जल जीवन मिशन में लापरवाही पर 16 इंजीनियरों को नोटिस, जल सुरक्षा अभियान तेज
मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के कार्यों में लगातार गड़बड़ियां सामने आने के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। विभागीय समीक्षा के आधार पर कई अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कदम उठाए जा रहे हैं, साथ ही जल सुरक्षा और पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए विशेष अभियान भी चल रहे हैं।
प्रमुख सचिव ने 16 इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस के निर्देश दिए
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरि ने जल जीवन मिशन की समीक्षा के बाद 16 इंजीनियरों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। इनमें 3 सुपरीटेंडिंग इंजीनियर और 13 एक्जीक्यूटिव इंजीनियर शामिल हैं। यह समीक्षा बैठक गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें मिशन के विभिन्न कार्यों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य सचिव की पूर्व कार्रवाई: 141 इंजीनियरों को नोटिस, 280 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट
इससे पहले मुख्य सचिव अनुराग जैन ने जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक में 141 सब इंजीनियरों और एक्जीक्यूटिव इंजीनियरों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। साथ ही 280 एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। यह कदम मिशन में आ रही गड़बड़ियों और काम की धीमी रफ्तार को देखते हुए उठाया गया।
धीमी प्रगति पर अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी
प्रमुख सचिव पी. नरहरि ने स्पष्ट किया कि जल जीवन मिशन के कार्यों की धीमी प्रगति के लिए संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। बैठक में एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराने की जिलेवार समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि कई जिलों में घरों तक नल कनेक्शन प्रदान किए जाने की गति निर्धारित लक्ष्यों और तय समय-सीमा के अनुरूप नहीं है।
जल सुरक्षा और स्वच्छ जल अभियान के तहत बड़े पैमाने पर कार्य
राज्य में जल सुरक्षा, जल संरक्षण, जल सुनवाई एवं स्वच्छ जल अभियान के अंतर्गत नगरीय निकायों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
लीकेज सुधार, टंकियों की सफाई और जल परीक्षण
अभियान के तहत अब तक 4,095 जल लीकेज का सुधार और मरम्मत कार्य कराया जा चुका है। इसके साथ ही 2,448 पानी की टंकियों की सफाई पूरी की गई है, जिससे पेयजल की स्वच्छता में सुधार की कोशिश की जा रही है।
इसके अलावा 6,777 ट्यूबवेलों के जल की गुणवत्ता की जांच कराई गई है। जांच में प्रदूषित पाए गए 58 ट्यूबवेलों को बंद करा दिया गया है, ताकि लोगों को दूषित पानी से होने वाले संभावित जोखिम से बचाया जा सके।
निष्कर्ष: लापरवाही पर सख्ती और पेयजल व्यवस्था सुधारने पर जोर
समीक्षा बैठकों और जारी किए गए नोटिसों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार जल जीवन मिशन में लापरवाही को बर्दाश्त नहीं कर रही है। अधिकारियों और एजेंसियों पर कार्रवाई के साथ-साथ लीकेज सुधार, टंकी सफाई और जल परीक्षण जैसे उपायों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
Janmejay Chaturvedi