मोदी-पुतिन 24 घंटे में 3 मुलाकात, रिश्ते और मजबूत

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मोदी-पुतिन 24 घंटे में 3 मुलाकात, रिश्ते और मजबूत

भारत-रूस शिखर सम्मेलन: रणनीतिक संबंधों में नई रफ्तार

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन ने करीब 24 घंटे में तीन बार मुलाकात की। इस दौरे में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, शिक्षा और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।

तीन मुलाकातें, गहरा राजनीतिक संदेश

पुतिन के आगमन पर प्रधानमंत्री मोदी ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया और दोनों एक ही गाड़ी से प्रधानमंत्री आवास पहुंचे, जहां प्राइवेट डिनर रखा गया। इसके बाद हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बैठक और फिर संयुक्त प्रेस वक्तव्य और इंडिया-रूस बिजनेस फोरम को संबोधित किया गया। इन बैठकों के माध्यम से दोनों नेताओं ने दिखाया कि भारत-रूस साझेदारी अभी भी प्राथमिकता में बनी हुई है।

डिफेंस डील की अटकलों के बीच फोकस अर्थव्यवस्था पर

यात्रा से पहले उम्मीद की जा रही थी कि लड़ाकू विमान या किसी बड़े रक्षा सौदे की घोषणा होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बजाय दोनों देशों ने 19 समझौतों और समझौता ज्ञापनों पर सहमति बनाई, जिनका मुख्य उद्देश्य व्यापार, शिप बिल्डिंग, सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, लॉजिस्टिक्स, समुद्री सहयोग, खाद्य सुरक्षा और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है।

रूसी पक्ष ने यह संकेत दिया कि सु-57 लड़ाकू विमान और एस-500 मिसाइल सिस्टम जैसे उन्नत रक्षा प्लेटफॉर्म पर बातचीत की जमीन मौजूद है, हालांकि इस दौर में किसी औपचारिक रक्षा सौदे की घोषणा नहीं हुई।

व्यापार, ऊर्जा और न्यूक्लियर सहयोग

पुतिन ने बताया कि पिछले तीन साल में द्विपक्षीय व्यापार में करीब 80 प्रतिशत वृद्धि हुई है और यह लगभग 64 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। दोनों नेताओं ने व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर से ऊपर ले जाने का लक्ष्य रखा और संकेत दिया कि यह लक्ष्य समय से पहले भी हासिल हो सकता है।

ऊर्जा सहयोग को भारत-रूस साझेदारी का मजबूत स्तंभ बताते हुए पुतिन ने भरोसा दिलाया कि रूस भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए स्थिर और निरंतर ईंधन आपूर्ति जारी रखेगा। कच्चे तेल, गैस और कोयले की सप्लाई के साथ-साथ आर्कटिक क्षेत्र की परियोजनाओं में भारत की भागीदारी पर भी जोर दिया गया।

सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र में कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट को दोनों देशों की फ्लैगशिप परियोजना के रूप में रेखांकित किया गया। पुतिन ने कहा कि छह रिएक्टरों में से तीन पहले ही भारत के एनर्जी नेटवर्क से जुड़ चुके हैं और बाकी तीन निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं।

नए कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स और ट्रेड रूट

मोदी और पुतिन ने कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स सुधारों को प्राथमिकता देते हुए इंटरनेशनल नॉर्थ–साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, नॉर्दर्न सी रूट और चेन्नई–व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर पर तेजी से काम आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। इन मार्गों के विकसित होने से ट्रांजिट समय और लागत में कमी के साथ नए बाजार खुलने की उम्मीद है।

डिजिटल तकनीक के माध्यम से कस्टम और रेगुलेटरी सिस्टम को वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर के जरिए जोड़ने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई, जिससे कस्टम क्लियरेंस तेज और कागजी कार्यवाही कम होने की संभावना है।

स्किल्ड भारतीय वर्कफोर्स और माइग्रेशन साझेदारी

रूस में कुशल कार्यबल की कमी को देखते हुए दोनों देशों ने माइग्रेशन और मोबिलिटी को सरल बनाने पर जोर दिया। मोदी ने कहा कि भारत दुनिया की स्किल्ड कैपिटल के रूप में उभर रहा है और यदि भारतीय युवा रूसी भाषा और सॉफ्ट स्किल्स में प्रशिक्षित हों, तो दोनों देश मिलकर रूस के लिए तैयार वर्कफोर्स विकसित कर सकते हैं।

इस दिशा में संभावित मोबिलिटी पैक्ट के माध्यम से लाखों भारतीय स्किल्ड वर्कर्स को रूस में रोजगार के अवसर मिलने की संभावना पर विचार हुआ। इसके साथ ही टूरिस्ट वीजा को आसान बनाने और 30 दिन के ई-टूरिस्ट तथा ग्रुप टूरिस्ट वीजा की सुविधा बढ़ाने पर भी निर्णय लिए गए, जो पर्यटन और सेवा क्षेत्र के लिए नए अवसर खोलेंगे।

शिक्षा और मीडिया में बढ़ता सहयोग

दिल्ली में रूसी एजुकेशन एजेंसी का पहला कार्यालय खोला गया, जिसका उद्देश्य भारतीय छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए रूस में अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। उम्मीद जताई गई कि रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्र भविष्य में दोनों देशों की टेक्नोलॉजी और इनोवेशन इंडस्ट्री के बीच पुल का काम करेंगे।

पुतिन ने आधिकारिक रूप से आरटी इंडिया चैनल लॉन्च किया और कहा कि इससे भारतीय दर्शकों को रूस और दुनिया से जुड़ी खबरें रूसी दृष्टिकोण से सीधे प्राप्त होंगी। उन्होंने इसे पश्चिमी मीडिया के प्रचार तंत्र से अलग एक वैकल्पिक सूचना स्रोत बताया।

सेक्टर-वाइज सहयोग के नए आयाम

इंडिया-रूस बिजनेस फोरम में मोदी ने फार्मा, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, ईवी, फर्टिलाइजर, सिरेमिक, सीमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में संभावनाओं को रेखांकित किया। भारत की दवा उद्योग क्षमता का उल्लेख करते हुए उन्होंने वैक्सीन विकास, कैंसर थेरेपी, रेडियोफार्मास्यूटिकल्स और एपीआई सप्लाई चेन में संयुक्त काम का सुझाव दिया।

टेक्सटाइल में भारत की डिजाइन और हैंडीक्राफ्ट विशेषज्ञता को रूस के उन्नत पॉलीमर व सिंथेटिक कच्चे माल के साथ जोड़कर मजबूत वैल्यू चेन बनाने पर भी जोर दिया गया। ईवी और किफायती मोबिलिटी समाधानों में भारत की बढ़त और रूस की उन्नत सामग्री क्षमता को मिलाकर ग्लोबल साउथ, विशेषकर अफ्रीका के लिए समाधान विकसित करने की बात कही गई।

नीतिगत सुधार, FTA और मुद्रा में व्यापार

मोदी ने भारत में चल रहे आर्थिक सुधारों, जीएसटी, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म’ के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता बताया। उन्होंने कहा कि रक्षा और स्पेस के बाद अब सिविल न्यूक्लियर सेक्टर भी निजी कंपनियों के लिए खोला जा रहा है।

दोनों नेताओं ने भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर चल रही बातचीत को सकारात्मक कदम बताते हुए इसे व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए जरूरी माना। पुतिन ने जानकारी दी कि दोनों देश धीरे-धीरे अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार की ओर बढ़ रहे हैं और अभी अधिकांश लेनदेन इसी रूप में हो रहे हैं।

वैश्विक राजनीति, यूक्रेन युद्ध और आतंकवाद पर रुख

बैठक में यूक्रेन युद्ध और शांति पहल पर भी चर्चा हुई। पुतिन ने शांति प्रयासों में भारत की भूमिका और मोदी की पहल की सराहना की। मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत तटस्थ नहीं, बल्कि शांति के पक्ष में है और हर रचनात्मक प्रयास का समर्थन करेगा।

आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों नेताओं ने दोहराया कि भारत और रूस लंबे समय से इस खतरे के खिलाफ साथ खड़े हैं। मोदी ने पहलगाम और मॉस्को के क्रोकस सिटी हॉल हमले का संदर्भ देते हुए कहा कि आतंकवाद मानवता के मूल्यों पर हमला है और इसके खिलाफ वैश्विक एकता जरूरी है।

ऐतिहासिक दोस्ती और नेतृत्व की भूमिका

मोदी ने पुतिन की यात्रा को ऐसे समय का ऐतिहासिक पड़ाव बताया जब द्विपक्षीय संबंध कई महत्वपूर्ण माइलस्टोन पार कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2000 में पुतिन की पहली भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी गई थी, जिसे 2010 में स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा मिला।

मोदी ने कहा कि पिछले 25 वर्षों से पुतिन के नेतृत्व ने इस रिश्ते को हर परिस्थिति में स्थिर रखा है और भारत-रूस की दोस्ती ध्रुव तारे की तरह अटल बनी रही है। पुतिन ने भी भारत को भरोसेमंद साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल हथियारों तक सीमित नहीं, बल्कि बहुआयामी और दीर्घकालिक हैं।

निष्कर्ष: डिफेंस से आगे बढ़ता व्यापक साझेदारी मॉडल

पुतिन की इस यात्रा में भले ही किसी बड़े रक्षा सौदे की घोषणा नहीं हुई, लेकिन व्यापार, ऊर्जा, न्यूक्लियर, लॉजिस्टिक्स, शिक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य और मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहमति बनी। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य मात्र द्विपक्षीय कारोबार बढ़ाना नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के लिए स्थायी समाधान खोजते हुए मानवता की भलाई में योगदान देना है।

2030 तक 100 अरब डॉलर से अधिक व्यापार, नए ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, ई-वीजा, स्किल्ड वर्कफोर्स और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग जैसे कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण संकेत हैं। यात्रा ने यह संदेश मजबूत किया कि बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के बीच भारत-रूस संबंध भरोसे, रणनीतिक स्वायत्तता और दीर्घकालिक साझेदारी के नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं।

Lokendra Mishra