इंडिगो संकट से हंगामा, यात्रियों ने जमीन पर रात काटी

· 1 min read
इंडिगो संकट से हंगामा, यात्रियों ने जमीन पर रात काटी

इंडिगो उड़ान संकट से यात्रियों की रात एयरपोर्ट की जमीन पर कटी

इंडिगो एयरलाइन में जारी क्रू मेंबर की कमी का असर पांचवें दिन भी सामने आया। देश के कई एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को घंटों नहीं, बल्कि पूरी रात तक फ्लाइट का इंतजार करना पड़ा। कई उड़ानें रद्द या देरी से होने के कारण हंगामे की स्थिति बन गई।

एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी और भावुक यात्री

फ्लाइट्स के लगातार रद्द होने से बेंगलुरु सहित कई एयरपोर्ट्स पर यात्रियों ने बेहद मुश्किल हालात झेले। कुछ लोग फूट-फूट कर रोते नजर आए, तो कई ने एयरलाइन स्टाफ पर गुस्सा जताया। महिलाएं सुरक्षा बलों से बहस करती दिखीं और हंगामे के दृश्य सामने आए।

एयरपोर्ट के टर्मिनल के साथ-साथ विमान खड़े करने वाली जगह यानी एप्रन क्षेत्र तक भी यात्री पहुंच गए। कई लोगों ने वहीं जमीन पर चादर या बैग बिछाकर रात गुजारी। लंबे इंतजार के कारण छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सामान से लेकर नींद तक छिन गई

फ्लाइट संचालन बिगड़ने से बैगेज हैंडलिंग पर भी असर दिखा। एयरपोर्ट पर सूटकेस के ढेर लगे रहे और कई यात्रियों को 3 से 4 दिनों से अपना सामान वापस नहीं मिल पाया। यात्रियों ने बताया कि न तो सही जानकारी मिल रही है और न ही आगे की यात्रा की स्पष्ट व्यवस्था दी जा रही है।

कई परिवारों के साथ उनके पालतू जानवर भी फंसे रहे। एक यात्री की बिल्ली भी घंटों तक फ्लाइट का इंतजार करती दिखी, जो अव्यवस्था का प्रतीक बन गई।

इंडिगो पर दबाव और सरकारी राहत

पिछले चार-पांच दिनों में इंडिगो की 1200 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। क्रू की कमी और ड्यूटी रोस्टर के सख्त नियमों के कारण कंपनी पर दबाव लगातार बढ़ा। स्थिति बिगड़ने के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने इंडिगो सहित एयरलाइंस को अस्थायी राहत दी है और वीकली रेस्ट से जुड़े नियमों में ढील की घोषणा की है।

नए प्रावधानों के तहत फ्लाइट क्रू को मिलने वाला साप्ताहिक विश्राम समय 48 घंटे से घटाकर 36 घंटे कर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि क्रू उपलब्धता बढ़े और उड़ानों का संचालन धीरे-धीरे सामान्य हो सके।

निष्कर्ष: यात्रियों की परेशानी और व्यवस्था पर सवाल

इंडिगो की उड़ानें रद्द होने से हजारों यात्रियों की यात्राएं प्रभावित हुई हैं। रात भर जमीन पर सोना, दिनों तक सामान न मिलना और स्पष्ट जानकारी का अभाव जैसी समस्याओं ने एयरलाइन की तैयारी और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि सरकार ने नियमों में ढील देकर ऑपरेशन सामान्य करने की कोशिश की है, लेकिन यात्रियों के भरोसे की बहाली और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए एयरलाइन और नियामकों दोनों को ठोस कदम उठाने होंगे।

Janmejay Chaturvedi