पड़ा।

सरकार का हस्तक्षेप और जांच के आदेश

नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने स्थिति पर नाराजगी जताते हुए उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। मंत्रालय ने सभी एयरलाइंस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फ्लाइट रद्द होने की स्थिति में यात्रियों को पूरा रिफंड स्वतः दिया जाए और फंसे यात्रियों के लिए होटल, खाना और अन्य जरूरी सुविधाओं की उचित व्यवस्था की जाए।

सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच के भी आदेश दिए हैं, ताकि संकट के कारणों और जिम्मेदारी की स्पष्ट पहचान हो सके। साथ ही, डीजीसीए ने इंडिगो से क्रू भर्ती, ट्रेनिंग, रोस्टर पुनर्गठन और सेफ्टी प्लान पर विस्तृत रोडमैप तैयार कर हर 15 दिन में प्रगति रिपोर्ट जमा करने को कहा है।

इंडिगो की सफाई और माफी

इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने बयान जारी कर फ्लाइट रद्द और देरी के कारण यात्रियों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि पूरा सिस्टम रिबूट की प्रक्रिया से गुजर रहा है और हालात सामान्य होने में समय लगेगा। कंपनी के अनुसार 10 से 15 दिसंबर के बीच उड़ान संचालन काफी हद तक सामान्य हो जाएगा।

कंपनी का तर्क है कि सख्त एफडीटीएल नियमों के अचानक लागू होने से उपलब्ध पायलटों और केबिन क्रू की संख्या में कमी आई, जबकि ऑपरेशन का पैमाना बहुत बड़ा है। हालांकि सरकार का कहना है कि एयरलाइन के पास नियम लागू होने से पहले तैयारी के लिए पर्याप्त समय था।

निष्कर्ष: यात्रियों की सुरक्षा बनाम सेवा निरंतरता की चुनौती

इंडिगो संकट ने भारतीय उड्डयन क्षेत्र की एक बड़ी कमजोरी उजागर कर दी है। एक ही एयरलाइन पर 60 प्रतिशत घरेलू उड़ानों का भार होने से किसी भी ऑपरेशनल झटके का असर सीधे लाखों यात्रियों तक पहुंचता है। यात्री सुरक्षा के लिए जरूरी नियमों और लगातार उड़ान सेवा बनाए रखने की जरूरत के बीच संतुलन बनाना नियामक और एयरलाइंस दोनों के लिए चुनौती बन गया है।

आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि इंडिगो और अन्य कंपनियां क्रू प्रबंधन, रोस्टर प्लानिंग और ग्राहक सेवा में क्या सुधार करती हैं, और सरकार किस तरह से दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाती है, ताकि भविष्य में इस तरह का व्यापक संकट दोबारा न उभरे।

Navjeet Kaur