जम्मू-कश्मीर में 2025: आतंकवाद विरोधी कार्रवाई और ऑपरेशन सिंदूर
वर्ष 2025 जम्मू-कश्मीर के लिए आतंकवाद और सुरक्षा मोर्चे पर बेहद अहम रहा। एक ओर सुरक्षा बलों ने आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की, वहीं दूसरी तरफ सीमा पार गोलीबारी और आतंकी हमलों में नागरिकों व सुरक्षाकर्मियों की जान गई।
आतंकवाद विरोधी अभियानों में 46 आतंकी मारे गए
अधिकारियों के अनुसार 2025 में जम्मू-कश्मीर में कुल 35 आतंकवाद संबंधी घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं के दौरान सुरक्षा बलों ने 46 आतंकियों को मार गिराया। मारे गए आतंकियों में पहलगाम हमले में शामिल सुलेमान शाह उर्फ हाशिम मूसा, हमजा अफगानी और जिब्रान जैसे अहम नाम भी शामिल रहे।
इन तीनों की तलाश लंबे समय से चल रही थी और 28 जुलाई को हुई मुठभेड़ में इन्हें ढेर कर दिया गया। इन कार्रवाइयों के दौरान सुरक्षा बलों ने कई हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया, जिससे उनकी क्षमता कमजोर हुई और आगे हमले की उनकी योजनाओं पर चोट पहुंची।
सुरक्षाबलों की शहादत और घुसपैठ की कोशिशें
आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान साल भर में तीन जवान शहीद हुए। फरवरी में अखनूर सेक्टर में हुए आईईडी ब्लास्ट में दो जवानों ने प्राण न्यौछावर किए, जबकि अप्रैल में उधमपुर के बसंतगढ़ इलाके में एक जवान शहीद हुआ।
कश्मीर फ्रंटियर की रिपोर्ट के अनुसार, नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की चार कोशिशें दर्ज की गईं। इन प्रयासों में कुल 13 आतंकी शामिल थे, जिनमें से आठ को ऑपरेशन के दौरान मार गिराया गया और पांच आतंकियों को खदेड़ दिया गया। इससे स्पष्ट हुआ कि सीमा पर सतत निगरानी और त्वरित कार्रवाई से बड़े हमलों को टाला जा सका।
पहलगाम हमला: 26 लोगों की जान गई
साल 2025 का सबसे बड़ा आतंकी हमला 22 अप्रैल को पहलगाम में हुआ। इस हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक की मौत हो गई। हमले ने घाटी की पर्यटन गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा की, क्योंकि पहलगाम को अपेक्षाकृत सुरक्षित पर्यटन स्थल माना जाता रहा है।
इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पहलगाम और आसपास के इलाकों में जांच, तलाशी और खुफिया निगरानी को काफी सख्त कर दिया। साथ ही, हमले में शामिल आतंकियों की पहचान कर उन्हें खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया, जिसका परिणाम आगे चलकर ऑपरेशन सिंदूर के रूप में दिखा।
ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 9 ठिकाने तबाह
पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने 6–7 मई की रात विशेष सैन्य कार्रवाई शुरू की, जिसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और इन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया। इन ठिकानों को हमलों की साजिश, प्रशिक्षण और घुसपैठ की तैयारी के प्रमुख केंद्र माना जा रहा था। इस कार्रवाई ने भारत की ओर से यह संदेश दिया कि बड़े हमलों का जवाब सिर्फ रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक तरीके से भी दिया जाएगा।
LoC पर भारी गोलाबारी, 21 नागरिकों की मौत
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने 7 से 10 मई के बीच नियंत्रण रेखा पर भारी गोलाबारी की। खास तौर पर जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में सीमा पार से हुए हमलों में रिहायशी क्षेत्रों को निशाना बनाया गया।
इस गोलाबारी में कम से कम 21 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई और कई घरों व संरचनाओं को नुकसान पहुंचा। बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को अपने गांव छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा, जिससे सीमावर्ती इलाकों में मानवीय और सुरक्षा दोनों तरह का संकट गहरा गया।
श्रीनगर के नौगाम पुलिस थाने में भीषण विस्फोट
14 नवंबर को श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में देर रात लगभग 11:22 बजे एक बड़ा विस्फोट हुआ। इस हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई और 32 लोग घायल हुए।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह विस्फोट उस समय हुआ जब पुलिस और फोरेंसिक टीमें दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े एक व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल के मामले में जब्त विस्फोटकों के सैंपल ले रही थीं। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी नलिन प्रभात ने इसे एक हादसा बताया।
मारे गए नौ लोगों में एक इंस्पेक्टर, फोरेंसिक टीम के तीन सदस्य, क्राइम ब्रांच के दो फोटोग्राफर, दो राजस्व अधिकारी और एक दर्जी शामिल थे। इस घटना ने आतंकी मामलों की जांच के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल और विस्फोटक हैंडलिंग की प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए।
भारतीय सेना की व्यापक उपलब्धियां और रणनीतिक बदलाव
इसी वर्ष भारतीय सेना ने समग्र स्तर पर दस बड़े लक्ष्य पूरे किए। इनमें ऑपरेशन सिंदूर के अलावा नई सैन्य ताकत का विकास, आधुनिक तकनीक का अधिक उपयोग, स्वदेशी हथियारों पर जोर और मित्र देशों के साथ सैन्य सहयोग को मजबूत करना शामिल रहा।
मेड इन इंडिया प्लेटफॉर्म पर जोर देते हुए सेना ने कई स्वदेशी प्रणालियों और हथियारों को अपनाया। साथ ही, निगरानी, संचार और ड्रोन तकनीक जैसी आधुनिक प्रणालियों के उपयोग से आतंकवाद विरोधी अभियानों की दक्षता बढ़ाने के प्रयास तेज हुए।
निष्कर्ष: सुरक्षा सख्त, चुनौतियां बरकरार
2025 में जम्मू-कश्मीर में एक ओर सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाइयों से कई बड़े खतरों को कम किया, वहीं दूसरी ओर नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जानें भी गईं। ऑपरेशन सिंदूर जैसी आक्रामक कार्रवाई ने भारत की रणनीतिक नीति में बदलाव के संकेत दिए, लेकिन सीमा पार गोलीबारी, आतंकी हमले और आकस्मिक विस्फोट जैसे घटनाक्रम बताते हैं कि चुनौतियां अभी भी गंभीर हैं। आने वाले समय में सख्त सुरक्षा, स्थानीय लोगों का सहयोग, खुफिया तंत्र की मजबूती और राजनीतिक-सामाजिक समाधान, सभी मिलकर ही स्थायी शांति की दिशा में रास्ता बना सकते हैं।
Satyam Tripathi