दिल्ली में कांग्रेस की रैली पर नारेबाजी का विवाद, भाजपा का तीखा हमला
दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की 'वोट चोर गद्दी छोड़' रैली आपत्तिजनक नारेबाजी के कारण राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई। रैली में जाते कुछ कार्यकर्ताओं के वीडियो सामने आए, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बेहद तीखे नारे लगाए गए।
रैली में आपत्तिजनक नारे, भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' जैसे नारे लगाते दिखे। इन नारों की कड़ी आलोचना करते हुए भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इससे कांग्रेस की मानसिकता सामने आ गई है और वह प्रधानमंत्री की मौत की कामना कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सोच मुस्लिम लीग और माओवादी विचारधारा जैसी हो गई है।
त्रिवेदी ने यह भी दावा किया कि जो पार्टी प्रधानमंत्री की कब्र खोदने की बात कर रही है, वही खुद राजनीतिक रूप से दफन हो जाएगी। उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे मुगल साम्राज्य औरंगजेब के बाद खत्म हो गया, वैसे ही राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का भी वही हाल होगा।
नेहरू-गांधी परिवार और मुगल शासन की तुलना
भाजपा सांसद ने मुगल शासकों और नेहरू-गांधी परिवार की तुलना करते हुए कहा कि मुगल साम्राज्य में बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब मिलकर छह पीढ़ियों तक सत्ता में रहे और उसके बाद उनका राज खत्म हो गया। इसी तरह कांग्रेस में मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी के बाद अब राहुल गांधी छठी पीढ़ी के नेता के रूप में सामने हैं, और उनके बाद पार्टी का भविष्य भी मुगलों जैसा हो सकता है।
जयपुर की कांग्रेस नेता पर आरोप, नारे पर सफाई
नारेबाजी के वीडियो में नजर आने वाली महिला कार्यकर्ता की पहचान जयपुर महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष मंजू लता मीणा के रूप में हुई। उन पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाने का आरोप है। मीणा ने सफाई देते हुए कहा कि वह वोट चोरी के मुद्दे पर जनता के गुस्से को दिखा रही थीं और आरोप लगाया कि भाजपा ने धांधली करके सरकारें बनाई हैं। उनके अनुसार चुनाव आयोग भी भाजपा के निर्देशों के अनुसार काम कर रहा है, जिससे जनता में रोष है।
'वोट चोर गद्दी छोड़' रैली का मकसद और कांग्रेस के आरोप
यह रैली कांग्रेस के उस अभियान का हिस्सा थी, जिसमें वह भाजपा और चुनाव आयोग पर वोट चोरी के आरोप लगातार दोहरा रही है। राहुल गांधी इससे पहले कई प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव प्रणाली, वोटिंग प्रक्रिया और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को केंद्र सरकार की 'बी टीम' बताया था और संसद में SIR से जुड़े मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा था।
रैली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंच साझा किया और केंद्र सरकार पर तीखे हमले बोले।
राहुल गांधी का आरोप: सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आत्मविश्वास खत्म हो चुका है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी घबराहट में हैं, क्योंकि उनकी कथित चोरी पकड़ी जा चुकी है। उन्होंने चुनाव आयुक्तों ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह और विवेक जोशी पर भाजपा के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया।
राहुल ने कहा कि सरकार ने इन अफसरों के लिए कानून बदला है और अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो इस कानून को बदला जाएगा तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों को याद रखना चाहिए कि वे देश के हैं, किसी पार्टी के नहीं।
मल्लिकार्जुन खड़गे की भावुक अपील
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने भाषण में बताया कि रैली के दिन उनके बेटे का आठ घंटे का ऑपरेशन होना था, फिर भी वे कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि जब देश के लिए जवान अपनी जान दे रहे हैं और इंदिरा गांधी, राजीव गांधी ने बलिदान दिया, तो वे अपने बेटे के लिए संघर्ष छोड़कर नहीं जा सकते। खड़गे ने कहा कि देश के लोगों की सुरक्षा और अधिकार सर्वोपरि हैं, भले ही व्यक्तिगत नुकसान क्यों न हो जाए।
प्रियंका गांधी का प्रधानमंत्री और भाजपा पर हमला
प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया कि वे विदेशी राष्ट्रपतियों के साथ फोटो खिंचवाने में तो आगे रहते हैं, लेकिन देश की जनता के बीच नहीं जाते और उनके दुख नहीं सुनते। उन्होंने कहा कि संसद में सरकार का आत्मविश्वास कम दिखाई देता है और नेता विपक्ष से आंख मिलाकर बात नहीं कर पाते।
प्रियंका ने दावा किया कि जनता का भरोसा अब मोदी और अमित शाह से हट चुका है और भाजपा चुनाव आयोग पर निर्भर हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के बिना भाजपा चुनाव नहीं जीत सकती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों पर ऑनलाइन बेटिंग एप से जुड़े आरोपों पर गंभीर चर्चा क्यों नहीं होती, जबकि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर सवाल उठते हैं।
प्रियंका ने कहा कि जो संस्थाएं और व्यवस्थाएं कांग्रेस सरकारों ने लंबे समय में तैयार की थीं, उन्हें मौजूदा सरकार ने कमजोर कर दिया है।
निष्कर्ष: नारे से शुरू हुआ विवाद व्यापक राजनीतिक टकराव में बदला
रामलीला मैदान की कांग्रेस रैली में लगे एक आपत्तिजनक नारे ने सत्ता और विपक्ष के बीच पहले से चल रही राजनीतिक जंग को और तीखा बना दिया है। भाजपा ने इसे कांग्रेस की मानसिकता और नेतृत्व पर हमला करने का अवसर बताया, वहीं कांग्रेस ने रैली के माध्यम से चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर वोट चोरी, संस्थागत पक्षपात और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के कमजोर होने के गंभीर आरोप दोहराए। आने वाले दिनों में इस विवाद का असर संसद की बहसों और चुनावी बयानबाजियों में और गहरा दिख सकता है।
Bhavanesh Soni