कर्ज, बजट और राजस्व पर सरकार की सफाई: डिप्टी सीएम देवड़ा की प्रेस कॉन्फ्रेंस
कर्ज को निवेश बताया, अधोसंरचना पर खर्च का दावा
उप मुख्यमंत्री एवं वित्त व वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य सरकार द्वारा लिया जाने वाला ऋण वास्तव में निवेश है। उनके अनुसार, इस राशि का उपयोग केवल अधोसंरचना और निर्माण से जुड़े विकास कार्यों पर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि लाडली बहना योजना की राशि बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री से चर्चा की गई है।
हर साल 28–30 हजार करोड़ रुपए ब्याज भुगतान
देवड़ा ने बताया कि राज्य सरकार लिमिट के भीतर रहकर कर्ज ले रही है और वर्तमान में हर साल लगभग 28 से 30 हजार करोड़ रुपए केवल ब्याज के रूप में चुकाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों के लिए रोलिंग बजट की प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें बजट प्रक्रिया से संबंधित नए नवाचार शामिल किए जा रहे हैं।
बजट मैनेजमेंट एक्ट के तहत कर्ज, जीएसडीपी का 3 प्रतिशत सीमा
अपर मुख्य सचिव वित्त विभाग मनीष रस्तोगी ने बार-बार कर्ज लेने के सवाल पर स्पष्ट किया कि बजट मैनेजमेंट एक्ट के तहत ऋण लेने की व्यवस्था तय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें कर्ज लेकर तुरंत चुका नहीं पातीं, इसलिए बजट प्रबंधन अधिनियम बनाया गया है। इस अधिनियम का उल्लंघन किए बिना, भारत सरकार द्वारा निर्धारित सीमा के आधार पर ही कर्ज लिया जा रहा है।
रस्तोगी के मुताबिक, राज्य सरकार सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 3 प्रतिशत तक ही ऋण ले सकती है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में जीएसडीपी 16 लाख 94 हजार करोड़ रुपए अनुमानित है, जिसके आधार पर उतने ही अनुपात में ऋण लिया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि जितना कर्ज एलाउड है, उतना ही लिया जा रहा है और आज की तारीख में राज्य सरकार 28 से 30 हजार करोड़ रुपए सालाना ब्याज चुका रही है।
कोविड और सेस योजना से जुड़ा कर्ज
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि कोविड अवधि के दौरान ऋण की राशि का एक हिस्सा राजस्व व्यय में भी लगाना पड़ा था। उन्होंने कहा कि विकास के लिए कर्ज लेना जरूरी है, इसलिए ही सरकार ऋण लेती है। रस्तोगी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार द्वारा लागू सेस योजना के तहत लिया गया दीर्घकालिक कर्ज भी कुल ऋण में दिखाई देता है, जो अधिक लगता है, जबकि उसे 50 वर्ष की अवधि में वापस करना होता है।
रोलिंग बजट 2028-29 तक, विधानसभा में पेश करने का प्रावधान नहीं
मनीष रस्तोगी ने जानकारी दी कि सरकार 2028-29 तक के लिए रोलिंग बजट तैयार कर रही है। हालांकि, वर्तमान कानूनों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि इस प्रकार के रोलिंग बजट को विधानसभा में रखा जा सके, इसलिए इसे सदन के समक्ष पेश नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रोलिंग बजट से यह लाभ होगा कि किस विभाग ने कितना पैसा खर्च किया और कितना शेष है, इसका स्पष्ट हिसाब सरकार के पास रहेगा।
राजस्व और टैक्स चोरी रोकने के प्रयास
उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि शासकीय सेवकों और पेंशनरों के हित में कई फैसले लिए गए हैं। वाणिज्यिक कर विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियां बताते हुए उन्होंने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 55 हजार 634 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवंबर माह तक 34 हजार 829 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हो चुका है।
देवड़ा ने बताया कि वर्ष 2025-26 में नवंबर तक डेटा एनालिटिक्स के आधार पर चिन्हित मामलों में प्रवर्तन कार्यवाहियों से 967 करोड़ रुपए और ऑडिट कार्यवाही से 404 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है। साथ ही बुरहानपुर, राजगढ़, खरगोन, झाबुआ, कटनी और नरसिंहपुर जिलों में वाणिज्यिक कर विभाग के नए कार्यालय भवनों का निर्माण कराया जा रहा है।
आबकारी विभाग की आगामी तीन वर्षों की कार्य योजना
देवड़ा ने आबकारी विभाग की आगामी योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि राजस्व में वृद्धि के लिए राज्य और देश के बाहर मदिरा के निर्यात को बढ़ावा देने हेतु एकीकृत नीति तैयार की जाएगी। मदिरा उपभोग और विक्रय के लिए एक दिवस का लाइसेंस मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से जारी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी शासकीय विभागों, निगमों और मंडलों द्वारा जारी वर्क ऑर्डर और भुगतान की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए डेटा रिपॉजिटरी बनाई जाएगी। डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से प्रवर्तन की कार्रवाई की जाएगी और फर्जी व्यवसायियों पर निगरानी रखकर गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के उपयोग पर नियंत्रण किया जाएगा। टैक्स चोरी पर नियंत्रण और निगरानी के लिए यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए विभाग में अलग से डेटा एनालिटिक्स और टैक्स रिसर्च यूनिट का गठन किया जाएगा।
पंजीयन विभाग की डिजिटल उपलब्धियां
देवड़ा ने बताया कि पंजीयन विभाग में मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां 75 प्रकार के दस्तावेज, जैसे पट्टा, पावर ऑफ अटर्नी और बंधक आदि, घर बैठे वीडियो केवाईसी के माध्यम से पंजीकृत किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि संपदा 2.0 को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025 में स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया है।
पंजीयन विभाग की राजस्व स्थिति
पंजीयन विभाग की राजस्व प्राप्ति के बारे में देते हुए बताया गया कि वर्ष 2023-24 के लिए 10 हजार 700 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले 10 हजार 325 करोड़ रुपए राजस्व प्राप्त हुआ। वर्ष 2024-25 के लिए 12 हजार 500 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा गया है और अब तक 11 हजार 355 करोड़ रुपए की प्राप्ति दर्ज की गई है।
वर्ष 2025-26 के लिए 13 हजार 920 करोड़ रुपए का लक्षित राजस्व निर्धारित किया गया है। नवंबर 2025 तक की स्थिति के अनुसार, 7 हजार 580 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हो चुका है।
निष्कर्ष: सीमित कर्ज, संरचित बजट और डिजिटल सुधार पर जोर
प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राज्य सरकार ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि कर्ज को विकास और अधोसंरचना में निवेश के रूप में देखा जा रहा है और इसे निर्धारित सीमा के भीतर ही लिया जा रहा है। साथ ही, रोलिंग बजट, डेटा एनालिटिक्स आधारित प्रवर्तन, डिजिटल पंजीयन और आबकारी नीति के माध्यम से राजस्व बढ़ाने और पारदर्शिता मजबूत करने पर बल दिया जा रहा है।
Satyam Tripathi