जीएसटी बदलाव के बाद मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दवाओं का बड़ा संकट
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पताल इन दिनों आवश्यक दवाओं की भारी कमी से जूझ रहे हैं। राज्य की एसेंशियल ड्रग लिस्ट (ईडीएल) में शामिल 530 दवाओं में से लगभग 200 तरह की महत्वपूर्ण दवाएं फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। जिला अस्पतालों में गॉज पट्टी, वेंडेज, मल्टीविटामिन, एंटीबायोटिक और रैबीज एंटीबॉडी जैसी आवश्यक सामग्री तक की कमी देखी जा रही है।
जीएसटी दरों में बदलाव से अटकी रेट कॉन्ट्रेक्ट प्रक्रिया
सितंबर के अंत में जीएसटी दरों में बदलाव किया गया था और कई दवाओं पर जीएसटी घटाया गया। इसके बाद दवाओं की खरीदी के लिए नए सिरे से रेट कॉन्ट्रेक्ट (आरसी) प्रक्रिया पूरी की जानी थी। मध्य प्रदेश हेल्थ कॉर्पोरेशन आरसी के आधार पर दवाएं खरीदकर मांग के अनुसार सरकारी अस्पतालों में वितरित करता है, लेकिन सभी दवाओं के लिए नई आरसी प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है। इसी देरी के कारण दवाओं की कमी पैदा हो गई है।
इमरजेंसी और ऑपरेशन थियेटर पर सीधा असर
दवाओं की कमी का सीधे तौर पर इलाज, ऑपरेशन थियेटर और आपातकालीन सेवाओं पर प्रभाव पड़ रहा है। कई अस्पतालों में ऑपरेशन टालने पड़े हैं। जिन दवाओं के लिए रेट कॉन्ट्रेक्ट नहीं हो पाया, उनके दाम तय न होने से स्थिति और जटिल हुई है। कुछ जिलों में जरूरत बताकर लोकल पर्चेज के जरिए दवाएं बाजार दर से भी ज्यादा कीमत पर खरीदे जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
लोकल पर्चेज की लिमिट बढ़ाने की तैयारी और आशंकाएं
दवाओं की लगातार कमी के बीच लोकल पर्चेज की सीमा बढ़ाने पर विचार हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक, स्टेट लेवल पर रेट कॉन्ट्रेक्ट करने की जगह विभागीय अधिकारी लोकल पर्चेज की लिमिट 20% से बढ़ाकर 30% करने पर विचार कर रहे हैं। वर्तमान 20% लिमिट के भीतर ही कई अस्पतालों में दवाएं बाजार भाव से अधिक कीमत पर खरीदी जाती रही हैं, ऐसे में सीमा बढ़ने से महंगी खरीदी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
48 से ज्यादा आइटम वर्षों से बिना रेट कॉन्ट्रेक्ट
ईडीएल सूची में जिन दवाओं का रेट कॉन्ट्रेक्ट नहीं है, उनके लिए नई आरसी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी चल रही है। जीएसटी में बदलाव के बाद कुछ आइटम के दाम नए सिरे से तय किए जाने हैं। जानकारी के अनुसार, 48 से अधिक ऐसे आइटम हैं जिनका पिछले 4–5 साल से रेट कॉन्ट्रेक्ट नहीं हो पाया है।
स्वास्थ्य विभाग की स्पष्टीकरण और आगे की योजना
मध्य प्रदेश हेल्थ कॉर्पोरेशन के एमडी मयंक अग्रवाल के अनुसार, ईडीएल सूची की जिन दवाओं का रेट कॉन्ट्रेक्ट नहीं हुआ है, उनकी आरसी करने की तैयारी चल रही है। जीएसटी बदलाव के बाद कुछ आइटमों की नई कीमत तय की जानी है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों के साथ मिलकर लोकल पर्चेज की सीमा 30% करने पर चर्चा की जा रही है।
दवाओं की वर्तमान कमी, लंबित रेट कॉन्ट्रेक्ट और लोकल पर्चेज की संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और लागत, दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
Ravi Yadav