JNU में मोदी-शाह की कब्र खुदेगी नारेबाजी पर बवाल, FIR की मांग तेज

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JNU में मोदी-शाह की कब्र खुदेगी नारेबाजी पर बवाल, FIR की मांग तेज

JNU में विवादित नारेबाजी, प्रशासन ने FIR की मांग की

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में सोमवार रात कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादित नारे लगाए जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। इन नारों का एक 35 सेकंड का वीडियो मंगलवार को सामने आया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो और लगाए गए नारे

वीडियो में कुछ छात्र ‘मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर’ जैसे नारे लगाते और गाते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह नारेबाजी कैंपस के भीतर हुई बताई जा रही है। इस घटनाक्रम के बाद इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं।

BJP और कांग्रेस की प्रतिक्रियाएं

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन 2020 दिल्ली दंगों की साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में किया गया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि राष्ट्रविरोधी विचारधारा का प्रसार है।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस नारेबाजी को गुस्सा व्यक्त करने का एक तरीका बताया और इसे छात्रों के असंतोष की अभिव्यक्ति कहा। इस मुद्दे पर दोनों पार्टियां आमने-सामने हैं।

उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज

यह घटनाक्रम उस फैसले के अगले दिन सामने आया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े केस में आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया था। शरजील इमाम 28 जनवरी 2020 से और उमर खालिद 13 सितंबर 2020 से हिरासत में हैं।

दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जमानत देने से मना किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2025 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा कि वे एक साल तक दोबारा जमानत याचिका दायर नहीं कर सकते।

JNU स्टूडेंट्स यूनियन का पक्ष

JNU स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने बताया कि हर साल छात्र 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुई हिंसा की निंदा करने के लिए विरोध प्रदर्शन करते हैं। उनके अनुसार, इस वर्ष भी उसी सिलसिले में प्रदर्शन किया गया।

उन्होंने समाचार एजेंसी PTI को कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान लगाए गए सभी नारे वैचारिक थे, किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत हमला नहीं था और न ही वे किसी विशेष व्यक्ति के लिए सीधे तौर पर निर्देशित थे।

JNU प्रशासन की कार्रवाई और बयान

मंगलवार दोपहर JNU प्रशासन ने वसंत कुंज पुलिस को पत्र लिखकर साबरमती हॉस्टल के बाहर हुई नारेबाजी के संबंध में FIR दर्ज करने की मांग की। प्रशासन ने इसे विश्वविद्यालय के नियमों के गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा है।

JNU प्रशासन ने कहा कि इस तरह के नारे लगाना लोकतांत्रिक विरोध के खिलाफ है और विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है। उनके अनुसार, इससे सार्वजनिक व्यवस्था, कैंपस में शांति और सुरक्षा माहौल को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

पत्र में यह भी कहा गया कि लगाए गए नारे साफ-साफ सुनाई दे रहे थे, उन्हें जानबूझकर और बार-बार दोहराया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि यह कोई अचानक या अनजाने में हुई घटना नहीं, बल्कि सोच-समझकर किया गया गलत काम था। प्रशासन ने इसे अनुशासन, नियमों और कैंपस के शांतिपूर्ण वातावरण की जानबूझकर अवहेलना करार दिया।

5 जनवरी 2020 की JNU हिंसा की पृष्ठभूमि

5 जनवरी 2020 को JNU कैंपस में हिंसा भड़क उठी थी। कुछ नकाबपोश लोगों ने कैंपस में घुसकर तीन हॉस्टलों में छात्रों पर लाठियों, पत्थरों और लोहे की छड़ों से हमला किया था। इस दौरान हॉस्टलों के निवासियों के साथ मारपीट की गई और खिड़कियां, फर्नीचर तथा निजी सामान तोड़ दिए गए थे।

लगभग दो घंटे तक कैंपस में अराजक स्थिति बनी रही, जिसमें उस समय की JNU स्टूडेंट्स यूनियन अध्यक्ष आइशी घोष सहित कम से कम 28 लोग घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस पर कैंपस में हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई न करने और दर्ज FIR में घोष सहित छात्र संघ नेताओं के नाम शामिल होने पर पक्षपात के आरोप लगे थे।

दिल्ली दंगों का मामला

फरवरी 2020 में दिल्ली में हिंसा भड़की थी, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और 250 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस हिंसा से जुड़े मामलों में 750 से ज्यादा FIR दर्ज की गईं। इन्हीं मामलों की साजिश से संबंधित केस में उमर खालिद और शरजील इमाम पर आरोप हैं और वे UAPA के तहत हिरासत में हैं।

निष्कर्ष

JNU में ताजा नारेबाजी की घटना ने एक बार फिर विश्वविद्यालय की राजनीति, अभिव्यक्ति की आजादी, राष्ट्रवाद और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर प्रशासन और भाजपा इसे गंभीर उल्लंघन और राष्ट्रविरोधी प्रवृत्ति के रूप में देख रहे हैं, वहीं छात्र नेतृत्व और कांग्रेस इसे विरोध और गुस्से की अभिव्यक्ति बता रहे हैं। अब पुलिस की संभावित FIR और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

Sharad Shrivastava